ऐश्वर्या फैक्टर के चलते तेजप्रताप नहीं उतरेंगे चुनावी मैदान में, MLC बनाने की तैयारी?

क्या लालू यादव के बड़े पुत्र और विधायक तेजप्रताप यादव का राजनीतिक भविष्य असुरक्षित है ? क्या तेजप्रताप के सियासी वजूद को बचाने रखने के लिए उन्हें MLC बनाया जाएगा ? बिहार विधान परिषद की रिक्त हुई 9 सीटों पर 6 जुलाई को वोटिंग है। विधायकों की संख्या के आधार पर राजद को तीन मिलेंगी। इस तीन में एक सीट पर तेजप्रताप को उम्मीदवार बनाये जाने की चर्चा है। उम्मीदवारों के नाम लालू यादव तय करेंगे। 25 जून नामांकन की आखिरी तारीख है। यानी तेजप्रताप के राजनीतिक भविष्य पर इसी हफ्ते फैसला हो जाएगा।

क्या तेजप्रताप MLA से बनेंगे MLC?
तेजप्रताप अभी वैशाली जिले की महुआ सीट से विधायक हैं। तब फिर ऐसी क्या बात हुई कि उन्हें एमएलसी बनाये जाने की जरूरत महसूस की जाने लगी ? ऐसा माना जा रहा है कि तलाक प्रकरण ने तेजप्रताप की राजनीति पर गहरा असर डाला है। ऐश्वर्या राय ने सार्वजनिक रूप से अपने पति तेजप्रताप, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती पर गंभीर आरोप लगाये हैं। यह झगड़ा घर से सड़क पर आ गया है। अगर ऐश्वर्या ने तेजप्रताप के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया तो क्या होगा ? बहरहाल एक खौफ है, चुनांचे तेजप्रताप को सेफ पैसेज चाहिए। चर्चा इस बात की भी है कि अगर तेजप्रताप को विधानपरिषद नहीं भेजा गया तो उन्हें महुआ के अलावा बख्तियारपुर से भी चुनाव लड़ाया जा सकता है।

क्या तेजप्रताप और तेजस्वी नहीं लड़ेंगे चुनाव ?
इसी साल मार्च में भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा था कि ऐश्वर्या के डर से लालू यादव के दोनों बेटे (तेजप्रताप और तेजस्वी) विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। इन दोनों भाइयों को डर है कि अगर ऐश्वर्या ने उनके खिलाफ चुनाव लड़ा तो जनता ऐश्वर्या को सहानुभूति में समर्थन सकती है। ऐश्वर्या को मिला सहानुभूति वोट उनकी हार का कारण बन सकता है। राजद को इस बात का अंदेशा है कि एनडीए ऐश्वर्या राय को चुनाव में तुरुप का पत्ता बना सकता है। तेजप्रताप पिछले कुछ महीनों से मनेर और बख्तियारपुर का दौरा करते रहे हैं। यह सक्रियता देख कर ही उनके चुनाव क्षेत्र बदलने की चर्चा होती रही है। तेजस्वी यादव के भी चुनाव नहीं लड़ने की अटकलें लगायी जाती रही हैं। कोरना संकट के दौर बिहार का चुनावी परिदृश्य इस बार बिल्कुल अगर होगा। सोशल डिस्टेंसिंग की स्थिति में ऐसा भी हो सकता है कि न चुनावी सभाएं हों और न डोर टू डोर कैंपेन हो। तब पूरा चुनाव प्रबंधन तकनीक पर आधारित हो जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राजद कैसा प्रदर्शन करेगा, इसको लेकर भी एक हिचक है। विधानसभा चुनाव में राजद के चुनाव प्रचार का भार मुख्य रूप से तेजस्वी के कंधे पर होगा। अगर वे चुनाव लड़ेंगे तो पार्टी के अन्य उम्मीदवारों को वाजिब समय नहीं दे पाएंगे। इन सब बातों के आधार पर तेजस्वी के चुनाव नहीं लड़ने की बात की जा रही थी। लेकिन जब तेजस्वी यादव अपने पिता के जन्मदिन पर मिलने रांची गये तो लालू यादव ने उन्हें चुनाव लड़ने की सलाह दी। रांची से लौटने के बाद तेजस्वी अपने विधानसभा क्षेत्र ऱाघोपुर में सक्रिय हो गये हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि वे 2020 का चुनाव लड़ सकते हैं। चुनावी स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए तेजस्वी दो सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन लालू यादव कोई चौंकाने वाला फैसला भी ले सकते हैं।

ऐश्वर्या के पिता दे चुके हैं संकेत
तेजताप यादव के ससुर चंद्रिका राय तकनीकी तौर पर अभी भी राजद के विधायक हैं, लेकिन उन्होंने लालू परिवार के खिलाफ ताल ठोक दी है। अप्रैल महीने में कोरोना का संक्रमण बिहार में तेजी से बढ़ा था। उस समय तेजस्वी यादव पटना में नहीं थे। तेजस्वी ने ट्वीट कर कोटा से बिहार के विद्यार्थियों घर लाने की मांग की थी। तब चंद्रिका राय ने कहा था कि इस आपदा की घड़ी में तेजस्वी को पटना में रहना चाहिए था लेकिन वे दिल्ली में बैठ कर ट्विटर पॉलिटिक्स कर रहे हैं। अगर छात्रों की इतनी फिक्र है तो उन्हें पटना में रहना चाहिए था। हर आपदा के समय तेजस्वी बिहार से गायब रहते हैं। चंद्रिका राय ने तेजस्वी और तेजप्रताप, दोनों को अनुभवहीन बताया था। चंद्रिका राय अब नीतीश के समर्थन में हैं। वे लालू परिवार को राजनीतिक सबक सिखाने का संकेत देते रहे हैं। इसी साल फरवरी में उन्होंने कहा था कि विधानसभा चुनाव के समय वे कुछ बड़ा करने वाले हैं। तभी से उनकी बेटी ऐश्वर्या राय के चुनाव लड़ने की चर्चा होती रही है।












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