Bihar News: बिहार में 'मृत' किसानों को सम्मान निधि! भोजपुर में PM किसान योजना में बड़ा घोटाला उजागर
Bihar News: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana), जिसका उद्देश्य देश के अन्नदाताओं को आर्थिक संबल प्रदान करना है, बिहार के भोजपुर जिले में बड़े फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ती दिख रही है. यहां वर्षों पहले दिवंगत हो चुके किसानों के बैंक खातों में भी अभी तक सम्मान निधि की राशि भेजी जा रही है, जिससे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
यह चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब भोजपुर के एक मृतक किसान गौतम सिंह के बेटे ने ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी की. गौतम सिंह का निधन 9 साल पहले हो चुका है, लेकिन उनके नाम पर पीएम किसान सम्मान निधि की राशि लगातार निकल रही थी. उनके बेटे रूद्र प्रताप सिंह को इस अनियमितता का पता ई-केवाईसी के दौरान चला.

कैसे हुआ खुलासा?
पीएम किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को हर साल 6 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता उनके बैंक खाते में भेजी जाती है. भोजपुर जिले में डेढ़ लाख से ज़्यादा किसानों को इस योजना का लाभ मिल रह है। अब सामने आई गड़बड़ियों ने योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है. गौतम सिंह के मामले ने तो पूरे सिस्टम को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है.
रूद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु को लगभग एक दशक हो चुका है, फिर भी उनके खाते में योजना की रकम आती रही. यह जानकारी मिलते ही उन्होंने तत्काल इसकी शिकायत की. सूत्रों के अनुसार, सिर्फ गौतम सिंह ही नहीं, बल्कि बड़हरा प्रखंड के कई अन्य गांवों में भी ऐसे ही मामले सामने आ रहे हैं, जहां मृत व्यक्तियों के नाम पर सम्मान निधि का पैसा निकाला जा रहा है.
कृषि विभाग की सफाई और जांच का आश्वासन
मामला उजागर होने के बाद बड़हरा कृषि प्रखंड पदाधिकारी कन्हैया कुमार सिंह ने मामले में संज्ञान लेते हुए जांच की बात कही है, वहीं दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी. ग्रामीणों ने कहा कि यह घटना सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करती है.
सवाल उठता है कि कैसे वर्षों से मृत पड़े किसानों के नाम पर सरकारी खजाने से पैसा निकाला जा रहा था और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी? क्या यह केवल एक प्रशासनिक चूक है या इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट सक्रिय है? अब सबकी निगाहें कृषि विभाग द्वारा की जाने वाली जांच पर टिकी हैं.
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह जांच कितने और मृत किसानों के नाम पर हो रहे इस 'खुले लूट' का पर्दाफाश करती है और इस फर्जीवाड़े में शामिल दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है. यह घटना सरकार के सामने पीएम किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती पेश करती है.












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