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Budget 2026: TDS को लेकर क्या बदला नियम? टैक्सपेयर्स को फायदा होगा या नुकसान?

Budget 2026: केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 (रविवार)को वित्‍तीय वर्ष 2026-2027 का आम बजट पेश किया। हालांकि आम बजट में इनकम टैक्स से जुड़े कोई बड़े ऐलान नहीं किए गए लेकिन टैक्सपेयर्स के लिए राहत देने वाले बड़े बदलाव की घोषणा की है। ये बड़ा बदलाव टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) को लेकर किया गया है।

नए नियम के अनुसार अब यदि आपकी कुल इनकम पर टैक्स नहीं बनता है, तो TDS (Tax Deduction at Source) अपने‑आप कम या बिल्कुल नहीं कटेगा। यानी पहले की तरह अलग से आवेदन देने की जरूरत नहीं होगी। यह बदलाव छोटे करदाताओं, निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत भरा है।

Budget 2026

TDS में नया नियम ऑटोमेटेड सिस्टम क्‍या है?

Budget 2026 में बताया गया कि छोटे और मध्यम आय वाले करदाताओं के लिए rule‑based automated system लागू किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अगर आपकी कुल आय पर टैक्स नहीं बनता है, तो सिस्टम स्वचालित रूप से TDS कम या NIL कर देगा। इसके लिए अब आपको अलग से आयकर अधिकारी या बैंक को आवेदन देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इससे पहले टैक्सेबल आय कम होने पर भी बैंक या कंपनी को Form 15G (60 साल से कम उम्र वाले) या Form 15H (60 साल या अधिक उम्र वाले वरिष्ठ नागरिक) जमा करना पड़ता था।

Form 15G/15H में सुधार

TDS रोकने के लिए Form 15G/15H प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब आप ये फॉर्म एक बार Depositories (NSDL/CDSL) को जमा कर सकते हैं और वे इसे संबंधित कंपनियों और बैंकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेज देंगे। इसका मतलब है कि हर जगह अलग‑अलग फॉर्म जमा करने की जरूरत खत्म हो जाएगी, जिससे टैक्सपेयर्स का समय और मेहनत दोनों बचेंगे।

आसान भाषा में समझे कैसे होगा टैक्‍सपेयर्स को फायदा?

पहले, टैक्स नहीं बनने पर भी हर बैंक या कंपनी को अलग‑अलग फॉर्म देना पड़ता था और यदि फॉर्म नहीं दिया जाता था, तो TDS कट जाता था। इसके बाद टैक्स रिफंड के लिए ITR भरनी पड़ती थी। अब सरकार के ऑटोमेटेड सिस्टम के तहत नियमों के आधार पर TDS स्वतः कम या नहीं कटेगा, और Form 15G/15H केवल एक बार जमा करना काफी होगा।

किसे मिलेगा फायदा?

यह बदलाव छोटे और मध्यम आय वाले करदाताओं, निवेशकों (जैसे FD, NSC, शेयर डिविडेंड आदि पर) और वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत वाला है। साथ ही, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के लिए भी प्रक्रिया आसान होगी, क्योंकि उन्हें बार‑बार फॉर्म की पुष्टि नहीं करनी पड़ेगी।

Budget 2026 में इनकम टैक्‍स को लेकर और क्‍या किए गए हैं बदलाव?

नया इनकम टैक्स कानून

क़ानून: पुराना इनकम टैक्स एक्ट 1961 बदलकर Income Tax Act 2025 लाया गया।

प्रभाव: 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।

टैक्स रेट/स्लैब: कोई बदलाव नहीं, केवल टैक्स रिटर्न फाइलिंग आसान होगी।

विदेश रुपए भेजने पर कम टैक्स

TCS दर: पढ़ाई/इलाज/टूर पैकेज पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) 5% से घटाकर 2% किया गया।

रिवाइज्ड रिटर्न की आखिरी तारीख

नया नियम: मामूली फीस देकर 31 मार्च तक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) सुधार/रिवाइज किया जा सकेगा।

फ्यूचर-ऑप्शंस ट्रेडिंग महंगी

STT दर

फ्यूचर ट्रेडिंग: 0.02% → 0.05%

ऑप्शंस ट्रेडिंग: 0.15%

प्रभाव: ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी।

टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं

पुराना रिजीम: 2.5 लाख तक की इनकम टैक्स‑फ्री, सेक्शन 87A के तहत 5 लाख तक टैक्स बचत।

नया/न्यू टैक्स रिजीम: 4 लाख तक टैक्स‑फ्री, सेक्शन 87A के तहत सैलरीड: 12.75 लाख तक और अन्य: 12 लाख तक टैक्स बचत।

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