Muzaffarpur News: खाली ट्रक में गुप्त तहखाना और करोड़ों का गांजा, बिहार पुलिस की जांच में हैरतअंगेज़ खुलासा

Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शुक्रवार की शाम एक साधारण दिखने वाला कंटेनर ट्रक जांच के दौरान उत्पाद विभाग की टीम के लिए किसी चौंकाने वाले खुलासे में बदल गया। शुरू में यह ट्रक सामान्य लग रहा था और टीम को उम्मीद थी कि यह केवल रूटीन जांच होगी।

जैसे ही ट्रक के फर्श के नीचे बने गुप्त तहखाने का पता चला, मामला पूरी तरह बदल गया। इस तहखाने से करीब ढाई सौ किलो गांजे के पैकेट बरामद हुए, जिनकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1.25 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

Muzaffarpur Drug Bust

गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
सूचना मिली थी कि यह ट्रक सिलीगुड़ी से दिल्ली की ओर जा रहा है और इसे आगे विदेशी तस्करों को सप्लाई किया जाना था। इस सूचना के आधार पर उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। टीम ने कांटी थाना क्षेत्र के मोतिहारी मार्ग पर घेराबंदी कर ट्रक को रोका और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में ट्रक सामान्य प्रतीत हो रहा था, लेकिन जैसे ही टीम ने अंदरूनी हिस्से की जांच की, गुप्त तहखाने का पता चला। तहखाने में बड़े-बड़े पॉलीथिन बैग में भरे पैकेट मिले।

ड्राइवर और उप-चालक गिरफ्तार, नेटवर्क की तहकीकात
ट्रक में छिपे नशे का भंडाफोड़ होते ही ड्राइवर और उप-चालक के होश उड़ गए। उनकी घबराहट और सन्नाटा साफ दिखाई दे रहा था। मौके पर ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया और थाने में गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि दोनों को केवल ट्रक दिल्ली तक पहुंचाने का काम सौंपा गया था, जबकि असली "मालिक" और नेटवर्क के अन्य लोग कहीं और से ऑपरेट कर रहे थे। उत्पाद विभाग अब इस पूरे तस्करी नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने में जुट गया है।

लंबे समय से सक्रिय तस्करी नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार यह गैंग लंबे समय से बिहार के रास्ते नशे की तस्करी कर रहा था, ताकि पुलिस और एनसीबी की निगरानी से बचा जा सके। इस बार की कार्रवाई नशे के कारोबारियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने कहा, "हमने ट्रक से ढाई सौ किलो गांजा बरामद किया है और अब इस नेटवर्क के मुख्य सप्लायर तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है।"

स्थानीय लोगों के लिए फिल्मी सीन
स्थानीय लोगों के लिए यह घटना किसी फिल्मी सस्पेंस सीन से कम नहीं थी। आम दिखने वाला ट्रक, अंदर छिपा गुप्त तहखाना और करोड़ों रुपये की खेप, सब कुछ एक क्राइम थ्रिलर की कहानी जैसा प्रतीत हो रहा था। इस कार्रवाई ने स्थानीय प्रशासन की तत्परता और उत्पाद विभाग की कार्रवाई की क्षमता को भी उजागर किया है।

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