Bihar News: सरकारी स्कूलों में 'मिड डे मील' की गुणत्ता पर क्यों उठते हैं सवाल, सामने आई चौंकाने वाली वजह
Ground Report On Govt Schools: सरकारी स्कूलों में 'मिड डे मील' की गुणवत्ता को लेकर अक्सर सुर्खियां बनती रही हैं। बच्चों के भोजन के लिए सरकार जब पर्याप्त अनाज दे रही है, तो फिर भोजन की गुणवत्ता पर सवाल कैसे उठ रहे हैं। 'मिड डे मील' गुणवत्ता मामले की ज़मीनी हक़ीक़त जानने वन इंडिया हिंदी की टीम ग्राउंड पर पहुंची।
बेगूसराय जिला के नूरपुर गांव स्थित उत्क्रमित उर्दू मध्य विद्यालय में पहुंचने के बाद वन इंडिया हिंदी की टीम ने मिड डे मील बनाने वाली कर्मियों से बात की। उन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी और बताई की समस्या कहां आ रही है। बच्चों के लिए खाना बनाने वाली महिला ने कहा कि हम लोग खुले में खाना बनाते हैं।

गर्मी बरसात सभी मौसमों में बच्चों के लिए खुले में ही खाना बनता है। छत वाला कोई कमरा नहीं है, जहां खाना बनाया जा सके। खुले में खाना बनाने की वजह से धूल मिट्टी वगैरह भी खाने में पड़ जाने का डर बना रहता है। उड़ती हुई चिड़िया की पॉटी भी गिर सकती है। सरकार दे तो सबकुछ रही है, लेकिन खाना बनाने के लिए एक सही कमरा भी तो होना चाहिए।
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अनाज का जहां भंडार किया जाता है, वहां चूहे बोरे को काट देते हैं। ज़मीन में छेद करते हैं, मिट्टी निकलती रहती है। रोज़ चूहों के मचाये उत्पात को साफ करना पड़ता है। अगर कमरा सही होता तो वहां चूहे उत्पात नहीं मचा पाते। खाना तो सही ढंग से ही बनाया जाता है, लेकिन इन्ही सब कमियों की वजह से गुणवत्ता में सवाल उठते रहते हैं।
खाना बनाने वाली महिलाओं ने अपनी समस्या पर कहा कि, बच्चों के लिए खाना बनाकर हम उनके पेट भरते हैं। हमारे बच्चों का पेट कौन भरेगा साहब। हम लोगों को 1600 रुपये प्रति माह दिया जाता है। बताइए इतने कम रुपये में गुजारा कैसे होगा। मानदेय बढ़ाने को बोलते-बोलते थक गए, लेकिन हम लोगों की कोई नहीं सुनता है।












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