लालू के बेटों में पड़ी फूट? तेजप्रताप ने किया ट्वीट, 'सबकुछ छोड़ चला जाऊंगा द्वारिका'

पटना। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव का राजनीति से मोह भंग हो गया है। उन्होंने इसके संकेत अपने ट्वीट से दिए हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि मेरा सोचना है कि मैं अर्जुन को हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठाऊं और खुद द्वारका चला जाऊं। अब कुछेक "चुग्लों" को कष्ट है कि कहीं मैं किंग मेकर न कहलाऊं। तेजप्रताप के इस ट्वीट को देखकर लग रहा है कि लालू प्रसाद यादव के कुनबे में आखिरकार आग लग ही गई है। लालू-राबड़ी के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने आज खुलकर मोर्चा खोल दिया। तेजप्रताप ने कहा कि उन्होंने तेजस्वी को कुर्सी सौंप कर बलिदान दे दिया। लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ अपमान मिल रहा है। आरजेडी असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बनता जा रहा है और कोई सही बात सुनने वाला नहीं है। व्यथित तेजप्रताप अब राजनीति से सन्यास लेना चाह रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये ट्वीट नहीं बल्कि दोनों भाइयों के बीच पड़ी फूट है।

द्वारका चले जाएंगे तेजप्रताप

द्वारका चले जाएंगे तेजप्रताप

लालू के कुनबे में लगी आग की भनक तेजप्रताप यादव के ट्वीट से मिली। दरअसल, आज दिन के लगभग 11.25 बजे सुबह तेजप्रताप यादव का ट्वीट आया। तेजप्रताप ने लिखा "मैं अर्जुन को हस्तिनापुर सौंप कर द्वारा चला जाना चाहता हूं, लेकिन फिर से चुगली करने वालों को परेशानी होगी मैं किंगमेकर नहीं कहलाऊं।" तेजप्रताप के ट्वीट से साफ हो गया था कि वो नाराज हैं। नाराजगी की वजह जानने मीडिया की टोली उनके घर पहुंची। इसके बाद तेजप्रताप ने अपने खास मीडियाकर्मियों से दिल की बात की। तभी उनका दर्द दुनिया के सामने आया। लालू-राबड़ी के बड़े बेटे ने ताबड़तोड़ विस्फोट किये। इससे लालू का कुनबा हिल गया है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि राजद में असामाजिक लोग भरे जा रहे हैं। भाई-भाई को लड़वाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी में ऐसे नेताओं की तादाद बढ़ती जा रही है जो लालू-राबड़ी के साथ साथ तेजप्रताप-तेजस्वी और मीसा भारती का नाम बेच रहे हैं। ऐसे नेता पार्टी को डूबाने में लगे हैं।

बतौर तेजप्रताप, नहीं रह गई तवज्जो

बतौर तेजप्रताप, नहीं रह गई तवज्जो

तेजप्रताप यादव ने कहा कि पार्टी में उनकी कोई नहीं सुनता। वे राजद के किसी नेता को काम के लिए फोन करते हैं तो रिस्पॉन्स ही नहीं दिया जाता। कहा जाता है ऊपर से दबाब है, हम कुछ नहीं कर सकते। राजेंद्र प्रसाद नाम के एक नेता को पार्टी में सम्मान दिलाने के लिए उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे से कहा लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। तेजस्वी से बात करने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ। फिर लालू प्रसाद और राबड़ी देवी से बात की तो उनकी बात सुनी गई।

एश्वर्या से शेयर की दिक्कत

एश्वर्या से शेयर की दिक्कत

तेजप्रताप यादव ने कहा कि उन्होंने अपने मन की पीड़ा अपनी पत्नी एश्वर्या राय से शेयर की। सारी बात सुनकर उनकी पत्नी भी शॉक्ड हो गईं। परिवार में नई आई एश्वर्या राय को ये पता नहीं था कि घर के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की इस कदर उपेक्षा की जा रही है। तेजप्रताप ने कहा कि तमाम अपमान और उपेक्षा के बावजूद तेजस्वी यादव उनके कलेजे का टुकडा है। उन्होंने ही गांधी मैदान में तेजस्वी को राजद का युवराज बनाया था। तेजस्वी के लिए वे अभी भी कुछ भी करने को तैयार हैं। जरुरत पड़ी तो तेजस्वी के हाथों में हस्तिनापुर सौंप कर वे खुद द्वारका चले जाएंगे। तेजप्रताप ने कहा कि उन्हें लालू-राबड़ी से भी कोई शिकायत नहीं है।

फूट के पीछे कौन ?

फूट के पीछे कौन ?

लालू प्रसाद के कुनबे में आग की आशंका लंबे समय से जताई जा रही थी। चर्चा ये थी कि तेजस्वी को वारिस बनाने से ना तेजप्रताप खुश हैं ना मीसा भारती। लेकिन लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने दोनों को मनाया। लालू खुद इसका ख्याल रख रहे थे कि तेजप्रताप खुद को उपेक्षित नहीं महसूस करें। लेकिन चारा घोटाले मामले में लालू के जेल जाने के बाद पार्टी पूरी तरह से तेजस्वी के हाथों में चली गयी. तेजप्रताप के जिम्मे छात्र राजद का काम सौंपा गया था. लेकिन पार्टी में छात्र राजद को कोई तवज्जो ही नहीं दी जा रही थी. पार्टी के दूसरे फैसलों में भी तेजप्रताप को पूछा नहीं जा रहा था. ऐसे में अंदर ही अंदर सुलग रही चिंगारी अब भड़क उठी है. इसे मैनेज करना बीमार चल रहे लालू प्रसाद यादव के लिए आसान नहीं होगा।

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