NDA में किस तरह होगी सीट शेयरिंग, प्रशांत किशोर ने बताया BJP-JDU समेत अन्य घटक दल कितने सीटों पर लड़ेंगे चुनाव

NDA Seat Sharing Formula 2025: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर पार्टी की सियासी ज़मीन मज़बूत करने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। वहीं बिहार की जनता से जुड़ी समस्याओं पर बेबाक अपनी बात रख रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने बिहार में रोजगार और पलायन पर भी खुलकर बात की।

वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में प्रशांत किशोर ने राज्य में औद्योगिक विकास की कमी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों के विपरीत, बिहार में स्टील, टीवी या सीमेंट का उत्पादन नहीं होता है। इस औद्योगिक शून्यता ने एक ही परिणाम दिया है।

NDA Seat Sharing Formula 2025

बिहार के युवाओं के पास अन्यत्र मजदूरी और नौकरी की तलाश के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। प्रशांत किशोर की टिप्पणियां आर्थिक ठहराव और युवा श्रमिकों के जबरन पलायन के गहरे मुद्दे पर प्रकाश डालती हैं। उन्होंने साढ़े तीन दशक से ज़्यादा समय तक बिहार में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के शासन की आलोचना की।

प्रशांत किशोर ने तर्क दिया कि नीतीश और लालू का नेतृत्व औद्योगिक विकास लाने या लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में विफल रहा है। लालू-नीतीश के शासनकाल ने केवल समाज को जीवित रहने के लिए मज़दूरी की नौकरियों पर अधिक निर्भर बनाने में सफलता पाई है।

राज्य में औद्योगिक उपस्थिति की कमी युवाओं को काम की तलाश में पलायन करने के लिए मजबूर करती है, जो अक्सर दूसरे राज्यों में मज़दूरी करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा, किशोर ने लालू और नीतीश की शासन शैली के बीच समानताएं बताते हुए कहा, "लालू और नीतीश के शासन में बहुत अंतर नहीं है।

प्रशांत किशोर ने व्यापार और उद्योग के लिए अनुकूल माहौल बनाने में असमर्थता के लिए दोनों शासनों की आलोचना की। लालू के शासन में जनता अपराधियों के हाथों पीड़ित थी, जबकि नीतीश कुमार के नेतृत्व में, भाजपा के साथ गठबंधन में, नौकरशाही बाधाएं और भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया है।

अधिकारियों को रिश्वत दिए बिना भूमि दस्तावेज और जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी बुनियादी सेवाएं प्राप्त करने में जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।किशोर का विश्लेषण बिहार में शासन की भयावह स्थिति को उजागर करता है, जहाँ भ्रष्टाचार और अकुशलता सार्वजनिक सेवा वितरण में बाधा डालती है।

यह स्थिति सरकारी अधिकारियों से निपटने में आम लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित करती है, जो उन सेवाओं के लिए रिश्वत मांगते हैं जो आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। औद्योगिक विकास की कमी और खराब शासन ने बिहार को आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के चक्र में डाल दिया है, जिससे इसके युवा अपने गृह राज्य के बाहर श्रम बाजारों में जाने को मजबूर हो रहे हैं।

बिहार में लालू-नीतीश के 35 साल के शासन की प्रशांत किशोर की आलोचना राज्य के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य की एक निराशाजनक तस्वीर पेश करती है। महत्वपूर्ण विनिर्माण उद्योगों की अनुपस्थिति ने बिहार के युवाओं को अक्सर दूसरे राज्यों में मज़दूरी करने के लिए मजबूर कर दिया है।

यह परिदृश्य भ्रष्टाचार और सार्वजनिक सेवा वितरण में अक्षमता सहित शासन संबंधी मुद्दों से और भी जटिल हो जाता है। किशोर की टिप्पणियों में बिहार की औद्योगिक नीतियों और शासन प्रथाओं की आलोचनात्मक समीक्षा की आवश्यकता है ताकि आर्थिक विकास और इसके निवासियों के लिए बेहतर जीवन स्तर का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।

प्रशांत किशोर से जब यह सवाल किया गया कि NDA में सीट शेयरिंग को लेकर काफी सस्पेंस है। भाजपा, जदयू और लोजपा (र) के अलाव अन्य घटक दल अपने हिसाब से दावेदारी कर रही है। इस प्रशांत किशोर ने कहा कि सीट शेयरिंग का फॉर्मूला साफ है। BJP 100, JDU 100 और LJPR 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, बची हुई सीटों पर एनडीए के अन्य घटक दल होंगे। इसमें एक से दो सीट ऊपर नीचे हो सकती है।

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