AWL एग्री बिजनेस से बाहर आए अडानी, विल्मर इंटरनेशनल को बेची हिस्सेदारी! खत्म हुई 26 साल पुरानी पार्टनरशिप
Adani exits AWL Agri Business: अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) ने एग्री बिजनेस क्षेत्र से पूरी तरह से बाहर निकलने की घोषणा कर दी है। कंपनी ने अपनी हिस्सेदारी AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड (पूर्व में अडानी विल्मर लिमिटेड) से सिंगापुर की विलमर इंटरनेशनल को सौंप दी है। यह कदम भारत की प्रमुख एग्री कंपनियों में से एक के स्वामित्व ढांचे में बड़ा बदलाव है।
17 जुलाई 2025 को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में अडानी एंटरप्राइजेज ने बताया कि उसकी सहायक कंपनी अडानी कमोडिटीज एलएलपी (ACL) ने विलमर इंटरनेशनल की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी Lence Pte. Ltd. के साथ शेयर खरीद समझौता (SPA) किया है।

इस समझौते के तहत विलमर, ACL से AWL की 20% तक हिस्सेदारी ₹275 प्रति शेयर के भाव पर खरीदेगी। इसमें से कम से कम 11% हिस्सेदारी (लगभग 14.3 करोड़ शेयर) की बिक्री तय मानी जा रही है, जबकि अंतिम हिस्सेदारी विलमर के विवेक पर निर्भर करेगी।
इस डील से पहले जनवरी 2025 में ACL ने SEBI की Minimum public shareholding (MPS) की शर्त पूरी करने के लिए 13.5% हिस्सेदारी ₹276.51 प्रति शेयर पर बेची थी। उस बिक्री के बाद ACL की हिस्सेदारी 30.42% रह गई थी।

रणनीतिक एक्ज़िट और भारी कमाई
इस नए सौदे के साथ अडानी का AWL से पूर्ण रूप से बाहर निकलना तय हो गया है, जिससे 1999 से चली आ रही अडानी-विलमर की संयुक्त साझेदारी का औपचारिक अंत हो जाएगा। डील पूरी होने के बाद विलमर की AWL में हिस्सेदारी 64% हो जाएगी और वह प्रमुख शेयरधारक बन जाएगा। अडानी को दोनों सौदों के जरिए कुल ₹15,729 करोड़ की राशि प्राप्त होगी, जनवरी की बिक्री से ₹4,855 करोड़ और नवीनतम बिक्री से ₹10,874 करोड़। यदि विलमर 20% की सीमा के भीतर कुछ शेयर नहीं खरीदता है तो वे पहले से चिन्हित रणनीतिक निवेशकों को बेचे जाएंगे।
खत्म हुई 26 साल पुरानी पार्टनरशिप
इस सौदे के साथ ही अडानी और विलमर के बीच 1999, 2014, 2017 और 2021 में हुए सभी पुराने शेयरहोल्डिंग समझौते भी समाप्त हो जाएंगे। इन समझौतों में बोर्ड में प्रतिनिधित्व और पूंजी संरचना से संबंधित शर्तें शामिल थीं।
AWL के भविष्य की दिशा
अब जब AWL की कमान पूरी तरह विलमर के हाथ में आ गई है, तो कंपनी के रणनीतिक पुनर्गठन की संभावना बढ़ गई है। यह स्टेक कनसॉलिडेशन विलमर को भारत के कृषि और एफएमसीजी सेक्टर में दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने की स्पष्टता और फ्लेक्सिबिलिटी देगा। यह सौदा न सिर्फ एक कारोबारी निर्णय है, बल्कि भारत के एग्री बिजनेस क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत भी है।












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