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'अंकल मेरी मां को माफ कर दो', अब शबनम के बेटे ताज ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर लगाई गुहार

Shabnam And Saleem Shocking Story, बुलंदशहर। फांसी की सजा मुकर्रर होने के बाद शबनम और सलीम ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया है। हालांकि, शबनम और सलीम को किस दिन फांसी दी जाएगी इसकी तारीख अभी मुकर्रर नहीं हुई है। वहीं, अब शबनम के 13 साल के बेटे ताज ने राष्ट्रपति के नाम एक पत्र लिखा है, जिसमें उसने अपनी मां (शबनम) के लिए माफी की गुहार लगाई है। शबनम के बेटे ताज ने अपने पत्र में कहा कि, 'राष्ट्रपति अंकल जी, मेरी मां को माफ कर दो।'

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    राष्ट्रपति से लगाई माफ करने की गुहार

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    दरअसल, शबनम के बेटे ताज को बुलंदशहर सुशीला विहार कॉलोनी में रहने वाले पत्रकार उस्मान सैफी ने गोद लिया था। उस्मान के संरक्षण में शबनम का बेटा ताज पला-बढ़ा है। ताज को भी अब अपने मां (शबनम) के गुनाहों का अहसास है। हालांकि, 13 साल के ताज ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपनी मां को माफ करने की गुहार लगाई है। पत्रकार उस्मान ने ताज द्वारा राष्ट्रपति के नाम पत्र लिखे जाने की जानकारी दी। उस्मान ने बताया कि फांसी की सजा पाने वाली शबनम मौजूदा समय में रामपुर जेल में बंद है। 21 जनवरी को वो ताज को लेकर रामपुर जेल गए थे, जहां उन्होंने उसकी मां शबनम से मुलाकात करवाई थी। शबनम ने ताज को टॉफ़ी भी दी थी।

    जानिए कौन है शबनम, जिसे आजाद भारत के इतिहास में मिलेगी पहली बार फांसी

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    शबनम अली, उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र के बावनखेड़ी गांव की रहने वाली है। शबनम के पिता शौकत अली शिक्षक थे। वो उनकी एकलौती बेटी थी और स्कूल में छोटे बच्चों को पढ़ाती थी। शबनम ने अंग्रेजी और भूगोल में एमए किया था। बच्चों को पढ़ाने के दौरान शबनम को सलीम से प्यार हो गया। लेकिन सलीम पांचवीं फेल था और पेशे से एक मजदूर था। इसलिए दोनों के संबंधों को लेकर परिजन विरोध कर रहे थे। 14-15 अप्रैल 2008 की काली रात को शबनम ने सलीम के साथ मिलकर अपने पूरे परिवार की हत्या कर दी। इस जघन्य हत्याकांड में शबनम के परिवार का कोई जिंदा बचा था तो वो खुद शबनम और उसके पेट में पल रहा दो माह का बेटा ही था। बता दें कि शबनम अली, वो महिला कैदी है जिसे आजाद भारत के इतिहास में पहली बार फांसी पर लटकाया जाएगा।

    राष्ट्रपति के यहां से भी खारिज हुई दया याचिका

    राष्ट्रपति के यहां से भी खारिज हुई दया याचिका

    पिछले साल शबनम ने फांसी पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इस पुनर्विचार याचिका को सलीम और शबनम के वकील आंनद ग्रौवर ने दायर किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की निचली अदालत ने फैसले को बरकरार रखा है। इसके बाद शबनम-सलीम ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी थी, लेकिन राष्ट्रपति भवन से उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। एक बार फिर से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार दायर की है जिसकी सुनवाई इसी महीने होनी है, जिसके बाद फैसला होगा कि दोनों को फांसी दी जाएगी या नहीं।

    हम क्या करेंगे ऐसी लड़की की लाश लेकर?

    हम क्या करेंगे ऐसी लड़की की लाश लेकर?

    शबनम की चाची ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुए कहा, 'उस समय अगर हम भी घर में होते तो उसने हमें भी मार डाला होता, लेकिन हम उस समय घर में नहीं थे।' हम तो आधी रात के बाद घर पहुंचे थे तो घर के बाहर भीड़ जमा थी। आज भी उसदिन के मनजर को याद कर रूह कांप जाती है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि याचिका खारिज हो गई, हम तो बहुत खुश हैं। अच्छा किया सरकार ने इसे फांसी होनी चाहिए। वहीं, चाचा ने मीडिया कर्मियों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि वहीं हम उसके शव को नहीं लेंगे, हम नहीं लेंगे। हम क्या करेंगे ऐसी लड़की की लाश लेकर?

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