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कोरोनाः क्या देश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर गांव के मरीजों का इलाज कर पाएगा?

By विजुअल जर्नलिज़्म टीम, नई दिल्ली

कोरोना वायरस
Getty Images
कोरोना वायरस

देश के कई हिस्सों को पूरी तरह से लॉकडाउन में डाल दिया गया है. साथ ही देश में कोरोना वायरस के मामले 400 का आंकड़ा पार कर चुके हैं.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, 23 मार्च को सुबह 10.30 बजे तक देश में कोरोना वायरस के 415 मामलों की पुष्टि हो चुकी थी.

सबसे बुरी तरह से प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र (67 मामले), केरल (67 मामले) और दिल्ली (29 मामले) हैं.

कोरोना वायरस के बढ़ते मामले
BBC
कोरोना वायरस के बढ़ते मामले

3 मार्च 2020 तक भारत में कोरोना के केवल 5 मामले थे. अगले दिन यह आंकड़ा बढ़कर 27 पर पहुंच गया. अगले कुछ दिनों में इनमें तेज रफ्तार से बढ़ोतरी हुई.

अगर ये मामले लगातार बढ़े और देश के ग्रामीण इलाकों तक यह वायरस पहुंच गया तो राज्यों के लिए इस पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा.

पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर

नेशनल हेल्थ प्रोफ़ाइल 2019 के आंकड़ों के हिसाब से देखें तो अगर कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी जारी रही तो भारत के ग्रामीण इलाकों में आने वाले मरीजों के लिहाज से पर्याप्त बेड नहीं होंगे.

इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में करीब 26,000 सरकारी हॉस्पिटल हैं. इनमें से 21,000 रूरल इलाकों में और 5,000 हॉस्पिटल शहरी इलाकों में हैं. हालांकि, मरीज और उपलब्ध बेडों की संख्या का रेशियो बेहद चिंताजनक है.

हर 1,700 मरीजों पर एक बेड मौजूद है. ग्रामीण इलाकों में हर बेड पर मरीजों की संख्या काफ़ी बढ़ जाती है. इन इलाकों में हर एक बेड पर 3,100 मरीज आते हैं.

कोरोना वायरस के बढ़ते मामले
BBC
कोरोना वायरस के बढ़ते मामले

अगर हर राज्य की आबादी के हिसाब से बेडों की संख्या की तुलना करें तो बिहार की हालत सबसे ख़राब नज़र आती है.

2011 की जनगणना के मुताबिक, बिहार के ग्रामीण इलाकों में करीब 10 करोड़ लोग रहते हैं. हर बेड पर करीब 16,000 मरीज हैं. इस तरह से बिहार हर 1,000 लोगों पर सबसे कम बेड वाला राज्य है.

तमिलनाडु इस मामले में सबसे अच्छी स्थिति में है. राज्य के ग्रामीण इलाकों में कुल 40,179 बेड हैं और कुल 690 सरकारी हॉस्पिटल हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में हर बेड पर क़रीब 800 मरीज़ हैं.

कोरोना वायरस के बढ़ते मामले
BBC
कोरोना वायरस के बढ़ते मामले

डॉक्टर

रूरल हेल्थ स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, रूरल इंडिया में हर 26,000 लोगों पर एक एलोपैथिक डॉक्टर उपलब्ध है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के नियम के मुताबिक, डॉक्टर और मरीजों का यह अनुपात हर 1,000 मरीज पर 1 डॉक्टर का होना चाहिए.

राज्यों की मेडिकल काउंसिलों और मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (एमसीआई) के यहां रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टरों की संख्या करीब 1.1 करोड़ है.

यह आंकड़ा साफ़ बताता है कि भारत के ग्रामीण इलाके न तो हर मरीज को बेड मुहैया करा सकते हैं न ही इनमें पर्याप्त संख्या में डॉक्टर हैं जो कि हर मरीज को अटेंड कर सकें.

कोरोना वायरस के बढ़ते मामले
BBC
कोरोना वायरस के बढ़ते मामले

टेस्ट सेंटर

इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, देश में आईसीएमआर की मंजूरी वाली कुल 116 सरकारी लैबोरेटरीज हैं.

कोविड-19 टेस्टिंग के लिए 89 ऑपरेशनल लैब्स हैं, जबकि 27 लैब चालू होने की प्रक्रिया में हैं.

अब महाराष्ट्र के आंकड़ों पर गौर करते हैं जहां कोरोना वायरस के सबसे ज़यादा मामले पाए गए हैं.

महाराष्ट्र में 8 सरकारी एप्रूव्ड टेस्टिंग लैब्स में से 4 मुंबई में, 3 पुणे में और 1 नागपुर में है. आईसीएमआर ने महाराष्ट्र में 4 निजी लैब्स को भी एप्रूवल दिया है. ये चारों मुंबई में हैं.

महाराष्ट्र के सबसे सुदूर पूर्वी ज़िले गढ़चिरौली के लिए सबसे नजदीकी लैब नागपुर में है, जो कि सड़क के रास्ते क़रीब 170 किमी दूर है. कोल्हापुर के सबसे दक्षिणी ज़िले के लिए नजदीकी टेस्ट सेंटर पुणे है जो कि सड़क के ज़रिए जाने पर 230 किमी दूर बैठता है.

सीमित संख्या में टेस्ट सेंटरों के होने से ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए अपना टेस्ट कराना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

कोरोना वायरस के बढ़ते मामले
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बिहार में टेस्टिंग सेंटर

बिहार जैसे ज़्यादा गरीब राज्य में केवल 5 टेस्ट लैबोरेटरीज ही हैं जहां कोविड-19 का टेस्ट हो सकता है. इन टेस्ट सेंटरों में से 3 पटना में हैं, जबकि 2 दरभंगा में हैं.

आईसीएमआर के मुताबिक, पटना में दो लैब्स रियजेंट्स और पीसीआर मशीनों के आने का इंतजार कर रही हैं.

अगर सुदूर पूर्वी ज़ुले किशनगंज की बात करें तो वहां के किसी मरीज को कोविड-19 का टेस्ट कराने के लिए सबसे नजदीकी केंद्र दरभंगा जाना पड़ेगा. किशनगंज से दरभंगा की दूरी 250 किमी है.

अगर उत्तरी ज़ुले पश्चिमी चंपारण की बात करें तो टेस्ट कराने के लिए किसी भी शख़्स को 230 किमी दूर दरभंगा आना पड़ेगा.

हालांकि, ये दोनों टेस्ट सेंटर राज्य के केंद्र में हैं, फिर भी ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए इन लैब्स तक पहुंचना मुश्किल भरा है. दूसरी ओर, सरकार के लिए भी यह जानना बेहद मुश्किल होगा कि राज्य में कोरोना वायरस के कितने मामले हैं.

BBC Hindi
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English summary
Coronavirus: Will the country's health infrastructure be able to treat the patients of the village?
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