Supaul Lok Sabha Seat: ‘मोदी लहर’ में भी BJP का नहीं खुला खाता, जानिए कब किसने मारी बाज़ी
Supaul Lok Sabha Seat History And Profile: बिहार में आगामी चुनाव के मद्देनज़र सियासी दलों ने सभी 40 लोकसभा सीटों पर राजनीतिक रणनीतियां बनानी शुरू कर दीं हैं। नए परिसीमन के बाद 2008 में अस्तित्व में आई सुपौल लोकसभा क्षेत्र के अंदर 5 विधानसभा सीट शामिल है।
सुपौल लोकसभा सीट में शामिल सुपौल, निर्मली, त्रिवेणीगंज, पिपरा और छतापुर विधानसभा सीट शामिल है। 2009 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर जदयू प्रत्याशी ने जीत का परचम लहराया था। वहीं 2014 में जब देशभर में 'मोदी लहर' के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी रंजीत रंजन (पप्पू यादव की पत्नी) ने जीत का परचम लहराया था।

2019 के लोकसभा चुनाव में जदयू प्रत्याशी ने जीत दर्ज कर पार्टी का परचम बुलंद किया था। सुपौल के उत्तर में नेपाल होने की वजह से इस लोकसभा सीट का महत्व ज़्यादे ही बढ़ जाता है। वहीं एक तरफ सीमांचल तो दूसरी तरफ़ मिथिलांचल होने की वजह से इस सीट की सियासी अहमियत है।
पहले यह मिथिला के अंदर आता था, 1991 में सुपौल को जिला का दर्ज दिया गया। सुपौल लोकसभा सीट पर बाहुबली नेता पप्पू यादव (अध्यक्ष, जन अधिकार पार्टी) का दबदबा माना जाता है, 2014 के लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन ने कांग्रेस की टिकट पर जीत तो दर्ज की, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में जदयू प्रत्याशी ने अपनी पार्टी का परचम बुलंद किया।
सुपौल लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण की बात करें तो विनिंग फ़ैक्टर के तौर यादव और मुस्लिम मतदाताओं की गिनती होती है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उनका अहम किरदार देखने को मिलता रहा है। इसके अलावा ओबीसी और मुसहर मतदाता भी सियासी फ़िज़ा करते रहे हैं।
2009 के लोकसभा चुनाव में जदयू प्रत्याशी विश्व मोहन कुमार ने जीत दर्ज की, 2014 के लोकसभा चुनाव में रंजीत रंजन ने कांग्रेस का परचम बुंलद किया। 2019 में जदयू प्रत्याशी दिलेश्वर कामैत ने जीत दर्ज कर पार्टी का परचम बुलंद किया।












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