Budget 2026: 'दवा की दुकान' नहीं, अब 'दवाओं का आविष्कारक' बनेगा इंडिया, बॉयोफार्मा के लिए ₹40,000 करोड़ का फंड
Budget 2026 Biopharma Fund: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में भारत को ग्लोबल इनोवेशन हब बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी घोषणा की है। सरकार ने बॉयोफार्मास्युटिकल क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार (R&D) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ₹40,000 करोड़ के विशेष फंड की स्थापना की है।
यह फंड विशेष रूप से नई दवाओं की खोज, जटिल बायोलॉजिक्स और सक्रिय दवा सामग्री (APIs) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए समर्पित होगा। इसका मुख्य उद्देश्य न केवल दवाओं के कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता कम करना है, बल्कि भारतीय स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों को अत्याधुनिक थेरेपी और टीकों के विकास हेतु वित्तीय मजबूती प्रदान करना भी है। यह कदम भारत की 'दुनिया की फार्मेसी' वाली छवि को 'इनोवेशन लीडर' में बदलने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

एक्सपर्ट ने इसे गेम-चेंजर बताया
स्टेरिस हेल्थकेयर के चेयरमैन जीवन कसारा ने वनइंडिया से बात करते हुए बजट 2026 के 'बायोफार्मा शक्ति' कार्यक्रम को भारत के लिए एक गेम-चेंजर बताया है। ₹10,000 करोड़ के इस निवेश के जरिए सरकार भारत को जेनेरिक दवाओं से आगे बढ़ाकर एक बायोफार्मा सुपरपावर बनाने की राह पर है। देश में बढ़ते मधुमेह (10.1 करोड़ मामले) और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को देखते हुए, इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा माना गया है।
इस योजना के तहत भारत में उन्नत R&D केंद्र स्थापित होंगे, जो mRNA वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसे अगली पीढ़ी के उपचार विकसित करेंगे। कसारा के अनुसार, इससे इलाज का खर्च 40% तक कम होगा और बायोफार्मा निर्यात 2030 तक $15 बिलियन से बढ़कर $50 बिलियन तक पहुंच सकता है।
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'5 लाख नए रोजगार पैदा होंगे'
जीवन कसारा ने बताया कि, सरकार के इस कदम से बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में 'बायोटेक कॉरिडोर' बनने से 5 लाख नए रोजगार पैदा होंगे। 'आत्मनिर्भर भारत' की यह पहल अकादमिक संस्थानों और फार्मा कंपनियों को एक साथ लाएगी, जिससे भारत न केवल ग्लोबल बायोफार्मा पुनर्जागरण में शामिल होगा, बल्कि दुनिया को नई दिशा भी देगा।
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मेडिकल टूरिज्म पर भी सरकार का फोकस
बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयुष (AYUSH) और मेडिकल टूरिज्म को लेकर दूरगामी घोषणाएं की हैं। सरकार का लक्ष्य आयुर्वेद को वैश्विक ब्रांड बनाना है, जिसके लिए आयुर्वेदिक दवाओं के निर्यात हेतु एक विस्तृत 'रोडमैप' तैयार किया जाएगा। हालांकि वर्तमान में भी भारतीय पारंपरिक दवाइयों की मांग विदेशों में बढ़ रही है, लेकिन नई नीतियों से निर्यात की रफ्तार में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है।
इसके साथ ही, भारत को 'ग्लोबल मेडिकल टूरिज्म हब' बनाने के लिए एडवांस हेल्थकेयर सिस्टम के विस्तार का ऐलान किया गया है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और किफायती उपचार के तालमेल से विदेशी मरीजों को आकर्षित किया जाएगा, जिससे न केवल राजस्व बढ़ेगा बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा होंगे।












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