पृथ्वी पर ही है दूसरी 'छिपी हुई दुनिया', रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों के हाथ लगे अहम सबूत
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर: पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई, इस सवाल का जवाब अभी वैज्ञानिक नहीं खोज पाए हैं। साथ ही धरती के अंदर क्या-क्या है, ये रहस्य भी बरकरार है। हालांकि अब वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने पृथ्वी के कोर में एक छिपी हुई दुनिया की खोज कर ली है। जिस पर ज्यादा अध्ययन की जरूरत है।

मामला निकला सोच से ज्यादा जटिल
दरअसल पृथ्वी के केंद्र को लंबे समय से लोहे का एक ठोस गोला माना जाता है, जो एक अति-गर्म पिघले हुए बाहरी कोर से घिरा हुआ है। इसको लेकर अमेरिका और जापान के भूकंपविद रिसर्च कर रहे थे। इस दौरान पता चला कि ये मामला बहुत ज्यादा जटिल है। जिसमें कठोर धातु, तरल धातु की कई परतें और एक निश्चित मात्रा में सामग्री है, जो दोनों के बीच आधी है।

गहराई तक जाना संभव नहीं
रिसर्च में ये भी पता चला कि कोई भी इंसान या मशीन अभी उस गहराई तक जाने में सक्षम नहीं है, जहां पर दूसरी दुनिया होने के सबूत मिले हैं। हालांकि हवाई विश्वविद्यालय के रेट बटलर और उनके सहयोगी सेजी त्सुबोइब, जो जापान के सेंटर फॉर अर्थ इंफॉर्मेशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी में काम करते हैं, उन्होंने इस बात का अध्ययन कर लिया है कि भूकंप के बाद उठी तरंगे कैसे केंद्र से दूसरे हिस्से में जाती हैं।

मंगल ग्रह से बनाता है अलग
रेट बटलर के मुताबिक तंरगों का वितरण एक प्रकार से सोनार के रूप में संचालित होता है, इससे पृथ्वी की आंतरिक संरचना का पता चलता है। अभी तक ये पता चला है कि ऊपर से 150 मील में कठोर, नरम और तरह धातुओं की परतें हैं। इसके अलावा पृथ्वी का कोर चुंबकीय क्षेत्र है, जो हमारे ग्रह को मंगल की तरह विकिरणित रेगिस्तान बनने से रोकता है।

क्या है डायनासोर की दुनिया?
वहीं ब्रिस्टल विश्वविद्यालय से भूकंपविज्ञानी जेसिका इरविंग ने लाइव साइंस को बताया कि वो पूरी तरह से एक छिपी हुई दुनिया को ढूंढ रहे हैं, जो पृथ्वी के मूल में है। ये 1871 में जूल्स वर्ने द्वारा वर्णित डायनासोर से भरी छिपी दुनिया नहीं हो सकती। ये ऐसी छिपी हुई दुनिया होगी, जो आने वाले दिनों में हमारे वैज्ञानिकों को एक आकर्षक सामग्री प्रदान करेगी।












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