पैराडाइज पेपर्स में शामिल हैं बिहार वाले सांसद, 250 रुपए से बना लिए 5000 करोड़
उन्हें देश में चौकीदार सिस्टम खत्म करने का भी श्रेय दिया जाता है। फिलहाल उनकी कंपनी में 70,000 से ज्यादा गार्ड्स काम करते हैं। तो आइए जानते हैं राज्य सभा सांसद आरके सिन्हा के ढाई सौ से 5,000 करोड़ तक के सफर तय करने के बारे में कुछ खास बातें...
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पटना। पैराडाइज पेपर लीक मामले में बिहार के सांसद का नाम सामने आया है। जिसके बाद उनकी भी चर्चा बड़े जोरशोर पर होने लगी है क्योंकि उनकी सफलता की कहानी में तब और आज जमीन-आसमान का फर्क नजर आ रहा है। कभी 230 रुपए पर महीने की नौकरी करने वाले रविंद्र किशोर सिन्हा आज 5,000 करोड़ से ज्यादा के टर्न ओवर करने वालों में शामिल हैं। 2014 में उनकी इस कंपनी SIS का टर्नओवर 3200 करोड़ रुपए था जो 2017 में बढ़कर 5,000 करोड़ से ज्यादा हो गया है। उन्हें देश में चौकीदार सिस्टम खत्म करने का भी श्रेय दिया जाता है। फिलहाल उनकी कंपनी में 70,000 से ज्यादा गार्ड्स काम करते हैं। तो आइए जानते हैं राज्य सभा सांसद आरके सिन्हा के ढाई सौ से 5,000 करोड़ तक के सफर तय करने के बारे में कुछ खास बातें...

250 रुपए की नौकरी करते थे कभी
सबसे पहले आपको बता दें कि रविंद्र किशोर सिन्हा बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म एक गरीब परिवार में 22 सितंबर 1951 में हुआ था। उनके सात भाई-बहन थे और मिडिल क्लास परिवार के रहने वाले थे। पढ़ाई-लिखाई के बाद उन्होंने पॉलिटिकल साइंस और लॉ में ग्रेजुएशन किया था। जिसके बाद वो 20 साल की उम्र में 1971 में राजधानी पटना से प्रकाशित होने वाली एक दैनिक अखबार 'The Searchlight' में ट्रेनी रिपोर्टर की नौकरी शुरू कि, उस वक्त उनकी सैलरी 230 महीना थी। नौकरी शुरू करने के कुछ ही महीनों बाद 1971 में जब बांग्लादेश की आजादी को लेकर भारत पाकिस्तान के बीच विवाद चल रहा था तो सिन्हा ने बॉर्डर पर अपनी रिपोर्टिंग का अभिनय दिखाया था। रिपोर्टिंग करने के बाद जब वो लौटे तो जयप्रकाश नारायण के विचारों से इंस्पायर हो गए और उनके आंदोलन से जुड़ गए, जिसके बाद देश में इमरजेंसी लग गई। हालांकि उस वक्त सरकार के दबाव में मीडिया थी और उन्हें 1974 में 1 महीने की एडवांस सैलरी देने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया था।

सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेस सर्विस बनाया जरिया
250 रुपए लेकर नौकरी से बेदखल हुए सिन्हा आगे की रणनीति तय कर रहे थे। तभी उन्हें याद आया कि भारत पाकिस्तान वॉर के दौरान उनकी दोस्ती कुछ फौजियों से हुई थी। उसके बाद उन्होंने अपने फौजी मित्र से मिलकर अपनी समस्या बताई, जिसके बाद कुछ फौजी मित्रों ने उनकी हेल्प की और उन्हें सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेस सर्विस चलाने की सलाह दी। जिसके बाद सिन्हा ने इस पर विचार करना शुरू कर दिया। इसी दौरान उनके एक दोस्त जो कंस्ट्रक्शन बिजनेस करता था उसे अपने प्रोजेक्ट साइड पर सिक्योरिटी के लिए सेना के रिटायर्ड जवानों की जरूरत थी। जिसके बाद उन्होंने अपने दोस्त से कहा कि वो कुछ फौजी को जानते है और तुम्हारा काम हो जाएगा। फिर अपने सैनिक दोस्तों की सलाह पर उन्होंने पटना में एक छोटा सा गैरेज लीज पर लिया और एक सिक्योरिटी एजेंसी की शुरुआत की।

(SIS) इंडिया प्रा. लि. के मालिक
1974 में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) इंडिया प्रा. लि. नाम की कंपनी की शुरुआत की गई। उस वक्त वो 23 साल के थे। कंपनी की शुरुआत के दौरान 14 रिटायर्ड जवानों के साथ अपना काम शुरू किया था। इसी दौरान उन्हें 1974 में रामगढ़ की एक फैक्ट्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली, जिसमें उन्होंने एक ग्यारह गार्ड को तैनात किए। उस वक्त गार्ड्स को 400 प्रति महीना वेतन दिया जाता था। मेहनत के बल पर उन्होंने 1 साल के बाद अपनी कंपनी में गार्ड्स की संख्या 14 से बढ़ाते हुए 300 कर लिया और इसका टर्न ओवर एक लाख रुपय पहुंच गया। इसी तरह कंपनी में लगातार बढ़ोतरी होती गई और साल 2014 के मुताबिक इस कंपनी का टर्न ओवर 3200 करोड़ रुपए था जो अब 2017 में बढ़कर 5,000 करोड़ से ज्यादा हो गया है। अब इस कंपनी में 70 हजार से ज्यादा गार्ड काम करते हैं।

paradise Papers : काली कमाई का लगा है आरोप
आपको बता दें की आज सिंहा की हैसियत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 2008 से इनकी कंपनी ने अपने से 7 गुना बड़ी कंपनी ऑस्ट्रेलिया की सिक्योरिटी एजेंसी Chubb Security को टेकओवर किया है। SIS ग्रुप एंटरप्राइजेज की इंडिया के 540 जिलों में 104 ब्रांच है। देश में इसके 14 जबकि ऑस्ट्रेलिया में 8 ऑफिस हैं। इंडिया में ये 11 और ऑस्ट्रेलिया में 3 शहरों में ट्रेनिंग भी देती है। दुनिया की 300 कॉर्पोरेट कंपनियां इसकी कस्टमर हैं।












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