Bihar Politics: विधानसभा चुनाव को लेकर मुस्लिम नेता भी कर रहे मंथन, जानिए क्या है टिकट की दावेदारी का प्लान
Muslim Leader Bihar: मुस्लिमों को लेकर देश भर में सियासत हो रही है। लेकिन सियासत में रहनुमाई की बात होती है तो आऱोप-प्रत्यारोप शुरू हो जाता है। राजनीति में मुसलमानों की रहनुमाई के लिए अब मुस्लिम नेताओं ने मंथन शुरू किया है।
बिहार के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम नेताओं मज़बूती से टिकट की दावेदारी कर सकें, इस पर मंथन जारी है। इसी क्रम में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आरक्षण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी (मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षा के चेयरमैन) भी मुस्लिमों की वजूद की लड़ाई की ज़िम्मेदारी उठा चुके हैं।

हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने कहा कि देशभर में मुस्लिमों की तादाद के हिसाब से राजनीतिक वजूद नहीं है। मुसलमानों की सियासत में जगह ना के बराबर है। मुस्लिम समुदाय के लोग सियासी मुकाम के हक़दार हैं, उन्हें वह नहीं मिल रहा है।
इसके पीछ सबसे बड़ी वजह मुसलमानों के बीच फूट है, वह एकजुट नहीं है। कहीं फिरका परस्ती, तो कहीं जात-पात, तो कहीं बैकवर्ड फॉरवर्ड, तो कही अमीरी-गरीबी में मुसलमान बांटा जा रहा है। सभी विभागों में मुस्लिम कमज़ोर होते जा रहे हैं। 18 से 19 फीसदी आबादी के बाद भी हमलोगों के साथ बदसलूकी औऱ नाइंसाफी होती रही है। हम अपने अधिकारों से कब तक वंचित रहेंगे?
मुसलमानों को इस हालत से निकलने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, परवेज़ सिद्दीकी ने कहा अब सोने का समय नहीं है। अब समय आ गया है की बिहार के हर विधानसभा की बड़ी आबादी के बीच एक प्रतिनिधिमंडल से जवाब तलब करें। जब कोई समुदाय संकल्पित होता है तो सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक परिवर्तन निश्चित होता है।
बिहार के कई वर्गों के नेता और उनके समुदाय ने साबित किया है कि मज़बूत रहनुमाई से विकास कर सकते हैं। कुशवाहा समुदाय के नेता उपेंद्र कुशवाहा, मलहा की मुकेश सहनी, मुसहर के नेता मांझी, इस प्रकार के कई उदाहरण है। अंसार महापंचायत के नेता का कहना है कि मुसलमानों को भी चाहिए कि अपने-अपने विधानसभा में अपनी आबादी के हिसाब से रहनुमाई पर मंथन करें और विधानसभा चुनाव में दावेदारी पेश करें।












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