बिहार की राजनीति में बाबा बागेश्वर करेंगे 'चमत्कार'? किस राजनीतिक पार्टी को मिलेगा लाभ? किसकी जीत पक्की!
Pandit Dhirendra Shastri News: बिहार की राजनीति का मिजाज देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा बहुत अलग है। यहां चाय की टपरी पर बैठे हुए लोग चाय की चुस्की लेते हुए राजनीति की मीठी- मीठी बातें करते हैं। यहां चुनाव से साल भर पहले से ही लोग राजनीतिक रंग में रंग जाते हैं। ऐसे में बिहार का विधानसभा चुनाव 2025 में होने वाला है तो ये लाजमी है कि चुनाव का चर्चा जोर-शोर से होगा।
बिहार में जैसे ही पंडित धीरेंद्र शास्त्री की एंट्री हुई राजनीतिक भूचाल आ गया। लेकिन जब बाबा बागेश्वर खुद बोलते हैं कि हम तो बस हिंदुओं को जोड़ना चाहते हैं। हमें राजनीतिक से से न जोड़ा जाए। मुझे राजनीतिक से कोई मतलब नहीं है। फिर उनके एंट्री पर इतना बवाल क्यों मच जाता है? आज हम आपको बताते है बिहार में बाबा बागेश्वर के आने से राजद पार्टी क्यों परेशान हो जाती है? क्या उसे हार का डर सताने लगता है? क्या बाबा के आने से बीजेपी को अदृश्य चमत्कारी राजनीतिक लाभ मिलता है?

बिहार की जातिगत आधारीत राजनीति
बिहार में लंबे अरसे से जातिगत आधारीत राजनीति होती है इस बात को इनकार नहीं किया जा सकता है। MY का अधिकांश वोट अभी भी सीधे तौर पर राजद के खाते में जाता है। नीतीश कुमार लव-कुश की राजनीति करते हैं। बीजेपी को अभी भी नीतीश कुमार के सहारे चलना पड़ता है। किसी पार्टी को स्पष्ट तौर पर बहुमत नहीं मिल पाता कि वो अकेले दम पर सरकार बना सके। सभी पार्टियां अपने पास उस कास्ट के बड़े नेता को रखना चाहती है ताकि लोगों को आकर्षित कर पाएं।
मंडल- कमंडल की राजनीति
नब्बे के दशक के मंडल- कमंडल की राजनीति को आज भी बीच-बीच में हवा देने का प्रयास किया जाता है। ताकि राजनीतिक पार्टियों को उनका पारंपरिक वोट मिल सके। ऐसे में जात-पात की राजनीतिक लड़ाई में बटे हुए बिहार में जैसे ही बागेश्वर बाबा की एंट्री होती है तेज हलचल होने लगता है। क्योंकि विपक्षी पार्टियों को इस बात से डर लगता होगा कि अगर जात-पात की लड़ाई सहीं में धर्म की राजनीतिक लड़ाई बन गई तो इससे बीजेपी को लाभ मिल सकता है।
बाबा बागेश्वर का हिंदू जोड़ो अभियान से किस पार्टी को लाभ?
अगर आप बीजेपी का इतिहास देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि राम मंदिर आंदोलन से सबसे ज्यादा अगर किसी पार्टी को राजनीतिक लाभ मिला तो वो है बीजेपी पार्टी। 2 सीट से आज सत्ता के शिखर पर बैठने वाली बीजेपी पार्टी चुनाव में हिंदुत्व का मुद्दा हमेशा से उठाती रही है। इसलिए भी बाबा बागेश्वर का हिंदू जोड़ो अभियान बीजेपी को खूब शुट करता है। जबकि राजद पार्टी मंडल- कमंडल की राजनीति को हवा देती है। क्योंकि उनको MY का अच्छा वोट प्रतिशत मिलता है। ऐसे में विपक्षी पार्टी का सोचना लाजमी है कि हिंदुत्व का मुद्दा सहीं में बिहार में चल पड़ा तो बीजेपी को लाभ मिल सकता है।
अभी हाल ही में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बिहार के गोपालगंज में हिंदू राष्ट्र की मांग जैसे हि दोहराई रोजनीतिक विवाद शुरु हो गया। आरजेडी ने उन पर वोटबैंक की राजनीति का आरोप लगा दिया तो बीजेपी ने आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा कि आरजेडी पार्टी मुस्लिम वोट पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
आरजेडी विधायक प्रेम शंकर प्रसाद ने कहा कि चुनाव के पहले कुछ लोग ऐसे कार्यक्रमों से फायदा उठाना चाहते हैं। लेकिन अयोध्या का नतीजा सबने देखा है। अब इसका कोई फायदा नहीं होगा। दूसरे आरजेडी विधायक डॉ. मुकेश रौशन ने शास्त्री पर धार्मिक उन्माद फैलाने और वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आरजेडी एकता और भाईचारे के पक्ष में है। लेकिन ऐसे बाबा जातीय उन्माद फैलाते हैं।
धीरेंद्र शास्त्री इसपर कहते हैं कि वे किसी पार्टी के प्रचारक नहीं, बल्कि हिंदू धर्म के विचारक हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र की आवाज सबसे पहले बिहार से उठेगी। मुझे किसी राजनीतिक दल से जोड़कर न देखा जाए












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