क्या है 4000 साल पुरानी इस चट्टान का रहस्य? दावा- एलियंस ने लेजर से कर डाले दो टुकड़े
रियाद, 8 अक्टूबर। दुनिया में कई ऐसे रहस्यमयी चीजें हैं जिसे देख वैज्ञानिकों का भी सिर चकरा जाता है। कुछ इसे चमत्कार बताते हैं, तो कई लोग अलग-अलग दावे करते हैं। सऊदी अरब में मौजूद ऐसे ही एक हैरतअंगेज चट्टान को देखकर लोग कई तरह के दावे कर रहे हैं। अल नसला की चट्टान (रॉक ऑफ अल नसला) के नाम से मशहूर इस विशालकाय चट्टान को देखने पर ऐसा लगता है जैसे किसी ने केक की तरह इसे बीच से काट दिया हो।
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अल नसला की चट्टान को देख चकराया सिर
इस चट्टान को देखने के लिए दुनियाभर से लोग सऊदी अरब आते हैं। कई इसे चमत्कार बता रहे हैं, तो कुछ ने तो यहां तक दावा कर दिया कि एलियंस ने अपनी लेजर नकनीक से चट्टान को दो टुकड़ों में बाटा है। सोशल मीडिया पर अल नसला की चट्टान की फोटो तेजी से वायरल हो रही है, कई सालों से वैज्ञानिक इस पत्थर के रहस्य को उजागर करने में लगे हैं।

4 हजार साल पुरानी है चट्टान
करीब 4 हजार साल पुरानी ये विशालकाय चट्टान कुछ इस तरह दो हिस्सों में बंटी है, जैसे किसी ने इसे बीच से काट दिया हो। इसे देखकर यकीन करना मुश्किल होता है कि दुनिया में ऐसी भी कोई चीज हो सकती है। इंसानों ने अभी तक ऐसी कोई तकनीक विकसित नहीं की जो इतने बड़े चट्टान को सफाई से काट सके। सोशल मीडिया पर अब इस रहस्यमयी चट्टान को देख इसे एलियंस से जोड़ा जाने लगा है।

एलियंस ने लेजर से कर डाले दो टुकड़े
कई लोगों ने दावा किया है कि इसे एलियंस द्वारा काटा गया है, इसके लिए उन्होंने लेजर तकनीक की मदद ली होगी। चट्टान एक-दूसरे से इतनी सफाई से अलग हैं कि प्राकृतिक रूप से ऐसा होना नामुमकिन सा लगता है। हालांकि आज तक इसका खुलासा नहीं हो पाया कि चट्टान का ये हाल कैसे हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चट्टान की फोटो पर लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

विशेषज्ञों की क्या है राय?
सोशल मीडिया साइट रेडिट पर एक यूजर ने लिखा, जरूर एलियंस धरती पर आए थे और उन्होंने चट्टान को इतनी सफाई से काट दिया। बता दें कि रेडिट पर लोग ऐसी है अजीबोगरीब तस्वीरें शेयर की जाती हैं। वहीं, अल नसला की चट्टान को लेकर विशेषज्ञों की राय कुछ और ही है। एक्सपर्ट्स का मामना है कि चट्टान का यू दो टुकड़ों में बंटना freeze-thaw weathering का तनीजा हो सकता है।

क्या है freeze-thaw weathering ?
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के रिसर्चर चेरी लेविस के मुताबिक इस प्रक्रिया में चट्टान के बीच पानी की बूंदें चली जाती हैं। वही पानी तापमान में गिरावट के कारण जम जाती हैं। इससे चट्टान के बीच फैलाव होता है। freeze-thaw weathering प्रक्रिया एक दिन में पूरी नहीं होती, इसे हजारों सालों का समय लग सकता है। अल नसला की चट्टान के अलग होने की भी यही वजह हो सकती है।
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