Bihar Politics: ये लोग कलम वाले नहीं,कट्टा वाले हैं, प्रशांत किशोर ने तेजस्वी पर किया तीखा हमला, क्यों कहा ऐसा
Bihar Politics: बिहार की सियासत में बयानबाज़ी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। हाल ही में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा दिए गए 'सूत्र' वाले बयान पर जन सुराज अभियान के संयोजक प्रशांत किशोर ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने न सिर्फ तेजस्वी यादव की भाषा को "अशोभनीय" करार दिया, बल्कि उनके राजनीतिक संस्कारों पर भी सीधा सवाल खड़ा कर दिया।
प्रशांत किशोर ने कहा कि "तेजस्वी यादव जैसी भाषा का प्रयोग वही लोग करते हैं जिनका राजनीति से कोई वैचारिक रिश्ता नहीं होता। इनका रिश्ता सत्ता से है, समाज से नहीं। ये लोग कलम वाले नहीं, कट्टा वाले हैं।" पीके यहीं नहीं रुके। उन्होंने बिहार की मौजूदा कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार "अचेत अवस्था" में हैं और उनके करीबी नेता और अधिकारी राज्य को लूटने में लगे हुए हैं।

CM अचेत अवस्था में हैं- PK का सीधा हमला
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि नीतीश सरकार के पास अब न तो इच्छाशक्ति बची है और न ही नैतिक अधिकार कि वो जनता के हित में काम कर सके। उन्होंने कहा कि आज बिहार में आम आदमी असुरक्षित है, पुलिस पंगु है और सियासी नेतृत्व पूरी तरह भ्रमित। मुख्यमंत्री खुद जनता से कट चुके हैं।
तेजस्वी की राजनीति पर सवाल
तेजस्वी यादव को घेरते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जो व्यक्ति खुद कभी स्थायी विचारधारा न रख सका हो, वह बिहार की दिशा तय करने का दावा कैसे कर सकता है। "तेजस्वी यादव की राजनीति सिर्फ जातिवाद और परिवारवाद की धुरी पर घूमती है। उन्हें बिहार की असली समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है।"
जनता को चेताया
प्रशांत किशोर ने बिहार की जनता से अपील करते हुए कहा कि वो अब नेताओं की भाषा और व्यवहार से ही उनके इरादे को पहचानें। "जो नेता सार्वजनिक मंच से गाली जैसी भाषा का इस्तेमाल करता है, उससे आप संवेदनशील शासन की उम्मीद नहीं कर सकते।"
बिहार में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी जंग तीखी होती जा रही है। लेकिन जब भाषा का स्तर इतना गिर जाए कि बहस मुद्दों से हटकर कटाक्ष और कट्टरता पर पहुंच जाए, तब सवाल सिर्फ एक नहीं, कई खड़े होते हैं, क्या यही नए बिहार की राजनीति है?












Click it and Unblock the Notifications