हाईकोर्ट जज का कमाल, एक दिन में 390 लोगों को जमानत, फैसले से पहले केवल तीन सवाल
अदालतों में किसी मामले की सुनवाई कब होगी? मुवक्किलों के लिए बड़ा सवाल होता है। हालांकि, पटना हाईकोर्ट में एक जज ऐसे भी हैं, जिन्होंने सुबह सात बजे से अदालत में सुनवाई की और कुल 390 लोगों को जमानत दी।

Patna High Court में जस्टिस सुधीर सिंह की बेंच में शनिवार, 29 अप्रैल को जमानत के मामलों पर दनादन आदेश पारित किए। 457 मामलों की सुनवाई होनी थी। पहले केवल 200 केस लिस्ट में थे, लेकिन उन्होंने चीफ जस्टिस से फोन कर 300 और मामलों को लिस्ट करने की अपील की।
एक साथ 390 जजों को जमानत देने वाले जस्टिस
जस्टिस सुधीर की अपील पर मास्टर ऑफ रोस्टर यानी चीफ जस्टिस ने 257 और मामलों को उनकी कोर्ट में लिस्ट किया। वकील बताते हैं कि आम तौर पर केवल 100 मामले ही होते हैं, लेकिन जस्टिस सुधीर ने दनादन 390 ऐसे लोगों को जमानत दी, जो कई महीनों से जेल में बंद हैं।
बेल ग्रांटेड कहने में लगने वाला टाइम कैसे बचाया
पटना हाईकोर्ट के वकील देव प्रकाश सिंह के अनुसार, शनिवार को ऐतिहासिक घटना हुई। कोर्ट रूम में वकीलों का मेला लगा था। उन्होंने अपने कानूनी अनुभव शेयर करते हुए कहा कि एक जमानत देने में जस्टिस सुधीर को चंद सेकेंड लग रहे थे। बेल ग्रांटेड कहने में भी समय लगने के कारण केवल डन यानी हो गया शब्द इस्तेमाल किया गया।
200 मामलों को सूचीबद्ध किया गया, सुबह सात बजे कोर्ट पहुंचे
पांच-छह घंटों में कुल 390 लोगों को जमानत देने वाले जस्टिस सुधीर ने शनिवार, 29 अप्रैल को सुबह सात बजे ही कोर्ट पहुंच गए। तीन सवालों के जवाब पर बेल दी गई। पटना हाईकोर्ट में इस ऐतिहासिक घटना के साक्षी रहे वकील देव प्रकाश सिंह ने बताया शुक्रवार शाम को कॉज लिस्ट तैयार होने के बाद जस्टिस सुधीर की कोर्ट में जमानत के 200 मामलों को सूचीबद्ध किया गया।
खुद जस्टिस सुधीर ने बताया, रात दो बजे तक पढ़े
हालांकि, उन्होंने चीफ जस्टिस से विशेष अनुरोध किया जिसके बाद उनके हिस्से में टोटल 457 केस आए। मामलों का निबटारा करने का संकल्प ले चुके जस्टिस सुधीर ने दो बजे रात तक मामलों का अध्ययन किया। अदालत में मौजूद वकील ने बताया, खुद जज ने इस खास तैयारी की जानकारी कोर्ट में दी।
किन तीन सवालो पर मिली बेल
बिहार में शराब के मामलों में केवल तीन सवालों के जवाब पर जमानत देने वाले जस्टिस सुधीर ने वकीलों से पूछा-
- कितने लीटर शराब बरामद हुई?
- बरामदगी किस लोकेशन से हुई?
- मुवक्किल या आरोपी का आपराधिक इतिहास है?
मुचलका भरने पर जमानत मिलेगी
इन सवालों के आधार पर बेल देने वाले वकील बताते हैं कि पटना हाईकोर्ट में तालियां बजाकर जस्टिस सुधीर का अभिनंदन किया गया। सात-आठ महीनों से सेल में बंद आरोपियों और उनके परिजनों ने जमकर खुशियां मनाईं। हफ्तेभर के अंदर आदेश की प्रति जारी होने और मुचलके भरने के बाद लोगों को रिहा किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के आलोक में पटना हाईकोर्ट के जज
ऐसा कैसे हुआ? इस पर जस्टिस सुधीर ने सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत- 'बेल नॉट जेल' और इन ब्लॉक तरीके से केस से निपटने की अपील की है। जस्टिस सुधीर ने इसका पालन करते हुए कमाल के फैसले लिए। इसका एक और कारण एक तरह के मामलों की स्क्रूटनी कर उस पर निर्णय लिया।
पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का खास फैसला
अभूतपूर्व घटना के बारे में वकील देव प्रकाश के अनुसार जस्टिस सुधीर आम तौर पर डिविजन बेंच में मामलों की सुनवाई करते हैं, लेकिन चीफ जस्टिस ने ऐसा प्रावधान किया है कि एक जज की अनुपस्थिति पर जमानत के मामलों की सुनवाई की जाए।
खंडपीठ के बदले एकल पीठ में कमाल हुआ
जस्टिस सुधीर के बारे में पटना हाईकोर्ट की बेवसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, 29 अप्रैल को जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस चंद्र प्रकाश सिंह की पीठ में कई मामलों को सुना जाना था। हालांकि, उन्होंने एकल पीठ में बेल मामलों का कमाल के तरीके से निस्तारण किया।
कोर्ट से जमानत के लिए 6-7 महीनों का इंतजार
पटना हाईकोर्ट में सुबह 7 बजे से सुनवाई शुरू होने पर वकीलों का कहना है कि केस के दवाब में आम तौर पर 6-7 महीनों बाद बेल की याचिका लिस्ट होती है, जो बेहद चिंताजनक है। ऐसे में समस्या के समाधान के लिए कुछ अलग करना ही होगा। खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी न्याय में लगने वाले समय के मामले के समाधान की बात कह चुकी हैं।
जस्टिस सुधीर पटना हाईकोर्ट में 2015 में नियुक्त हुए। 2016 में स्थायी न्यायाधीश बने जस्टिस सुधीर एकीकृत बिहार के रांची में पढ़े हैं। 1991 में वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद बार काउंसिल ज्वाइन करने वाले जस्टिस सुधीर केंद्र सरकार के वकील रह चुके हैं।
रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) के वकील के रूप में भी पैरवी कर चुके जस्टिस सुधीर वकील के रूप में मुख्य रूप से आपराधिक और रिट मामलों में अनुभव रखते हैं। कानूनी दिग्गजों के परिवार से आने वाले जस्टिस सुधीर के परदादा स्वर्गीय नंद किशोर प्रसाद सिंह जिला न्यायालय छपरा में वकालत करते थे।
उनके दादा स्वर्गीय बलदेव प्रसाद सिंह पटना हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते थे। जस्टिस सुधीर के पिता न्यायमूर्ति एनपी सिंह, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं। जस्टिस एनपी सिंह कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अध्यक्ष भी रहे।
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