बिहार में 3000 किलोमीटर की पदयात्रा का प्रशांत किशोर ने किया ऐलान, पार्टी बनाने का दिया संकेत
नई दिल्ली, 05 मई। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ऐलान किया है कि वह 3000 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे। यह पदयात्रा पश्चिमी चंपारण स्थित गांधी आश्रम से 2 अक्टूबर को शुरू होगी। पीके ने कहा कि अगले 3-4 महीनों में वह 18000 लोगों से मुलाकात करेंगे, जिससे कि बिहार को विकास की ओर ले जाने में नए आइडिया लिए जा सके। हालांकि प्रशांत किशोर ने राजनीतिक पार्टी बनाने की बात नहीं कही है,लेकिन उन्होंने इस संभावना से इनकार भी नहीं किया है। जिस तरह से प्रशांत किशोर ने 18000 किलोमीटर की पदयात्रा का ऐलान किया है उससे साफ है कि पीके अब राजनीतिक दल के गठन की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
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नीतीश पर बोला हमला
अपनी इस पहल की जानकारी देते हुए प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला। प्रशांत किशोर ने कहा, बिहार आज 30 साल के लालू और नीतीश के राज के बाद भी देश का सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य है। विकास के कई मानकों पर बिहार आज भी देश के सबसे निचले पायदान पर है। बिहार अगर आने वाले समय में अग्रणी राज्यों की सूची में आना चाहता है तो इसके लिए नई सोच और नए प्रयास की जरूरत है।
पीके की योजना
प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले तीन दशक से बिहार में लालू-नीतीश का राज रहा है, पिछले 15 साल से नीतीश प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। दोनों के शासन में बिहार देश का सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य रहा। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि बिहार तकरीबन सभी मानकों में पिछड़ा है। बिहार को अग्रणी राज्य की श्रेणी में लाने के लिए नए विचार की जरूरत है, नए सोच की जरूरत है। मेरा लक्ष्य है कि बिहार की बेहतरी के लिए सोचने वाले लोग जो बिहार से जुड़े हैं उनके साथ मैं संपर्क करूंगा। मैंने और मेरे साथियों ने 4-5 महीनों में तकरीबन 17 हजार लोगों को चिन्हित किया है, जिनके साथ मैं अगले 3-4 महीने संपर्क करूंगा। इन लोगों के साथ मैं बिहार को आगे ले जाने पर चर्चा करूंगा। पिछले तीन दिन के अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि 90 फीसदी लोग मानते हैं कि बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक नई सोच और नए प्रयास की दरकार है।
जरूरत पड़ी तो बनाएंगे पार्टी
प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह राजनीतिक दल का गठन करेंगे, लेकिन यह अगस्त-सितंबर तक लोगों से मिलने के बाद तय किया जाएगा। मीडिया को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि वह गांधी आश्रम से 2 अक्टूबर को 3000 किलोमीटर की पदयात्रा की शुरुआत करेंगे। बता दें कि प्रशांत किशोर भाजपा, कांग्रेस, वाईएसआर, टीएमसी समेत कई दलों के साथ काम कर चुके हैं। 2021 में ममता बनर्जी को सत्ता में दोबारा वापस लाने में भी पीके ने अहम भूमिका निभाई थी।
पहले ही पीके ने दिए थे संकेत
इससे पहले प्रशांत किशोर ने इस बात की ओर इशारा किया था कि वह जन सूराज की शुरुआत करेंगे, जोकि बिहार से शुरू होगा। प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से कांग्रेस के संपर्क में थे और माना जा रहा था कि वह कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ सकते हैं। लेकिन कांग्रेस के साथ बात नहीं बनने के बाद प्रशांत किशोर ने 2 मई को जन सुराज को लेकर ट्वीट किया था। उन्होंने ट्वीट करके लिखा था, मेरी यह तलाश लोकतंत्र में हिस्सेदारी के लिहाज से काफी अर्थपूर्ण होगी , इसके जरिए जन सरोकारों को हित में रखते हुए नई नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। मैं असल मास्टर जनता के पास जाऊंगा, जिससे कि मुद्दों को बेहतर समझ सकूं, जन सुराज की शुरुआत बिहार से।
रणनीतिकार का काम नहीं करना चाहते पीके
प्रशांत किशोर ने एनडीटीवी में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं जो कर रहा हूं उसे ही आगे जारी नहीं रखना चाहता हूं, मैं चुनावी रणनीति बनाने के काम को छोड़ दूंगा। मैं इसे जारी नहीं रखना चाहता हूं, यह मैंने काफी कर लिया है,मेरे लिए जिंदगी में अब थोड़ा आराम लेने का समय है। गौर करने वाली बात है कि चार साल पहले प्रशांत किशोर ने जनता दल का हाथ थामा था, लेकिन 16 महीने के बाद ही उन्होंने नीतीश कुमार से अपने रास्ते अलग कर लिए थे। इसके बाद वह कांग्रेस के साथ संपर्क थे, कांग्रेस की ओर से प्रशांत किशोर को ईजीएम में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे पीके ने ठुकरा दिया था।












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