Bihar Election 2025: तेजस्वी के एक बयान ने हिला दी महागठबंधन की नींव? सीट बंटवारे से पहले RJD ने कर दिया खेल
Bihar Election 2025: राजनीतिक गलियारों में हलचल अपने चरम पर है, क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। यह चुनाव न सिर्फ सत्ता पक्ष जदयू (JDU) और भाजपा (BJP) के लिए अहम है, बल्कि महागठबंधन के लिए भी निर्णायक साबित होगा, जिसका नेतृत्व आरजेडी (RJD) नेता तेजस्वी यादव कर रहे हैं और साथ हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी।
हाल ही में राहुल गांधी ने बिहार में वोटर अधिकार यात्रा पूरी की थी, जिसने महागठबंधन की एकता का चेहरा दिखाया। लेकिन इसी बीच तेजस्वी यादव ने चौंकाने वाला ऐलान कर दिया कि आरजेडी आगामी चुनाव में सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। तेजस्वी के इस बयान ने महागठबंधन के भीतर अविश्वास की खाई और गहरी कर दी है।

सीट बंटवारे पर घमासान
महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बातचीत पर्दे के पीछे चल रही है, जिसमें आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई (एमएल), सीपीआई और सीपीएम जैसे दल शामिल हैं। कांग्रेस ने साफ नाराजगी जताते हुए कहा है कि उसे जीतने लायक सीटें मिलनी चाहिए।
पिछली विधानसभा में 70 सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद कांग्रेस सिर्फ 19 सीटों पर ही जीत पाई थी, जिससे वह गठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई। बावजूद इसके, कांग्रेस का तर्क है कि उसके संगठनात्मक ढांचे और हालिया जनसंपर्क अभियानों के आधार पर उसे उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
छोटे दलों में असंतोष
छोटे सहयोगी दलों में भी असंतोष बढ़ता जा रहा है। मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी ने 40 सीटों की मांग की है। वहीं, 2020 में 19 सीटों पर चुनाव लड़ चुकी सीपीआई (एमएल) भी ज़्यादा हिस्सेदारी चाहती है, यह तर्क देते हुए कि ज़मीन और मज़दूर अधिकारों पर उसके आंदोलन की अहमियत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। आरजेडी का सभी 243 सीटों पर दावा इन छोटे दलों को हाशिए पर धकेल रहा है, जिससे असंतोष, बगावत या निर्दलीय उम्मीदवारों की संभावना बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री पद का चेहरा और NDA की रणनीति
तेजस्वी यादव ने यह भी साफ किया है कि महागठबंधन बिना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किए चुनाव नहीं लड़ेगा, और इस तरह उन्होंने खुद को गठबंधन का वास्तविक नेता पेश कर दिया है। उधर, नीतीश कुमार के प्रशासनिक अनुभव और भाजपा की संगठनात्मक ताक़त के साथ एनडीए पहले से ही विपक्ष की अव्यवस्था को भुनाने में जुटा है और खुद को एक स्थिर विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है। महागठबंधन में वोटों का बंटवारा हुआ तो इसका सीधा फायदा एनडीए को मिलेगा।












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