Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

West Champaran Seat: लोकसभा चुनाव में 2 बार जीत की हैट्रिक लगा चुकी है BJP, जानिए समीकरण और इतिहास

Lok Sabha Election के मद्देनज़र NDA बनाम INDIA की सियासत जारी है। वहीं बिहार में सभी 40 लोकसभा सीटों पर सियासी समीकरण देखते हुए राजनीतिक दलों ने रणनीतिया बनानी शुरू कर दी है। प्रदेश की चुनावी चर्चा के बीच आज हम आपको बिहार की पश्चिमी चंपारण सीट का इतिहास और सियासी समीकरण बताने दा जा रहहे है।

पश्चिम चंपारण सीट के पिछले तीन लोकसभा सीट के इतिहास पर नज़र डालें तो जीत के ऐतबार से भाजपा की स्थिति मज़बूत नज़र आ रहा है। इस सीट पर भाजप जीत की हैट्रिक लगा चुकी है। भाजपा प्रत्याश संजय जायसवाल लगातार यहां से जीत दर्ज करते रहे हैं।

West Champaran Seat

2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में संजय जायसवाल ने लगातार दो बार LJP प्रत्याशी बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्देशकों में शुमार किये जाने वाले प्रकाश झा सियासी मात दी। लगातार दो बार चुनाव हारने के बाद प्रकाश झा ने चुनावी मैदान से किनारा ही कर लिया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय जायसवाल ने पार्टी का लगातार तीसरी बार परचम बुलंद किया। उन्होंने रालोसपा प्रत्याशी डॉ ब्रजेश कुमार कुशवाहा को हराया था।

पश्चिमी चंपारण के सियासी इतिहास की बात की जाए तो, नेपाल से करीब वाले क्षेत्रों में शुमार किया जाने वाले यह इलाका तिरहुत प्रमंडल में आता है। सत्याग्रह आंदोलन की बापू गांधी ने यहीं से शुरुआत की थी। ग़ौरतलब है कि आज़ादी के मिलने के बाद आपातकाल तक यहां कांग्रेसियों का क़ब्ज़ा रहा।

जनता पार्टी के प्रत्याशी फज़लू रहमान ने पहली बार 1977 में कांग्रेस के किले को ढाया था। इसके बाद 5 बार भाजपा, 2 बार जनता दल, एक बार CPI और 1 बार राजद ने जीत दर्ज की। 1962 से लेकर 1971 कांग्रेस प्रत्याशी कमल नाथ तिवारी ने इस सीट पर पार्टी का परचम बुलंद करते रहे। 1977 में जनता पार्टी के फजलू रहमान ने जीत का परचम लहराया।

1980 में फिर से कांग्रेस के खाते में सीट गई, कांग्रेस प्रत्याशी केदार पांडेय यहां से सांसद चुने गए। 1984 में केदार पांडेय का निधन हो गया। निधन के बाद हुए उपचुनाव में CPI प्रत्याशी पीतांबर सिंह ने जीत का परचम लहराया। ग़ौरतलब है कि इस उपचुनाव में मनोज पांडेय (केदार पांडेय के बेटे) ने चुनावी दांव खेला था, लेकिन कामयाब नहीं हो सके।

1985 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मनोज पांडेय ने CPI प्रत्याशी पीतांबर सिंह को चुनावी मात देकर सांसद की कुर्सी पर क़ब्ज़ा जमाया। 1989 में जनता दल प्रत्याशी धर्मेश प्रसाद वर्मा ने मनोज पांडेय (कांग्रेस प्रत्याशी) को सियासी मात दी। 1991 में जनता दल के प्रत्याशी फैयाजुल आलम ने जीत कर पार्टी के खाते में सीट डाली।

1991 के बाद हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ मदन मोहन जायसवाल ने जीत की हैट्रिक लगाई। 1996, 1998 और 1999 में पार्टी का के नाम जीत का परचम बुलंद किया। 2004 के चुनाव में राजद प्रत्याशी रघुनाथ झा ने भाजपा प्रत्याशी डॉ मदन मोहन जायसवाल के जीत पर ब्रेक लगाते हुए खुद सांसद की कुर्सी पर कब्ज़ा जमाया। इसके बाद मदन भाजपा नेता मदन मोहन जायसवाल की मौत हो गई। फिर उनके बेटे डॉ संजय जायसवाल ने पिता की तरह ही 2009, 2014 और 2019 में जीत की हैट्रिक लगाई।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+