Patna Metro पर 'लाल धब्बों' का साया, 7 दिन के अंदर किसने फिकी कर दी ड्रीम प्रोजेक्ट की चमक? अब जाकर खुला राज
Patna Metro: पटना का नया गर्व, बिहार की पहली मेट्रो, सिर्फ कुछ ही दिनों में विवादों में फंस गई है। 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटन के बाद 7 अक्टूबर से जनता के लिए खुली इस 4.2 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन को अब लोग गंदगी और असभ्य व्यवहार के लिए याद कर रहे हैं।
लोगों की असभ्य हरकतों ने इसे जल्द ही गंदगी और दागों से भर दिया। गुटखा और पान की पीक के लाल दागों ने शहर की नई उपलब्धि को एक अनचाही चुनौती दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि प्लेटफॉर्म के कोने, रेलिंग, सीढ़ियां और ट्रैक तक दागों से भरे हुए हैं। यह घटना लोगों की सभ्यता और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रही है।

गुटखा और पान के दाग से बदला मेट्रो का नज़ारा
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में देखा जा सकता है कि मेट्रो स्टेशन, प्लेटफॉर्म, रेलिंग, सीढ़ियां और यहां तक कि ट्रैक भी लाल गुटखा के दागों से भरे हुए हैं। वीडियो में एक शख्स कहते नजर आते हैं, "मेट्रो शुरू हुए अभी 2-3 दिन हुए हैं और 'गुटखा गैंग' ने स्टेशन और प्लेटफॉर्म को दागों से भर दिया है। बिहार के लोगों, शर्म करनी चाहिए। सरकार कितनी मेहनत कर रही है मेट्रो बनाने में, और आप इसे गंदा कर रहे हैं।" इंस्टाग्राम पर वीडियो के कैप्शन में लिखा गया था, "पटना मेट्रो में आ गए हैं गुटका वाले।"
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ब्लॉगर उत्तम ने बताई असलियत?
इस वीडियो के वायरल होने के बाद अब बिहार के एक ब्लॉगर उत्तम झा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट explore_with_uttam पर एक वीडियो ब्लॉग शेयर किया है। उन्होंने कहा कि मेट्रो को लेकर वायरल हो रहे ये वीडियो सिर्फ व्यूज और फॉलोअर्स के लिए बन रहे हैं। उत्तम कहते हैं, "पटना मेट्रो आज पूरे देश में ट्रेंड कर रहा है, लेकिन कोई पॉजिटिव चीज़ की वजह से नहीं बल्कि नकारात्मक वजह से। लोग स्टेशन को गंदा कर रहे हैं, थूक रहे हैं। असलियत यह है कि मेट्रो बनते समय मजदूर पान या गुटखा खा रहे थे और गंदगी फैल रही थी। अब उद्घाटन के बाद छोटे से छोटे नियम भी सख्ती से लागू हो रहे हैं। यहां चिविंग गम खाने वाले को भी मेट्रो में एंटर नहीं करने दिया जा रहा।"
उत्तम ने यह भी कहा कि कुछ कंटेंट क्रिएटर्स सिर्फ व्यूज पाने के लिए अपने ही राज्य और शहर की छवि खराब कर रहे हैं। उन्होंने लोगों को यह समझाने की कोशिश की कि बिहार के लोग ही पान या गुटखा खाते हैं, यह गलत धारणा है। बाहर भी लोग ऐसे ही खाते और थूकते हैं, लेकिन इसे लोगों की नजर में नहीं लाया जाता।
मेट्रो की सफाई और नियमों की कड़ी
इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि मेट्रो जैसे बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स में जनता की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है जितनी कि सरकार की मेहनत। मेट्रो के अधिकारी अब हर स्टेशन और प्लेटफॉर्म की सफाई और निगरानी पर खास ध्यान दे रहे हैं। छोटे से छोटे नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि शहर का नया गर्व लंबे समय तक चमकता रहे।
पटना मेट्रो सिर्फ एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि शहर की पहचान बन चुकी है। इसे गंदा करना और गलत छवि फैलाना न केवल असभ्य है, बल्कि शहरवासियों की मेहनत और गर्व को भी ठेस पहुंचाता है।
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