MP News: 50% तक खराब चमक वाला गेहूं भी खरीदेगी सरकार, अन्नदाताओं को राहत: सीएम डॉ. मोहन यादव

मध्य प्रदेश सरकार किसानों के लिए समर्थन का विस्तार कर रही है, जिससे 50% तक चमक हानि वाले गेहूं की एमएसपी खरीद की अनुमति मिल रही है और निम्न गुणवत्ता वाले अनाज के लिए सहनशीलता बढ़ रही है। नीतिगत बदलाव उड़द और सरसों के लिए मूल्य समर्थन को भी बढ़ाता है, सौर ऊर्जा से चलने वाली सिंचाई को बढ़ावा देता है, और 2026 के लिए समग्र किसान कल्याण योजनाओं को मजबूत करता है।

मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं खरीदी के मानकों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि अब 50 प्रतिशत तक खराब चमक (लस्टर लॉस) वाला गेहूं भी समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। इसके साथ ही कम विकसित दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि क्षतिग्रस्त दानों की सीमा में भी बढ़ोतरी की गई है। इस निर्णय का उद्देश्य किसानों की आय सुनिश्चित करना और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से बचाना है।

Madhya Pradesh expands wheat MSP for farmers

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह से किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और अन्नदाताओं की मेहनत का सम्मान करना उसकी प्राथमिकता है। हाल ही में सरकार ने भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को 4 गुना तक मुआवजा देने का भी ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

राज्य सरकार दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार कदम उठा रही है। उड़द को समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा और किसानों को प्रति क्विंटल 600 रुपये का बोनस भी दिया जाएगा। इसके साथ ही सरसों पर भावांतर योजना लागू होने से किसानों को एमएसपी से अधिक कीमत मिल रही है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते किसान

वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए सरकार किसानों को मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। साथ ही कृषक मित्र योजना के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप दिए जा रहे हैं, जिससे किसान बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

उर्वरकों की बेहतर उपलब्धता

प्रदेश में यूरिया की उपलब्धता 5.90 लाख मीट्रिक टन है और अन्य उर्वरकों का भी पर्याप्त भंडारण किया गया है। सरकार ने वितरण प्रणाली में सुधार करते हुए किसानों को बिना लाइन लगाए सुविधाजनक तरीके से खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।

दुग्ध उत्पादन से बढ़ेगी आय

किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य में 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है और प्रतिदिन दूध संग्रहण 10 लाख किलोग्राम से अधिक हो गया है। दुग्ध उत्पादक किसानों को अब तक 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।

किसान कल्याण योजना का लाभ

मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जो तीन किस्तों में सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जाती है।

गेहूं खरीदी से जुड़े प्रमुख आंकड़े

प्रदेश में गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। 3516 उपार्जन केंद्र संचालित हैं और लाखों किसान स्लॉट बुकिंग के माध्यम से अपनी उपज बेच रहे हैं। अब किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर फसल बेचने की सुविधा भी दी गई है।

सरकार के इन फैसलों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में किसान हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और उनकी समृद्धि के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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