मुस्लिम परिवार में पले-बढ़े शख्स को दफनाने के बजाय जलाया क्यों गया? आंखें खोल देगी ये स्टोरी

केरल में एक ऐसा मामला देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान करके रख दिया। दरअसल, यहां एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में एक हिंदू शख्स रहा। वो यहां पला बढ़ा। लेकिन जब उसकी मौत हो गई तो मुस्लिम परिवार ने कुछ ऐसा किया, जिसकी अब हर कहीं चर्चा हो रही है।

मामला है केरल के मलप्पुरम जिले का, जहां 62 साल की उम्र में विथानसेरी राजन ने दुनिया को अलविदा कह दिया। विथानसेरी एक मुस्लिम परिवार के साथ पले बढ़े थे और इसका कारण परिवार द्वारा उन्हें गोद लेना था। लेकिन जब उनकी मौत हुई तो मुस्लिम परिवार ने राजन को ऐसी अंतिम विदाई दी, जो चर्चा का विषय बन गई।

Photo Credit: IndianExpress

दरअसल, राजन की मौत के बाद परिवार ने अपने मुस्लिम रीति रिवाजों को किनारे करते हुए उन्हें पूरे हिंदू रीति रिवाजों के साथ पाला पोसा। राजन को अंतिम विदाई देने के लिए उन्होंने आस्था को भी किनारे रख दिया।

दरअसल, पलक्कड़ के मूल निवासी राजन ने बहुत छोटी सी उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया था। लगभग चार दशक पहले जब मलप्पुरम के एक सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय कांग्रेस नेता के वी मुहम्मद पुथनाथनी में सड़क किनारे एक ढाबे पर रुके तो उन्होंने वहां एक बच्चे को देखा, जो भूख से तड़प रहा था।

मुहम्मद ने उसे अपने गांव वापस जाने के लिए भोजन और पैसे की पेशकश की। लेकिन जब राजन सड़क पर भटकने लगा तो मुहम्मद पीछे गए और फिर उस बच्चे को नन्नामुक्कू में अपने घर ले आए।

राजन ने मुहम्मद के कन्नमचथु वलप्पिल घर में नई जिंदगी शुरू की। मुहम्मद की छह बेटियां और एक बेटा था। प्लानिंग तो राजन को कुछ दिनों के बाद घर वापस भेजने की थी लेकिन उसके पास रहने को कोई जगह नहीं थी और ना ही देखभाल के लिए कोई रिश्तेदार। ऐसे में मुहम्मद ने उसे वहीं पर रहने दिया और फिर राजन धीरे धीरे उनके परिवार का ही सदस्य बन गया।

आठ साल बाद मुहम्मद की 65 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई। उनके बेटे अलीमोन ने कहा कि जब मेरे पिता की मृत्यु हो गई, तो लोगों ने मुझसे राजन को किसी की शरण में सौंपने के लिए कहा। लेकिन मैं उसे छोड़ने को तैयार नहीं था। अलीमोन ने कहा कि मैंने पाया कि उस व्यक्ति की देखभाल करने में पुण्य है जिसे मेरे पिता घर लाए थे।

इस धार्मिक सद्भाव की कहानी यहीं पर खत्म नहीं होती। राजन के शरीर को एक सार्वजनिक श्मशान में आग के हवाले करने के बाद, एलिमोन अब अपने प्यारे 'भाई' की राख इकट्ठा करने का इंतजार कर रहा है, जिसे वह पावन नदी में विसर्जित करेगा।

एलिमोन (46) ने कहा कि मैंने राजन का उसके विश्वास के अनुसार अंतिम संस्कार करने के लिए एक पल के लिए अपनी आस्था को किनारे रख दिया।

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