कौन हैं एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आनंद मिश्रा? जो बक्सर सीट से बने BJP विधायक, चौंकाने वाली है पूर्व IPS की कहानी
Who is Encounter Specialist Anand Mishra: भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के पूर्व अधिकारी आनंद मिश्रा ने बक्सर विधानसभा सीट पर BJP को ऐतिहासिक जीत दिलाकर बिहार की राजनीति में दमदार एंट्री की है। अपनी तेज-तर्रार पुलिसिंग, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की छवि और युवाओं में जबरदस्त फैन फॉलोइंग के लिए मशहूर रहे मिश्रा ने कांग्रेस के उम्मीदवार संजय कुमार तिवारी को 28,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से हराया है।
यह जीत इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि बक्सर का किला दशकों से कांग्रेस का गढ़ रहा है, जिसे भेदना भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि है।

'सुपर कॉप' का कड़क करियर
1 जून 1981 को बिहार के भोजपुर जिले में जन्मे आनंद मिश्रा का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। मूल रूप से भोजपुर के शाहपुर प्रखंड के पड़सौरा गांव के निवासी मिश्रा ने कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन की। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज 22 साल की उम्र में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा क्रैक कर ली और 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी बने।
- पूर्वोत्तर में धाक: उन्हें असम-मेघालय कैडर आवंटित हुआ, जहां उनकी गिनती तुरंत ही 'सुपर कॉप' के तौर पर होने लगी। मेघालय के गारो हिल्स में उग्रवादियों के खिलाफ और असम के चराइदेव जिले में उन्होंने कई सफल ऑपरेशनों का नेतृत्व किया।
- ड्रग माफिया पर कहर: असम के लखीमपुर और धुबरी जिलों में उनकी तैनाती के दौरान नशीले पदार्थों के खिलाफ उनकी कार्रवाई ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। नगांव में ड्रग माफिया और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ उनके सख्त रुख ने अपराधियों में खौफ पैदा कर दिया।
- 150 एनकाउंटर: अपने 13 साल के पुलिस करियर में, मिश्रा लगभग 150 एनकाउंटरों में शामिल रहे, जिसने उन्हें एक सच्चा 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' बना दिया।
- मार्शल आर्ट्स में महारत: मिश्रा को मार्शल आर्ट्स में ब्लैक बेल्ट भी हासिल है, जो उनकी शारीरिक फिटनेस और ऑपरेशनल स्किल को दर्शाती है।
बाइक राइडर कॉप का अनोखा अंदाज
आनंद मिश्रा की लोकप्रियता सिर्फ उनके पुलिसिंग रिकॉर्ड तक सीमित नहीं थी। सोशल मीडिया पर उनके वायरल वीडियो, जिसमें वह लंबी बाइक राइड्स करते और अनोखे अंदाज में सामुदायिक पुलिसिंग करते दिखते थे, ने उन्हें युवाओं के बीच एक सेलिब्रिटी पुलिस ऑफिसर बना दिया। असम के कई जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में उन्होंने जनता के बीच एक खास जगह बनाई।
IPS की वर्दी उतार, पहनी सियासी खादी
जनवरी 2024 में, आनंद मिश्रा ने अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने के लिए आईपीएस पद से इस्तीफा दे दिया।
- पहला सियासी दांव: उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में बक्सर संसदीय सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। हालांकि वह जीत नहीं पाए, लेकिन उन्होंने करीब 50,000 वोट हासिल करके बिहार के सियासी गलियारों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी।
- जन सुराज से भाजपा तक: राजनीति में आने के बाद, मिश्रा ने पूर्व चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी जॉइन की, लेकिन अगस्त में वह वहां से निकलकर भाजपा में शामिल हो गए।
- संघ से करीबी: सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से उनका बहुत गहरा जुड़ाव है। असम में पोस्टिंग के दौरान भी उन्हें कई RSS नेताओं के साथ सार्वजनिक रूप से देखा गया था, और वह खुद भी बाल स्वयंसेवक रह चुके हैं।
- जीत का संकल्प: भाजपा में शामिल होते समय उन्होंने सार्वजनिक रूप से शपथ ली थी कि वह जीवनभर पार्टी और बिहार के लिए काम करते रहेंगे।
बक्सर की ऐतिहासिक जीत
विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन पर भरोसा जताया और यह भरोसा सही साबित हुआ। बक्सर सीट कांग्रेस का पुराना गढ़ रही है, जिसने 1951 में इस सीट के गठन के बाद से 17 चुनावों में से 10 बार कांग्रेस को चुना है, जबकि भाजपा को यहां केवल तीन बार ही जीत मिली थी। आनंद मिश्रा ने अपनी कड़क छवि, साफ-सुथरे व्यक्तित्व और जातीय समीकरणों से इतर अपनी प्रशासनिक क्षमता के दम पर यह सीट जीतकर न सिर्फ भाजपा को एक बड़ी जीत दिलाई, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए और मजबूत चेहरे के तौर पर अपनी पहचान स्थापित कर ली है।
आनंद मिश्रा के माता-पिता और पत्नी
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आनंद मिश्रा के पिता का नाम परम हंस मिश्रा है, जबकि उनकी माता का नाम दिवंगत (Late) शांति मिश्रा था। धार्मिक रूप से वह हिंदू धर्म का पालन करते हैं। आनंद मिश्रा की पत्नी का नाम अर्चना तिवारी है।












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