18 साल बाद पाकिस्तानी जेल से मिली रिहाई, घर लौटकर सुना रहा है यातनाओं की दास्तान

मां-बाप के गले लगकर बेटे ने 18 साल तक पाकिस्तान की जेल में कैद रहने और जिल्लत भरी जिंदगी जीने की दास्तां सुनाई। किस तरह पाकिस्तान की जेल में उसे प्रताड़ित किया जा रहा था।

पटना। आज से 18 साल पहले एक युवक पानी में बहकर पाकिस्तान के सीमा में प्रवेश कर गया था। जहां पाकिस्तानी पुलिस ने उसे हिंदुस्तान का खुफिया समझकर जेल में कैद कर लिया। पाकिस्तान की जेल में कैद युवक के परिवार वालों को इस बात की जानकारी नहीं थी। जहां मां-बाप अपने बेटे की खोज में दिन-रात भटकते रहे तो पत्नी घर में अपने पति का इंतजार कर रही थी।

18 साल बाद परिवार से मिला बेटा

18 साल बाद परिवार से मिला बेटा

देखते-देखते कई महीने और साल गुजर गए पर घर से गायब हुए बेटे का कोई अता-पता नहीं चला। तो मां-बाप को अपने बेटे की मौत हो जाने का अंदेशा सताने लगा। वहीं पत्नी ससुराल छोड़ मायके चली गई। मां-बाप काफी समय बीत जाने के बाद सुरेंद्र को भुलाते हुए अपने काम पर लग गए। फिर बेटे के गायब होने के लगभग 18 साल बाद सुरेंद्र के परिवार वालों को पंजाब पुलिस के द्वारा फोन पर ये जानकारी दी गई कि आपका बेटा हमारे पास है।

एक फोन की बजी घंटी और मां का दिल खिल उठा

एक फोन की बजी घंटी और मां का दिल खिल उठा

पुलिस की जुबान से इस तरह की बात सुनने के बाद मां-बाप खुशी के मारे झूमने लगे और अपने बेटे से मिलने पंजाब पहुंचे। जहां 18 साल बाद अपने बेटे को सकुशल अपने सामने देख दोनों की आंखों से आंसू निकलने लगे। तो मां-बाप के गले लगकर बेटे ने 18 साल तक पाकिस्तान की जेल में कैद रहने और जिल्लत भरी जिंदगी जीने की दास्तां सुनाई। किस तरह पाकिस्तान की जेल में उसे प्रताड़ित किया जा रहा था।

सुनाई पाकिस्तानी जेल में सही यातनाएं

सुनाई पाकिस्तानी जेल में सही यातनाएं

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के जेल से 18 साल बाद बिहार के सारण जिले के जलालपुर का रहने वाला सुरेंद्र अपने पिता रामानुज महतो और मां तेतला देवी के सामने आजाद होकर पहुंचा और धोखे से पाकिस्तान जाने की बात बताई। सुरेंद्र ने कहा कि आज से 18 साल पहले राजस्थान के जैसलमेर की सीमा के पास नदी के रास्ते वो पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गया था। पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश करने के बाद ना तो उसके पास पहचान पत्र था और ना ही कोई आइडेंटिटी कार्ड। जिससे पाकिस्तान पुलिस के द्वारा उसे हिंदुस्तानी खुफिया बताते हुए जेल में कैद कर लिया गया। जहां उससे जेल प्रशासन के द्वारा दिन भर खेतों में काम करवाया जाता था और तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता था।

कांप उठता है सुरेंद्र का शरीर!

कांप उठता है सुरेंद्र का शरीर!

प्रताड़ना ऐसी की आज भी सुरेंद्र का शरीर बोलने से कांप उठता है। तो जेल की दास्तां बताते हुए उसने कहा कि पाकिस्तान के उस जेल में आज भी कई हिंदुस्तानी कैद हैं। जिन पर पाकिस्तानी पुलिस के द्वारा ढेरों जुल्म किए जा रहे हैं। मैं तो खुसकिस्मत था जो पाकिस्तान की जेल से आजाद होकर अपने परिवार वालों के पास पहुंच गया। कुछ ऐसे भी हैं जो परिवार वालों को याद करते-करते ही मर गए। जेल से आजाद होने के बाद हमें इस्लामाबाद के भारतीय उच्चायुक्त भारत भूषण के पास पहचान पत्र बनाने के लिए ले जाया गया। जिसके बाद 76 मछुआरों के साथ हमें आजाद कर दिया गया।

क्या मायके से लौट आएगी पत्नी!

क्या मायके से लौट आएगी पत्नी!

पाकिस्तान की जेल से आजाद होने के बाद घर लौटा सुरेंद्र का परिवार बिल्कुल बिखर चुका था। जहां उसके मां-बाप उसकी याद में बीमार हो गए थे तो पत्नी घर छोड़कर अपने मायके चली गई थी। हालांकि मायके गई पत्नी ने अभी तक दुबारा शादी नहीं की थी। जिससे सुरेंद्र को ये उम्मीद है कि वो उसके साथ फिर घर आ जाएगी।

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