VIDEO: आपने देखे हैं कभी ऐसे जानवर?, पहाड़ों पर आए नजर, IAS ने बताया- खतरों के खिलाड़ी
देहरादून। आपने कभी ऐसे जानवर देखे हैं? बकरियों जैसे आकार के ये जानवर भारत के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में रहते हैं। बहुत से लोगों के लिए इन्हें देखना तो दूर, इनका नाम तक नहीं सुना होगा। आईएएस ऑफिसर सुप्रिया साहू ने इन जानवरों को लेकर ट्वीट किया, जिस पर सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इस वन्यजीव को जानने की उत्सुकता जाग उठी।
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कहां मिलते हैं ये जीव, क्या कहते हैं इन्हें?
ये जानवर पर्यटकों के बीच हमेशा आकर्षण का केंद्र रहे हैं। कुछ लोग इन्हें जंगली बकरी (Wild Goat) कहकर बुलाते हैं। मगर, ये न तो इंसानी बस्ती में रहते हैं और न ही दुधारू पशु हैं। Oneindia.Com ने इन वन्यजीवों के बारे में उत्तराखंड के कई वरिष्ठ वनअधिकारियों से बात की। उन्होंने इन वन्यजीवों से जुड़ी चौंकाने वाली बातें बताईं।

हिमालयन ताहर, उूंचे क्षेत्रों के 'खिलाड़ी'
वनअधिकारी मनोज चंद्रन (CCF/HRD-Dehradun) और डॉ. पराग मधुकर धाकते (CCF, इको टूरिज्म/CWLW) ने बताया कि, बकरी की तरह दिखने वाले ये ऐसे वन्यजीव हैं, जो पहाड़ों पर झुंड में रहते हैं।

भारत-नेपाल में मिलते हैं
इन्हें 'हिमालयी ताहर' या 'हिमालयन थार' (Hemitragus jemlahicus) कहा जाता है, जिसमें "ताहर" शब्द नेपाली शब्द थार से लिया गया है। हिमालयन थार हिमालय की प्रसिद्ध चोटियों पर मिलते हैं, ये विषम परिस्थितियां झेलते हैं, इसलिए खतरों के खिलाड़ी कह दें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

अवध्य हैं झुंड में मिलने वाले ये वन्यजीव
वन अधिकारी मनोज चंद्रन ने बताया कि, ये जीव झुंड में रहना पसंद करते हैं। झुंड में एक मेल होता है और कई फीमेल। मेल दिखने में ज्यादा सुंदर लगता है। उसके बाल भी ज्यादा होते हैं। असल में "ताहर" एक जंगली बकरी से संबन्धित दुर्लभ एशियाई जीव है। भारत में इनके शिकार पर प्रतिबंध है। तमिलनाडु का ये राज्य-पशु भी हैं।

दुधारू नहीं है यह जानवर
भारत में इन वन्यजीवों की मुख्यत: दो तरह की प्रजातियां मिलती हैं। एक हिमालय ताहर और दूसरे नीलगिरी थार। इनमें नीलगिरी थार दक्षिण भारतीय पर्वतों पर और हिमालयन थार उत्तराखंड और हिमाचल जैसे प्रांतों में मिलेंगे। यानी, इन वन्यजीवों को देखना हो तो उच्च पर्वतीय स्थलों पर जाना पड़ेगा।

तुंगनाथ चोपता और शोख करक में ज्यादा दिखेंगे
वनअधिकारी निशांत वर्मा ने कहा कि, यह ऐसी 'जंगली बकरी' है, जो दूध नहीं देती। यह उच्च हिमालय क्षेत्र में मिलती है। यहां चमोली, उत्तरकाशी, बुग्गयाला में दिखती हैं। जब ज्यादा बर्फबारी होती है तो ये निचले और घने जंगलों का रूख करती हैं। अक्सर बड़े बड़े झुंडों में रहती हैं।

नर और मादा में अंतर
नर को थार जबकि, मादा को थारिन कहा जाता है। जिसमें मादा बच्चों की देखभाल करती हैं, जबकि नर का काम परिवार की सुरक्षा करना होता है। सुबह शाम इन्हें तुंगनाथ और चोपता जाने वाले रूट पर देखा जा सकता है। ज्यादातर फोटोग्राफर नर की तस्वीरें लेते हैं, क्येांकि इसके घने बाल इसे आकर्षक बना देते हैं जैसे मोर और मोरनी में फर्क होता है।

पहाड़ों पर खड़ी चढ़ाई चढ़ सकते हैं
आईएएस सुप्रिया ने कहा, "यहां तस्वीर में आपको असली 'खतरों के खिलाड़ी' दिख रहे हैं..बहुत आश्चर्यजनक है कि पहाड़ों पर ये खड़ी चढ़ाई कर सकते हैं.. इन्हें नीलगिरि तहर कहते हैं। ये पश्चिमी घाट की वो पहाड़ी बकरियां हैं जो अपने अविश्वसनीय 'रॉक क्लाइंबिंग' कौशल के लिए जानी जाती हैं।

तमिलनाडु का राजकीय पशु है यह
तमिलनाडु की लेखिका सोनिया अधाना ने कहा कि, तमिलनाडु में ये जीव नीलगिरि पहाड़ियों और पश्चिमी घाट के दक्षिणी भाग में रहते हैं। IUCN द्वारा इन्हें "लुप्तप्राय" के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वैसे खुशी की बात यह है कि, पिछले तीन वर्षों में नीलगिरी में तहर की आबादी में 27% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह तमिलनाडु का राजकीय पशु है।












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