Bihar: 'विधायकों का चमड़ा उधेड़कर विदेश में बेचिए', बिहार विधानसभा में RJD MLA का ऐसा बयान, सन्न रह गए मंत्री!
Bihar Assembly Monsoon Session 2026: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान राजद विधायक राहुल कुमार का तीखा बयान सुर्खियों में आ गया। सरकार द्वारा दाखिल-खारिज की प्रत्येक याचिका, अपील और पुनरीक्षण आवेदन पर 200 रुपये शुल्क लगाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार का खजाना खाली है तो अधिसूचना जारी कर दीजिए।
विधायक ने आगे कहा कि, जनता और विधायकों तक का चमड़ा उतरवाकर उससे जूते बनाइए और विदेश में बेचकर राज्य चलाइए। उनके इस बयान पर सदन में हंगामा हुआ, जबकि सरकार ने इसे विपक्ष की राजनीति करार दिया।

'चमड़ा उतरवाकर जूते बेचिए', राहुल कुमार का तीखा तंज
राजद विधायक राहुल कुमार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार सरकार सिर्फ 200 रुपये का शुल्क लगाकर खुद को महान साबित करना चाहती है। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि अगर खजाना खाली है तो जनता और विधायकों का चमड़ा उतरवाकर उससे जूते बनाकर विदेश में बेच दीजिए और उसी पैसे से राज्य चलाइए। उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
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दाखिल-खारिज शुल्क बढ़ाने पर सरकार को घेरा
राहुल कुमार ने कहा कि जमीन के दाखिल-खारिज के नाम पर पहले से ही अवैध वसूली की शिकायतें आती रही हैं। ऐसे में सरकार अब 200 रुपये का नया शुल्क लगाकर आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजस्व बढ़ाने के नाम पर जनता से मनमाने तरीके से पैसा वसूलना चाहती है, जबकि भ्रष्टाचार पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
मंत्री दिलीप जायसवाल ने दिया करारा जवाब
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष को यह भ्रम हो गया है कि सरकार का खजाना खाली है। उन्होंने कहा कि राज्य में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं और जनता सब देख रही है। मंत्री ने विपक्ष पर 'जंगलराज' की याद दिलाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार विकास और पारदर्शिता के रास्ते पर काम कर रही है।
आखिर क्या है बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक?
बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत अब भूमि या भू-खंड के दाखिल-खारिज से जुड़ी प्रत्येक याचिका, अपील और पुनरीक्षण आवेदन पर 200 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। अब तक केवल न्यायालय शुल्क स्टाम्प का प्रावधान था, लेकिन अलग से शुल्क निर्धारित नहीं था। सरकार का कहना है कि इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी और भविष्य में आवश्यकता के अनुसार शुल्क में संशोधन भी किया जा सकेगा।
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ध्वनिमत से पारित हुआ विधेयक, विपक्ष का विरोध जारी
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार के फैसले का लगातार विरोध किया। AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने 50 रुपये तक शुल्क को उचित बताया, लेकिन 200 रुपये पर सवाल उठे। बहस और हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित घोषित कर दिया। विपक्ष ने इसे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला फैसला बताया।












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