चिराग की लगाई आग से दुखी नीतीश कुमार नहीं बनना चाहते सीएम, भाजपा मना रही

पटना- 15 साल में सबसे कम सीटें जीतने की वजह से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते, लेकिन बीजेपी उन्हें समझाने-बुझाकर राजी करने में लगी हुई है। नीतीश कुमार इस बात से बहुत परिशान हैं कि चिराग पासवान की वजह से जेडीयू को चुनावों में कम से कम 25 से 30 सीटों का नुकसान हुआ है। वोटों की गिनती वाले दिन ही वनइंडिया ने इस तरह की आशंका से आपको अवगत कराया था कि कम सीटें आने पर नीतीश कुमार जैसे व्यक्ति के लिए फिर से सीएम बनना आसान नहीं रहेगा। दरअसल, नीतीश सरकार की 15 साल की एंटी इंम्बेंसी के बावजूद एनडीए ने सत्ता में वापसी तो कर ली है, लेकिन बिहार में गठबंधन के सबसे बड़े सत्ताधारी दल जदयू का कद सहयोगी भारतीय जनता के मुकाबले बहुत ही छोटा हो गया है।

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    Unhappy with the Chirag Paswan, Nitish Kumar does not want to become CM,BJP is convincing

    बिहार में एनडीए नीतीश कुमार को सातवीं बार ताजपोशी की तैयारियों में जुट गई है और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से स्पष्ट किया जा चुका है बिहार की सरकार नीतीश के अगुवाई में ही चलेगी। लेकिन, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक खुद नीतीश कुमार यह जिम्मेदारी लेने के लिए 'अनिच्छा' जता रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वरिष्ठ भाजपा नेता उन्हें मुख्यमंत्री पद संभालने के लिए राजी करने की कोशिशों में जुटे हैं और उन्हें भरोसा दे रहे हैं कि उन्हें पहले की तरह ही सरकार चलाने में 'पूरी आजादी' दी जाएगी।

    गौरतलब है कि चुनाव परिणाम आने के अगले दिन बुधवार को नीतीश कुमार ने ट्विटर पर जेडीयू के खराब प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया जताते हुए लिखा था, "जनता मालिक है। उन्होंने एनडीए को जो बहुमत प्रदान किया, उसके लिए जनता-जनार्दन को नमन है। मैं पीएम श्री नरेंद्र मोदी जी को उनसे मिल रहे सहयोग के लिए धन्यवाद करता हूं।" सूत्रों के मुताबिक चिराग पासवान और उनकी पार्टी ने चुनाव में जेडीयू को जिस तरह से डैमेज किया है, उससे मुख्यमंत्री बहुत ही ज्यादा परेशान थे। एक बीजेपी नेता के मुताबिक, 'वह इस बात से भीतर से व्याकुल और बहुत ही ज्यादा परेशान थे कि चिराग पासवान ने 25-30 सीटों पर जदयू की उम्मीदों को बर्बाद कर दिया। हमने उन्हें समझाया कि भाजपा के गठबंधन के सीनियर पार्टनर बनने के बावजूद मुख्यमंत्री बने रहें। ' 243 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को 74, जेडीयू को 43 और 'हम'-वीआईपी को 4-4 सीटें मिली हैं।

    जेडीयू के एक नेता ने कहा है कि 'पार्टी में यह एक आम भावना है कि चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने चिराग पासवान से उस प्रभावी तरह से डील नहीं किया, जैसा कि उसे करना चाहिए था।' इस नेता के मुताबिक भाजपा और जदयू कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल का भी अभाव था। उसके मुताबिक हो सकता है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सीटिंग विधायक हार गए। काउंटिंग वाली रात को बिहार बीजेपी के इंचार्ज भूपेंद्र यादव, प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल, उपमुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृहराज्यमंत्री नित्यानंद राय ने नीतीश कुमार से मुलाकात की। वैसे तो यह शिष्टाचार मुलाकात थी, लेकिन कई जदयू नेताओं को लगा कि ये तब पहुंच रहे हैं, जब पार्टी को नुकसान हो चुका है।

    बिहार में एनडीए ने 125 सीटें जीतकर बहुमत पाया है। जबकि, महागठबंधन ने 110 सीटें जीती हैं। वहीं अन्य दलों को 8 सीटें मिली हैं। इस तरह से पूर्ण बहुमत से एनडीए के पास तीन विधायक ज्यादा हैं। जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार 16 नवंबर को सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं।

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