बाहुबली सूरजभान सिंह की जाति क्या है? पत्नी लड़ रही हैं बिहार चुनाव, दिलचस्प है पारिवारिक बैकग्राउंड
Surajbhan Singh Biography: वनइंडिया की खास सीरिज 'जाति की पाति' में आज बात बिहार के मोकामा के उस बाहुबली नेता की, जिसकी राजनीति, रसूख और अपराध, तीनों का एक अनोखा संगम रहा है। हम बात कर रहे हैं सूरजभान सिंह की। एक ऐसा नाम, जिसकी चर्चा कभी पटना से लेकर गोरखपुर तक होती थी। अब वही सूरजभान सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं-इस बार अपनी पत्नी वीणा देवी और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर।
वीणा देवी मोकामा से चुनाव लड़ रही है, वो भी राजद (RJD) के टिकट पर, जहां मैदान में सामने हैं बाहुबली अनंत सिंह। वीणा देवी मुंगेर से एक बार लोजपा की सांसद रही हैं। हाल ही में सूरजभान सिंह आरजेडी में शामिल हुए हैं। ऐसे में आइए जानें सूरजभान सिंह की जाति और उनके पारिवारिक बैकग्राउंड के बारे में।

🔹 सूरजभान सिंह की जाति क्या है? (Surajbhan Singh caste)
सूरजभान सिंह का जन्म 5 मार्च 1965 को पटना जिले के मोकामा में हुआ था। वे भूमिहार जाति से आते हैं -वही जाति जिससे बाहुबली अनंत सिंह भी हैं। बिहार की कुल आबादी में भूमिहारों की हिस्सेदारी लगभग 2.8 से 3 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, लेकिन उनका राजनीतिक प्रभाव इस अनुपात से कई गुना अधिक है।
भूमिहार समुदाय बिहार की राजनीति में एक मजबूत और संगठित वोट बैंक माना जाता है, जिसने हमेशा सत्ता के समीकरणों में अहम भूमिका निभाई है -चाहे बात कांग्रेस के दौर की हो, नीतीश युग की या फिर बीजेपी के उभार की। पिछले कुछ चुनावों में भूमिहार मतदाताओं का झुकाव बीजेपी की ओर रहा, लेकिन मोकामा जैसी सीटों पर स्थानीय बाहुबल और परिवारिक नेटवर्क इस समीकरण को बदल सकता है।
🔹 सूरजभान सिंह का सफर अपराध की दुनिया से राजनीति तक (who is Surajbhan Singh)
सूरजभान सिंह के पिता किसान थे और बड़े भाई सीआरपीएफ में जवान। परिवार आम था, लेकिन 80 के दशक में सूरजभान ने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। शुरुआत छोटे-मोटे अपराधों से हुई, लेकिन 90 के दशक तक उनका नाम पटना और शाहाबाद इलाके में खौफ का पर्याय बन गया। हत्या, लूट, रंगदारी जैसे कई केस दर्ज हुए, लेकिन राजनीतिक समझ और स्थानीय पकड़ ने उन्हें एक "व्हाइट कॉलर बाहुबली" बना दिया।
2000 में जेल से ही उन्होंने मोकामा विधानसभा चुनाव लड़ा और राजद के दिग्गज नेता दिलीप सिंह को हरा दिया। यहीं से सूरजभान की राजनीति में एंट्री हुई और उनका दबदबा स्थापित हो गया।

🔹 लोजपा से संसद तक का सफर
दिवंगत नेता रामविलास पासवान ने जब लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) की स्थापना की, तब सूरजभान उसके संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। 2004 में उन्होंने बलिया (अब बदल चुके परिसीमन क्षेत्र) से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद में वे पासवान परिवार के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाने लगे। राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों के बावजूद, सूरजभान ने अपने परिवार को राजनीति की मुख्यधारा में बनाए रखा।
🔹 पत्नी वीणा देवी और परिवार का राजनीतिक कद
सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी 2014 में मुंगेर लोकसभा सीट से सांसद बनीं। वहीं, उनके छोटे भाई चंदन सिंह 2019 में नवादा से लोकसभा सदस्य चुने गए। यानी इस परिवार से अब तक तीन सांसद बन चुके हैं, खुद सूरजभान, उनकी पत्नी और उनके भाई।
अब खबर है कि 2025 के बिहार चुनाव में मोकामा सीट से वीणा देवी को राजद टिकट मिल सकता है। अगर ऐसा होता है तो मुकाबला फिर वही होगा, भूमिहार बनाम भूमिहार, सूरजभान परिवार बनाम अनंत सिंह। अगर सूरजभान की पत्नी वीणा देवी राजद से मैदान में उतरती हैं, तो ये न सिर्फ मोकामा, बल्कि पूरे पटना और शाहाबाद बेल्ट की राजनीति में नई हलचल पैदा कर देगा।

🔹 मोकामा में फिर से "महामुकाबले" के आसार
साल 2000 की तरह ही मोकामा फिर एक बार दो बाहुबलियों की टक्कर देख सकता है, अनंत सिंह बनाम सूरजभान परिवार। अंदरखाने से खबर है कि सूरजभान ने अनंत सिंह की एक टिप्पणी को "चुनौती" की तरह लिया है। ऐसे में 2025 का यह मुकाबला न सिर्फ जातीय समीकरणों बल्कि "पुरानी दुश्मनी" का भी नया अध्याय लिख सकता है।
सूरजभान सिंह का सफर बिहार की राजनीति की उस कहानी का हिस्सा है, जहां अपराध, जाति और सत्ता की डोरें एक-दूसरे में उलझी रहती हैं।अब वक्त फिर करवट ले रहा है, वही मोकामा, वही जातीय समीकरण और वही राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई। इतिहास खुद को दोहरा रहा है, बस किरदार थोड़े बदले हैं।












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