Motivational Story: कौन हैं डॉ. अभिषेक, जिनकी किताब का 'इनफ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में दर्ज हुआ नाम
Influencer Book Of World Records: बिहार के युवाओं की प्रतिभा डंका दुनिया भर के देशों बज रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में यहां के युवा प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। आज हम आपको बिहार के बेगूसराय ज़िला के रहने वाले डॉक्टर अभिषेक कुमार के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने 'कोरोना डायरी इंडिया फाइट्स अगेंस्ट कॉविड -19' किताब लिखी है। ग़ौरतलब है कि इनकी किताब का नाम इनफ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
डॉ. अभिषेक कुमार ने अपनी पत्नी डॉ. ज्योति की मदद से लिखी किताब में 'कोरोना काल' पर खास जानकारी दी है। वहीं उन्होंने इस महामारी पर फैले मिथक पर भी रोशनी डाली है। कोरोना काल में लगाए गए लॉकडाउन को लेकर भी ख़ास चर्चा की गई है।

'कोरोना डायरी इंडिया फाइट्स अगेंस्ट कॉविड -19' में कोरोना काल के दौरान लगे लॉकडाउन की वजह से देश भर में जो हालात पैदा हुए उन सब का ज़िक्र किया गया है। अब यह किताब लोगों के बीच सुर्खियों में बना हुआ है। किताब के बारे में तो आपको जानकारी मिल गई, अब किताब के लेखक डॉ. अभिषेक के बारे में कुछ बातें जान लेते हैं।
डॉ. अभिषेक की मां का नाम डॉ. इंदु मिश्रा है, पिता डॉ. सतीश चंद्र मिश्रा होम्योपैथिक डॉक्टर हैं। वह लोग बेगूसराय ज़िला के सदानंदपुर गांव में रहते हैं। कोरोना महामारी पर जो बाते डॉ.अभिषेक ने लिखी हैं, इससे पहले उन बातों को ज़िक्र किसी भी किताबों में नहीं किया गया है।
आपको बता दें कि डॉ. अभिषेक के किताब वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने पर डाक के ज़रिए प्रमाण पत्र भेजा गया है। बेगूसराय जिला लेखक संघ की तरफ़ से डॉ. अभिषेक कुमार को इस कामयाबी के सम्मानित किया जाएगा। लेखक डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी डॉ. ज्योति की मदद से ही वह यह किताब लिख पाए।
डॉ. अभिषेक ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान जो भी मंज़र सामने आते गए, अपनी पत्नी से उस पर ज़िक्र कर लफ़्ज़ों में पिरोते गए। डायरी में सभी बातों को लिखते चले गए और एक दिन आया जब डायरी, किताब की शक्ल में तब्दील हो गई। 'कोरोना डायरी इंडिया फाइट्स अगेंस्ट कॉविड -19' में 53 लेख और 53 नज़्म भी शामिल है।
डॉ. अभिषेक ने कहा कि किताब का नाम इनफ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने पर काफी खुशी महसूस हो रही है। इस किताब में कोरोना काल के दौरान जागरूकता, कोरोना पर नए रिसर्च, साइंटिस्टों का नज़रिया के साथ ही कोरोना काल से पड़े आर्थिक, सामाजिक और सियासी प्रभाव और उस दौरान हुई घटनाओं पर चर्चा की गई है।












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