बिहार में सभी लोगों का होगा अपना घर, राज्य सरकार दे रही घर बनाने के लिए ज़मीन
बिहार में अभी भी कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है और ना ही ज़मीन है।
पटना, 22 अप्रैल 2022। बिहार में अभी भी कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है और ना ही ज़मीन है। राज्य सरकार ऐसे लोगों को सौगात देने जा रही है जिसके पास रहने के लिए घर नहीं है। बिहार सरकार की तरफ़ ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया है जिसके पास घर बनाने के लिए ज़मीन नहीं है। उन लोगों को राज्य सरकार की तरफ़ से तीन डिसमिल ज़मीन देने का फ़ैसला लिया है।

इन परिवारों को मिलेगा फ़ायदा
बिहार सरकार की इस योजना का फायदा अनुसूचित जाति, पिछड़े और अति पिछड़ा वर्ग के लोगों को मिलेगा। इसमें भी शर्त यह है कि योजना का लाभ उन्हीं परिवार को मिलेगा जिनके पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। बिहार सरकार की तरफ़ से उन्हीं लोगों को सरकारी स्तर पर जमीन मुहैया करायी जाएगी जिनके पास घर बनाने के लिए ज़मीन नहीं है। सिर्फ अनुसूचित जाति, पिछड़े और अति पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने से इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। वित्तीय वर्ष 2021-22 में सरकार ने सर्वे कराया था और एक सूची भी तैयार की थी। उस सर्वे के दौरान सूची में शामिल नाम वाले जिन लोगों को ज़मीन नहीं मिल पाई थी अब उन्हें सरकार के इस योजना का फ़ायदा मिलेगा।

एक परिवार को तीन डिसमल ज़मीन
बिहार सरकार की इस योजना के तहत एक परिवार को तीन डिसमल ज़मीन देने का प्रावधान है। ग़ौरतलब है कि सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में सर्वे कराया था लेकिन उस वक्त सभी परिवारों को ज़मीन नहीं मिला था। इसलिए अभी पहली सूची में शामिल सभी परिवारों को ज़मीन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। चूंकि ज़मीन लेने वाले परिवारों की तादाद ज़्यादा है, इसलिए ज़्यादा ज़मीन की भी ज़रूरत है। इसलिए सरकार ने इसके लिए एक प्लान तैयार किया है कि जो ग़ैर मजरूआ, सीलिंग और भूदान वाली ज़मीने हैं उसी ज़मीन में इन परिवारों को बसेरा दिया जाए। इसके बावजूद अगर ज़मीन पूरी नहीं होगी तो सरकार ज़मीन ख़रीद कर देने की भी योजना बना रही है। तीन डिसमल के लिए सरकार क़रीब 60 हज़ार रुपये ख़र्च कर सकती है।

बिहार में सभी लोगों को होगा अपना घर
सरकार के घर उपलब्ध करवाने की ख़बर से लोगों में ख़ुशी का माहौल भी है लेकिन दूसरी ओर यह भी संशय बना हुआ है कि ज़रूरतमंद सभी परिवार को इस सुविधा लाभ मिलेगा या नहीं। सरकार की तरफ़ से सर्वे कर आंकड़ा तो निकाल लिया गया है लेकिन सरकार के सर्वे के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 10 हज़ार 165 पिछड़े वर्ग के परिवार वालों की तादाद थी। वहीं अति पिछड़ा वर्ग के 18 हज़ार 778 परिवार के पास रहने के लिए घर नहीं था। अब सवाल यह उठता है कि सरकार सभी परिवार को एक लॉट में ज़मीन देगी या फिर ज़मीन आवंटन के लिए दूसरी सूची भी जारी की जाएगी। इसके साथ ही बिहार के राजस्व-भूमि सुधार मंत्री राम सूरत राय का कहना है कि सरकार की कोशिश है कि राज्य में कोई भी परिवार बिना छत के नहीं रहे। सभी को छत दिलाने के लिए सरकार योजना तैयार कर रही है। राजस्व भूमि सुधार विभाग भी इस बाबत पूरी तैयारी कर रहा है।
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