2014 में पृथ्वी से टकराने वाला उल्कापिंड था 'एलियन', वायुमंडल में आते ही उसका हुआ था बुरा हाल

नई दिल्ली, 13 अप्रैल: वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के अलावा भी किसी दूसरे ग्रह पर जीवन हो सकता है, लेकिन अभी तक इसके पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। इसके बावजूद आए दिन पृथ्वी पर एलियंस या फिर उनके यान यूएफओ को देखे जाने की बात कही जाती है। अब एलियंस को लेकर यूएस स्पेस कमांड ने एक बड़ा खुलासा किया है।

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    पहला इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट

    पहला इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएस स्पेस कमांड (यूएसएससी) ने हाल ही में पुष्टि की है कि एक उल्का जो जनवरी 2014 में पृथ्वी से टकराया था, वो एक एलियंस था, जो किसी दूसरे सौर मंडल से आया था। इसे पहला इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट भी कहा जा रहा है।

    हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने किया शोध

    हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने किया शोध

    हाल ही में हार्वर्ड के खगोलविदों अमीर सिराज और अब्राहम लोएब ने ट्विटर पर लिखा कि 2014 में दूसरे स्टार सिस्टम से एक अंतरिक्ष चट्टान ने पृथ्वी पर हमला किया था। उस दौरान अमेरिकी अंतरिक्ष विभाग को उसकी गति और प्रक्षेप पथ देखकर पता लग गया था कि वो एक्स्ट्रासोलर है। एक्स्ट्रासोलर का मतलब है कि वो दूसरे सौरमंडल से आया था। इसके अलावा उसकी माप सिर्फ 1.5 फीट थी।

    काफी वक्त तक छिपाया

    काफी वक्त तक छिपाया

    वहीं जिन लोगों ने इस उल्कापिंड की स्टडी की थी, वो कभी पीयर रिव्यू नहीं हुए। इसके अलावा ये शोध किसी जर्नल में भी प्रकाशित नहीं हुआ। हालांकि अब यूएस स्पेस कमांड ने वैज्ञानिकों के नतीजे को सही माना है। इसके लिए एक मेमो भी निकाला गया, जिसे ट्वीट कर 6 अप्रैल 2022 को सार्वजनिक किया गया।

    पहला एलियन मेहमान

    पहला एलियन मेहमान

    ट्वीट में कमांड सेंटर के डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जॉन ई शॉ ने कहा कि साल 2019 में की गई फायरबॉल का विश्लेषण सटीक था। ये इस बात की पुष्टि करता है कि यह दूसरे तारों के समूह से आया उल्कापिंड था। आम भाषा में कहें तो ये हमारे सौर मंडल में दूसरे किसी तारों के समूह से आने वाला पहला एलियन मेहमान था। जो धरती के वायुमंडल में आकर धमाके के साथ खत्म हो गया।

    जले हुए टुकड़े जमीन पर गिरे

    जले हुए टुकड़े जमीन पर गिरे

    वहीं अमीर सिराज का दावा है कि जब 2014 में उल्कापिंड में विस्फोट हुआ, तो ये दक्षिणी प्रशांत महासागर के ऊपर था, लेकिन इसके कुछ टुकड़े जमीन पर भी गिरे। बाद में वैज्ञानिकों की टीम ने जले हुए टुकड़ों को खोज निकाला। इसके लिए कई तरह के एक्सपर्ट लगे थे। फिर शोध के दौरान सारे राज खुलते चले गए।

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