ओवैसी भी लॉन्च करेंगे बिहार के मुस्लिम बहुल सीमांचल में पदयात्रा, इसका राजनीतिक मतलब जानिए
हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी बिहार में अपना जनाधार बढ़ाने के अभियान पर निकलने वाले हैं। वह सीमांचल क्षेत्र में पदयात्रा करेंगे। उनका यह कार्यक्रम सत्ताधारी महागठबंधन के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है।

असदुद्दीन ओवैसी बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन की नींद उड़ाने की तैयारी में हैं। प्रदेश में पिछले कुछ समय से पदयात्राओं का दौर चल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कभी उनके खास रहे प्रशांत किशोर भी ऐसे कार्यक्रमों में हाथ आजमा चुके हैं। अब हैदराबाद के सांसद भी पदयात्रा करने के लिए बिहार पहुंच रहे हैं। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता का मुख्य फोकस मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र है, जहां भाजपा को भी अपने लिए काफी संभावनाएं नजर आ रही हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी खुद इस क्षेत्र में पिछले साल जनसभा कर चुके हैं।

बिहार के सीमांचल क्षेत्र में पदयात्रा करेंगे ओवैसी
बिहार के सीमांचल इलाके में सत्ताधारी महागठबंधन और विपक्षी बीजेपी की जनसभाओं के बाद अब हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी मुस्लिम-बहुल इलाकों में पदयात्रा की ठान ली है। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के चीफ ओवैसी ने 18-19 मार्च को सीमांचल के मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में 'अधिकार पदयात्रा' लॉन्च करने की तैयारी की है। ओवैसी अपनी राजनीति चमकाने के लिए हैदराबाद से बिहार आ रहे हैं, लेकिन उनका यह कदम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जेडीयू और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के आरजेडी को चिंता में डाल सकता है।

पूर्णिया और किशनगंज पहुंचेंगे ओवैसी
बिहार में एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम ने बताया है कि हैदराबाद के एमपी की यह 'अधिकार पदयात्रा' पूर्णिया और किशनगंज से लॉन्च होगी। यह दोनों ही सीमांचल के महत्वपूर्ण शहर हैं। इसके तहत पार्टी चीफ पूर्णिया के बैसी-अमौर और किशनगंज के कुछ क्षेत्रों में पहुंचेंगे। पदयात्रा के दौरान पार्टी के नेता लोगों से बातचीत करेंगे और कथित तौर पर जो विभिन्न सरकारों ने सीमांचल के साथ अन्याय किया है, उन मुद्दों को उठाएंगे।

मुसलमानों के एक वर्ग पर दिखता है ओवैसी का प्रभाव
ओवैसी ने राजनीतिक तौर पर बिहार के सीमांचल क्षेत्र को टारगेट किया है तो उसकी खास वजह है। उनकी पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में यहां अपना प्रभाव दिखा चुकी है। एआईएमआईएम की मौजूदगी ने यहां सेक्युलर होने का दावा करने वाली बाकी पार्टियों की हवा खराब कर दी थी। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम को 5 सीटें मिली थीं, जो हर किसी के लिए हैरानी करने वाली बात थी। हालांकि, सीएम नीतीश कुमार के पिछले साल अगस्त में भाजपा को गच्चा देने से पहले ही ओवैसी के पांच में से चार एमएलए आरजेडी में शामिल हो चुके थे। लेकिन, फिर भी मुसलमानों के एक वर्ग में एआईएमआईएम का प्रभाव जमा हुआ नजर आ रहा है।

गोपालगंज उपचुनाव में भी काफी वोट लिए थे
पिछले साल बिहार के गोपालगंज में हुए उपचुनाव में सत्ताधारी महागठबंधन की ओर से राजद प्रत्याशी मोहन गुप्ता बीजेपी उम्मीदवार कुसुम देवी से सिर्फ 1,794 वोटों से हार गए। इस सीट पर ओवैसी की पार्टी के अब्दुल सलाम को 12,212 वोट मिले थे। पार्टी की इस हार से तेजस्वी यादव ऐसे तिलमिलाए कि एआईएमआईएम को बीजेपी की 'बी' टीम कह दिया। जबकि, 2020 में चुनाव के बाद जब एआईएमआईएम के पांच विधायक आरजेडी में शामिल नहीं हुए थे, तब भी स्पीकर के चुनाव में पार्टी ने आरजेडी की अगुवाई वाले विपक्ष को समर्थन दिया था।

महागठबंधन की बढ़ सकती है चुनौती
सीमांचल में पदयात्रा करने से ओवैसी ने अगर मुसलमानों के बीच खासकर युवा मतदाताओं में अपना दबदबा बढ़ाया तो निश्चित तौर पर सत्ताधारी महागठबंधन के लिए परेशानियां बढ़ सकती हैं। मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ ढीली नहीं पड़े, इसपर सत्ताधारी महागठबंधन का पूरा जोर रहा है। फरवरी में ही उसने पूर्णिया में एक रैली भी की है। जबकि, बीजेपी के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सितंबर में ही वहां रैली कर चुके हैं। ऐसा दावा किया जाता है कि पिछले चुनाव में एआईएमआई की मौजूदगी के चलते बीजेपी को क्षेत्र में दो सीटें आसानी से जीतने में मदद मिली थी।
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सीमांचल में राजनीतिक समीकरण बदल सकता है
बिहार के सीमांचल क्षेत्र में लोकसभा की चार और विधानसभा की 24 सीटें है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू को दो और बीजेपी और कांग्रेस को एक-एक सीट मिली थी। 2020 में एआईएमआईएम 20 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 5 सीटों के अलावा 5.23 लाख से ज्यादा वोट हासिल करने में सफल हो गई थी। जबकि, बीजेपी 8 और जेडीयू 4 सीटें जीती थी। वहीं कांग्रेस को 5, आरजेडी-सीपीआई (एमएल) को एक-एक सीटें मिली थीं। अब जेडीयू महागठबंधन का हिस्सा हो चुकी है और बीजेपी से उसका गठबंधन टूट चुका है। ऐसे में ओवैसी की पदयात्रा सीमांचल इलाके के चुनावी समीकरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। (तस्वीरें-फाइल)












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