'क्या मृत वोटरों को लिस्ट में रहने दें हम', चुनाव आयोग ने विपक्ष से पूछे तीखे सवाल, क्यों भड़का EC?

Election Commission News: चुनाव आयोग ने विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच एक बड़ा सवाल उठाया है-क्या विपक्ष के दबाव में आकर चुनाव आयोग को विदेशी वोटर्स, मृत लोगों या फर्जी नामों से वोटिंग की इजाजत दे देनी चाहिए? चुनाव आयोग ने साफ किया कि संविधान के खिलाफ जाकर ऐसा कोई कदम उठाना न तो लोकतंत्र के हित में है और न ही आयोग की जिम्मेदारी के अनुरूप है।

चुनाव आयोग ने 24 जुलाई को कहा, ''भारत का संविधान भारतीय लोकतंत्र की जननी है, तो क्या इन बातों से डरकर, निर्वाचन आयोग को कुछ लोगों के बहकावे में आकर, संविधान के विरुद्ध जाकर, पहले बिहार में, फिर पूरे देश में, मृतक मतदाताओं, स्थायी रूप से पलायन कर चुके मतदाताओं, दो स्थानों पर वोट दर्ज कराने वाले मतदाताओं, फर्जी मतदाताओं या विदेशी मतदाताओं के नाम पर फर्जी वोट डालने का रास्ता बनाना चाहिए?''

Election Commission News

आयोग का यह बयान उस समय आया है जब बिहार चुनाव को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग पर लगातार यह आरोप लगा रहा है कि वह उनकी चिंताओं की अनदेखी कर रहा है।

क्या चुनाव आयोग मृत लोगों के नाम वोटर लिस्ट में रहने दे? CEC ने पूछे सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एक पारदर्शी और पवित्र मतदाता सूची ही एक सफल लोकतंत्र की नींव होती है। CNN-News18 से खास बातचीत में ज्ञानेश कुमार ने सवाल उठाया,

"क्या चुनाव आयोग मृत लोगों के नाम वोटर लिस्ट में रहने दे? क्या डुप्लीकेट EPIC (वोटर ID) रखने वालों को सूची में जगह मिलनी चाहिए? क्या विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए?"

EC ने पूछा- इसपर विचार करने के लिए समय अब भारत में आ गया

चुनाव आयोग ने कहा,

''क्या निर्वाचन आयोग द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया से तैयार की जा रही प्रामाणिक मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव और मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला नहीं है? इन सवालों पर, कभी न कभी, हम सभी को और भारत के सभी नागरिकों को, राजनीतिक विचारधाराओं से परे जाकर, गहराई से सोचना होगा। और शायद आप सभी के लिए इस आवश्यक चिंतन का सबसे उपयुक्त समय अब भारत में आ गया है।"

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता ही लोकतंत्र की मजबूती का आधार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि SIR जैसी प्रक्रिया का उद्देश्य योग्य मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र नामों को हटाना है, जिससे आने वाले चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हो सकें।

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने बिहार में जारी SIR के मुद्दे पर कहा,

"हम यह लड़ाई जारी रखेंगे। जरूरत पड़ी तो बड़े से बड़ा निर्णय लेंगे और आने वाले समय में एक बड़ी लड़ाई की तैयारी है। हम अंतिम लिस्ट का इंतजार करेंगे और उच्च न्यायालय के आदेश का इंतजार करेंगे। उसके बाद यदि वोटर के बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, तो उनके लिए सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेंगे।"

CEC का जवाब: विपक्ष की नाराजगी के बावजूद 5000 से ज्यादा बैठकें हुईं

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इससे पहले 5 जुलाई 2025 को फिरोजाबाद में एक निजी कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों में आयोग ने 5000 से अधिक बैठकें की हैं, जिनमें विधानसभा स्तर से लेकर राज्य स्तर तक 28,000 से अधिक लोग-जिसमें राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हैं-भाग ले चुके हैं।

उन्होंने कहा, "मतदाता के बाद राजनीतिक दल ही हमारे सबसे अहम हिस्सेदार हैं, और हम उनसे लगातार संवाद बनाए रखते हैं।"

बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन का फैसला बना विवाद का विषय!

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले आयोग ने "स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)" की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत 1 जनवरी 2003 की मतदाता सूची में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उन्हें वोटर के रूप में प्राथमिक पात्र माना जाएगा। उन्हें किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। उनके बच्चों के वोटर ID बनाते समय भी दस्तावेजों की अनिवार्यता नहीं होगी।

आयोग जल्द ही 2003 की वोटर लिस्ट वेबसाइट पर उपलब्ध कराएगा, ताकि लगभग 4.96 करोड़ वोटर, जिनका नाम उसमें है, उसका प्रिंट निकालकर नए नामांकन के साथ संलग्न कर सकें। बाकी करीब 3 करोड़ वोटर, जिन्हें उस सूची में दर्ज नहीं किया गया था, उन्हें जन्म या निवास प्रमाण के लिए 11 में से कोई एक दस्तावेज देना होगा।

CEC का साफ संदेश: हर योग्य नागरिक को सूची में शामिल किया जाएगा, किसी अपात्र को नहीं

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि यह प्रक्रिया इस बात को सुनिश्चित करेगी कि कोई भी योग्य मतदाता छूटे नहीं और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। बिहार में वर्तमान में 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, जो 243 विधानसभा सीटों पर फैले हुए हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+