बिहार के 2 IPS निलंबित, एक ने HC के फर्जी चीफ जस्टिस बन DGP को की ठगने की कोशिश, दूसरा इस मामले में सस्पेंड
बिहार की नीतीश सरकार ने मंगलवार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
बिहार की नीतीश सरकार ने मंगलवार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। बिहार के गृह विभाग ने पूर्णिया जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी दया शंकर और उनके वरिष्ठ 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार को निलंबित करने के आदेश जारी किए। आदित्य कुमार का निलंबन बिहार की आर्थिक अपराध इकाई द्वारा उनके और उनके सहयोगी के खिलाफ मामला दर्ज करने के दो दिन बाद आया है।

फर्जी चीफ जस्टिस बन की कॉल
जिन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक एसके सिंघल को पटना उच्च न्यायालय के फर्जी मुख्य न्यायाधीश संजय करोल के रूप में फोन किया। डीजीपी सिंघल को एक मामला खत्म करने की सलाह दी। अधिकारियों ने कहा कि निलंबन आदेश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक कॉल के बाद जारी किए गए थे। जिन्होंने एक सप्ताह पहले विजिलेंस छापे के बाद पूर्णिया जिले के एसपी के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में पूछताछ की थी।
दया शंकर इस मामले में सस्पेंड
वहीं आय से अधिक संपत्ति के मामले में दया शंकर को सस्पेंड कर दिया गया है। एसवीयू के अनुसार, अधिकारियों ने पूर्णिया में दया शंकर के आवास से 2.96 लाख रुपये नकद और 28 लाख रुपये के आभूषण, उनके दो फ्लैटों से 1.52 लाख रुपये नकद और पटना के दानापुर में बिस्किट फैक्ट्री रोड पर एक दुकान जब्त की। अतिरिक्त महानिदेशक (एसवीयू) एनएच खान ने आरोप लगाते हुए कहा कि दया शंकर ने पटना में अपने और अपनी पत्नी के नाम पर बड़ी अचल संपत्ति अर्जित की है।
एसपी के निजी कर्मचारी, अधिकारी, अंगरक्षक और अन्य भी उसकी धन उगाही में शामिल हैं।" नीरज कुमार सिंह, आरक्षक सावन कुमार और एक बिल्डर संजीव कुमार। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सदर थाने के एसएचओ संजय कुमार सिंह, एसपी के सहयोगी नीरज कुमार सिंह, कांस्टेबल सावन कुमार और एक बिल्डर संजीव कुमार सहित एसपी के करीबी सहयोगियों के आवासों पर भी छापेमारी की।
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