मंगल ग्रह से इंसानों ने ही भेजा था 'एलियंस सिग्नल', आखिर क्यों करना पड़ा ऐसा?
यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने मंगल ग्रह से पृथ्वी पर एलियंस सिग्नल भेजा था। उसके बारे में अब उन्होंने विस्तार से बताया है।

मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना को लेकर रिसर्च जारी है। इस बीच वहां से एक सिग्नल मिला, जिसको वैज्ञानिकों ने डिकोड किया। वैसे ये सिग्नल एलियंस ने नहीं इंसानों ने ही भेजा था। इसकी वजह काफी खास है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर ने ये सिग्नल मंगल से पृथ्वी पर भेजा था। जिसे पहुंचने में 16 मिनट लगे। सिग्नल ने कुल 4 करोड़ किलोमीटर (न्यूनतम) की दूरी तय की। इस सिग्नल को एलियंस के सिग्नल के जैसा ही बनाया गया था।
दरअसल वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि अगर किसी दूसरे ग्रह के जीव ने सिग्नल भेजा, तो वो कैसा होगा? उसको कैसे डिकोड किया जाएगा? इन सब के रियल टाइम अनुभव के लिए टीजीओ ने बुधवार को रात 9:00 बजे मंगल के चारों ओर अपनी कक्षा से एक एन्कोडेड संदेश भेजा।
इस सिग्नल को अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया स्थित ग्रीनबैंक टेलीस्कोप ने रिसीव किया है। इसके अलावा कैलिफोर्निया के एलन टेलीस्कोप ऐरे, न्यू मैक्सिको के वैरी लार्ज ऐरे और इटली के मेडिसिना रेडियो एस्ट्रोनॉमिकल स्टेशन ने भी इस सिग्नल को पकड़ा। इसे अंतरिक्ष विज्ञान की दिशा में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
कई देशों के वैज्ञानिक प्रोजेक्ट में
मामले में सर्च फॉर एक्सट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस (सेटी) के एक वैज्ञानिक ने कहा कि वो एलियंस मैसेज को डिकोड करने के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई वैज्ञानिक लगे हैं। अब उनसे मैसेज को डिकोड कर भेजने को कहा गया है, ताकि इसके बारे में विस्तार से पता चल सके।
बाहरी दुनिया को समझने की कोशिश
मामले में ATA प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डॉ. वाएल फराह ने कहा कि ये बाहरी दुनिया को जानने की एक कोशिश है। अगर भविष्य में किसी दूसरे ग्रह के लोग हमसे संपर्क करते हैं, तो कैसे उस स्थित से निपटा जाएगा, इसकी तैयारी की जा रही है।












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