सपा की नकल में अब बीजेपी 'चढ़ेगी साइकिल पर', इस तरह से होगी वोटरों को लुभाने की कोशिश
लखनऊ। 2012 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने प्रदेश में मायावती सरकार के खिलाफ ऐतिहासिक साइकिल यात्रा की थी। 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए जनता का समर्थन हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसी के चलते पहले तो कमल संदेश यात्रा के तहत बाइक रैली निकाल कर जनता के बीच पार्टी का प्रचार प्रसार किया और अब पद यात्रा निकालने की तैयारी कर रही है। बाइक रैली के बाद भाजपा के नेता और कार्यकर्ता पद यात्रा करके जनता के बीच जाकर पार्टी और सरकार के कामों का प्रचार प्रसार करेंगे।

साइकिल के साथ व पदयात्रा 1 दिसंबर से 15 दिसंबर तक हर विधानसभा क्षेत्र में निकाले जाने की तैयारी की जा रही है। इस संबध में सोमवार को प्रदेश के पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में ही इसे अंतिम रुप दिया जाएगा। साथ ही कमल संदेश रैली की समीक्षा होगी। आपको बता दें कि शनिवार को पूरे उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने कमल संदेश यात्रा के तहत बाइक रैली निकाली थी। इस बाइक रैली में बढ़ चढ़ कर कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था। इतना ही नहीं खुद सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रैली की कमान संभाली थी। यहां उन्होंने संपूर्णानंद कॉलेज से बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय अपने चंदौली निर्वाचन क्षेत्र में ऐसी ही यात्रा में शिरकत किया था। जबकि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौगराज और उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा लखनऊ में इस दौरान मौजूद थे। 'कमल संदेश यात्रा' के जरिए बीजेपी केन्द्र और राज्य की सरकारों द्वारा किए गए कार्यों को जनता के सामने रखने के लिए किया था। इस यात्रा का मकसद 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए जनता का समर्थन हासिल करना था। कमल संदेश यात्रा के बहाने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को एकजुट और एक जगह एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया था।
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