Chhath Puja First Arghya: अस्त होते सूर्य को दिया गया पहला अर्घ्य, सामने आई खूबसूरत तस्वीरें
Chhath Puja First Arghya: आस्था और विश्वास के पर्व 'छठ' का आज तीसरा दिन है, शुक्रवार को भक्तगणों ने पानी में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को पहला अर्ध्य दिया और परिवार के लिए सुख-शांति की कामना की है। पटना में छठ पर अद्भुत नजारा दिखा, गंगा घाट पर डूबते सूर्य को अर्ध्य देने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हुए थे, अब इसके बाद शनिवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा और उसके बाद चार दिनों का ये महापर्व समाप्त हो जाएगा।
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हाथ में सूप लिए भक्तगण आधे पानी में खड़े होकर सूरज भगवान की पूजा करते दिखाई दिए, सभी का सूप फल, ठेकुआ, केसर, गन्ना और पूजा के सामान सजा था और साथ में 'छठ मईया' की गीत गाती महिलाओं ने माहौल को एकदम भक्तिमय बना दिया, बिहार, बंगाल, यूपी , एमपी, छत्तीसगढ़, झारखंड से घाटों की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो बेहद ही सुंदर और दिल छू लेने वाली हैं।

मालूम हो कि अर्घ्य देने वाले सभी भक्तगणों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा हुआ है, अब सुबह सभी लोग उगते सूरज को अर्ध्य देंगे और उसके बाद ही चार दिनों का व्रत समाप्त होगा। इसके बाद ही सारे भक्तगण पारण करके अपना व्रत खोलेंगे। मालूम हो कि 21 नवंबर 2020 को सुबह 6 बजकर 48 मिनट पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

वैसे तो इस पर्व को लेकर बहुत सारी कहानियां कही जाती हैं लेकिन संध्या अर्ध्य के वक्त लोग सूर्य की पत्नी प्रत्युषा की भी आराधना करते हैं, ऐसा माना जाता है कि शाम के समय सूर्य अपनी पत्नी प्रत्युषा के साथ समय बिताते हैं।
ये हैं सूर्य मंत्र जिन्हें संध्या और उषा काल के अर्घ्य के वक्त हर भक्तगण को पढ़ना चाहिए
- ग्रहाणामादिरादित्यो लोक लक्षण कारक:।
- विषम स्थान संभूतां पीड़ां दहतु मे रवि।।
- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:।
- ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
- ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।
- ऊं घृणिं सूर्य्य: आदित्य:।

ये हैं गाइड लाइन
- छठ पूजा स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन किया जाए।
- हर किसी को पूजा स्थल पर मास्क का प्रयोग अनिवार्य है।
- छठ पूजा स्थल पर महिलाओं के लिए चेंज रूम बनाए गए हैं।
- पूजा स्थल पर डॉक्टर के साथ तैनात एम्बुलेंस है।
- 60 साल के ऊपर के उम्र के व्यक्ति और 10 साल से कम उम्र के बच्चें पूजा स्थल पर आने की मनाई है।
- नदी-तालाब के किनारे पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाया गया है।
- नदी-तालाबों के किनारे शौचालय आदि की व्यवस्था की गई है।












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