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'चंद्रमा के निजीकरण से दूर हो जाएगी पृथ्वी की गरीबी', जानें क्यों अर्थशास्त्रियों ने दिया ये प्लान

नई दिल्ली, 12 फरवरी: कोरोना महामारी की वजह से सभी देशों की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है। इससे कुछ देशों में गरीबी भी तेजी से बढ़ रही। अब पृथ्वी की गरीबी को दूर करने के लिए कुछ अर्थशास्त्रियों ने एक अजीब सलाह दी है। जिसके तहत उन्होंने चंद्रमा के निजीकरण की बात कही। इसके लिए उन्होंने पूरा प्लान भी शेयर किया है।

सभी देशों में बंटे चंद्रमा

सभी देशों में बंटे चंद्रमा

दरअसल एडम स्मिथ संस्थान का मानना ​​है कि 239,000 मील दूर चंद्रमा की भूमि के टुकड़ों में विभाजित किया जाना चाहिए, जिनमें से प्रत्येक को एक अलग देश को सौंपा जाए। इसके बाद सभी देश टाइकून और व्यवसायों को छोटे भूखंड किराए पर देने में सक्षम होंगे।

अंतरिक्ष होगा साफ?

अंतरिक्ष होगा साफ?

वित्तीय थिंकटैंक के मुताबिक बाहरी अंतरिक्ष संपत्ति अधिकारों से नकद वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और दुनियाभर में गरीबी कम होगी। उनका मानना है कि इस कदम से अंतरिक्ष को भी साफ करने में मदद मिलेगी, क्योंकि 3000 से ज्यादा डेड सैटेलाइट और अन्य उपकरण वहां कबाड़ की तरह बिखरे पड़े हैं।

निष्पक्ष प्रणाली की जरूरत

निष्पक्ष प्रणाली की जरूरत

संस्थान के मुताबिक आर्थिक शोधकर्ता रेबेका लोव ने इस विषय पर पूरी रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष की संपत्ति के अधिकार को सौंपने और उसे नियंत्रित करने के लिए एक निष्पक्ष प्रणाली बनाई जाए। इस तरह की प्रणाली अंतरिक्ष के लिए एक बेहतरीन मैनेजमेंट के साथ नई खोजों को भी प्रोत्साहित करेगी।

नई संधि पर सहमत हों सभी देश

नई संधि पर सहमत हों सभी देश

वैसे 1967 में संयुक्त राष्ट्र ने अंतरिक्ष संधि तैयार की थी, जो सभी देशों और आम लोगों को अंतरिक्ष में संपत्ति रखने से प्रतिबंधित करता है। रेबेका लोव के मुताबिक उनका संस्थान सोचता है कि चंद्रमा के लिए अब सभी देशों को नई संधि पर सहमत होना चाहिए। मामले में संस्थान के प्रवक्ता ने कहा कि ये कदम वैज्ञानिक खोज को तेज कर सकता है और पूरी मानवता को अंतरिक्ष के खोजी अभियानों में अधिक हिस्सेदारी दे सकता है।

कई देशों ने तेज किया अभियान

कई देशों ने तेज किया अभियान

प्रवक्ता ने आगे कहा कि चंद्रमा की भूमि से मिला किराया पृथ्वी पर गरीबी मिटाने के काम आएगा। इसके अलावा चंद्रमा पर 'पहले आओ-पहले पाओ' की नीति की समस्या भी खत्म होगी। वैसे- चीन, अमेरिका, रूस, भारत समेत सभी देशों ने पिछले एक दशक में चंद्रमा पर अपने अभियानों को तेज कर दिया है।

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