प्यार में ना हो दखल, बिना शादी साथ रहें कपल! पक्का हुआ लिव-इन, किन शर्तों पर बनी सहमति?
Live in Relationship Agreement: बिना शादी किए साथ पति पत्नी के साथ रह रहे जोड़ों को पति- पत्नी के रूप में भले ही ना देखा जाता हो, लेकिन आजकल इसे बड़ी अहमियत दी जा रही है। हालांकि भारत में लिव इन के रूप में रहने के लिए सख्त नियम हैं। देश के जिन राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू हो रही है, वहां लिव इन में रहने वाले जोड़ों को पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है। दरअसल, यूसीसी लागू होने के बाद लिव-इन में रहे कपल अगर नियमों की अनदेखी करते हैं तो उन्हें सजा और जुर्मना देना पड़ सकता है। ऐसे में राजस्थान (Rajastha) में एक कपल ने कानूनी पेंच में फंसने से बचने के पूरी तैयारी कर ली। इस जोड़े ने लिव इन (Live in Relationship) के लिए इकरारनामा तैयार करवाया है।
एक कपल का लिव इन एग्रीमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। तस्वीर एक नोटरी की कॉपी है। जिसमें जोधपुर नोटरी की मुहार लगी हुई थी. इस इकरारनामे में बीस साल की कमला, जो बाड़मेर की रहने वाली है ने बाड़मेर के ही रहने वाले पेमा राम के साथ लिव इन में रहने को लेकर रजिस्ट्रेशन करवाया। इस दस्तावेज में दोनों का आधार नंबर भी मेंशन किया गया था। एग्रीमेंट पर दोनों के सिग्नेचर हैं।ॉ

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो
बाड़मेर के कपल के सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एग्रीमेंट के वीडियो में इकरारनामें को स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सकता है। जिसमें लिखा है कि कमला पुत्री दीपाराम निवासी खरतिया, खारंटिया खुर्द, सिणधारी, जिला बाड़मेर ने पेमा राम पुत्र राजू राम के साथ लिव इन में रहने की सहमति दी है।
लिव- इन एग्रीमेंट कपल के लिए जरूरी
ये लिव- इन एग्रीमेंट अजीब जरूर लग रहा है, लेकिन कपल ने अपने प्यार को भविष्य में किसी वाह्य हस्तक्षेप से बचाने के लिए किया है। यही नहीं रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स भी लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के ऐसी सलाह देते हैं। क्योंकि पत्नी की तुलना में लिव इन पार्टनर को ज्यादा कानूनी हक नहीं मिलते। हालांकि लंबे समय तक लिव इन में रहने वाले जोड़े जब अलग होते हैं, तो महिला गुजारा भत्ता मांग सकती है। लेकिन ये सिर्फ तब तक संभव होता है, जब तक उसका पार्टनर जिंदा है। लिव इन पार्टरन को प्रॉपर्टी में भी हिस्सा नहीं मिलता। ऐसे में रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स रिश्तों के दौरान कैसी शर्तें चाहते हैं, उन्हें मेंशन करते हुए एग्रीमेंट करने की सलाह देते हैं।
यूसीसी लागू होने पर सख्त होंगे नियम
समान नागरिक संहिता लागू होते ही कई बड़े बदलाव होंगे। जिन राज्यों में यूसीसी लागू होने जा रही है, वहां इसकी तैयारी भी चल रही है। उत्तराखंड में सरकार ने विवाह और लिव इन का पंजीकरण पर जोर दिया है। यूसीसी के प्रावधानों को मुताबिक, लिव इन में रहने वाले कपल अगर पंजीकरण नहीं करवाते तो उन्हें छह माह का कारावास या 25 हजार रुपये दंड अथवा दोनों का प्रविधान होगा। इस बीच राजस्थान में एक कपल कानूनी पेंच में फंसने से बचने के पूरी तैयारी कर ली। 20 साल की एक युवती और 25 साल के युवक ने लिव इन के लिए इकरारनामा तैयार करवाया है।
चार दशक पहले अदालत ने लिव को माना वैध
सुप्रीम कोर्ट ने आज से चार दशक पहले लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता दी थी। लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चार दशक पहले 1978 में बद्री प्रसाद बनाम डायरेक्टर ऑफ कंसोलिडेशन (Badri Prasad vs Director Of Consolidation) के केस में सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता दी थी। कोर्ट ने यह माना कि शादी करने की उम्र वाले लोगों के बीच लिव-इन रिलेशनशिप किसी भारतीय कानून का उल्लंघन नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अगर कोई कपल लंबे समय से साथ रह रहा है, तो उस रिश्ते को शादी ही माना जाएगा। इस तरह कोर्ट ने 50 साल के लिव-इन रिलेशनशिप को वैध ठहराया था।
क्या है लिव- इन रिलेशनशिप?
लिव इन रिलेशनशिप एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत जोड़े बिना शादी किए साथ रहते हैं। लिव इन के दौरान कपल के बीच मानसिक, भावनात्मक, और शारीरिक संबंध होते हैं। इस व्यवस्था के तहत जोड़े, पति-पत्नी की तरह एक ही घर में रहते हैं। बाद में ये रिश्ता स्थायी भी हो हो सकता है। यानी कि जोड़े शादी भी कर सकते हैं।












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