बत्तख के सिर के आर-पार हुआ तीर, डॉक्टरों को तीर निकालने के लिए तीन महीने तक करना पड़ा इंतजार
नई दिल्ली। 'जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई' यह कहावत आपने कभी ना कभी कहीं ना कहीं जरूर पढ़ी या सुनी होगी। चेक रिपब्लिक के पिलसेन शहर में रेस्क्यू किए गए एक बत्तख के ऊपर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। दरअसल, कुछ लोगों को पिलसेन शहर की रेडबुजा (Radbuza) नदी में एक बत्तख तैरता मिला जिसके सिर के आर-पार एक तीर घुसा हुआ था। बत्तख को देखकर लोगों को पहले तो यकीन नहीं हुआ लेकिन जब उसे पकड़कर रेस्क्यू किया गया तो हर कोई हैरान रह गया।

तीन महीने तक तीर के साथ घूमता रहा बत्तख
नदी में मिले बत्तख को पशु बचाव केंद्र द्वारा तीन महीने पहले देखा गया था जो अब आश्चर्यजनक रूप से उपचार के बिना बिल्कुल ठीक हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक बत्तख को तीन महीने तक उसी तीर के साथ जीना पड़ा लेकिन आखिरकार अब वह आजाद है। पशु बचाव केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि उस बत्तख पर मछली पकड़ने के लिए उपयोग में लाने वाले क्रॉसबो (एक तरह का धनुष) से वार किया गया था।

एनीमल रेस्क्यू सेंटर ने बचाई बत्तख की जान
शहर के एनीमल रेस्क्यू सेंटर के हेड करेल मेकॉन ने बताया कि बत्तख को अप्रैल में पकड़ने की कोशिश की गई थी लेकिन उस दौरान वह बाग निकला, इसके बाद हमने उसे ट्रैक किया और कई बार पकड़ने की कोशिश की लेकिन हर बार वह उड़ जाता था। उसे इसी हफ्ते पकड़ने में कामयाबी मिली है। करेल मेकॉन ने बताया कि बत्तक के सिर और गर्दन से तीर आर-पार निकल गया था लेकिन फिर भी वह खुशकिस्मती से जिंदा था।

इस तरह पकड़ में आया बत्तख
करेल मेकॉन ने बताया कि तीर की नोक काफी नुकीली थी जो एक फिशिंग लाइन से जुड़ी थी। उसका पीछा करने पर हमें पता चला कि बत्तख के पंख झड़ रहे हैं और नए पंख आने तक वह उड़ नहीं सकता। इस बात का फायदा उठाते हुए हमारी टीम ने उसे सोमवार को पकड़ लिया। मेकॉन ने कहा, इस बार मैं लंबे पॉल पर लैंडिंग नेट को लेकर नदी के किनारे पर खड़ा था और मेरे दो साधी नाव में बैठकर उसका ध्यान भटका रहे थे।

बत्तख को मिली नई जिंदगी
करेल मेकॉन के अनुसार बत्तख को पकड़ने के बाद उसके इलाज के लिए उसे स्थानीय पशु चिकित्सालय ले जाया गया। उसकी हालत को देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए थे, इलाज के दौरान उसका एक्स-रे किया गया जिसमें पता चला की तीर सिर की हड्डी के बीच से घुसा था। बड़ी सावधानी के साथ तीर को निकाला गया। इसके बाद जब बत्तख पूरी तरह ठीक हो गया तो उसे वापस नदी के किनारे छोड़ दिया गया। करेल मेकॉन ने कहा कि हो सकता है बत्तख की ऐसी हालत शिकारियों ने की होगी।
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