मल्लाह मुकेश सहनी ने जारी की वीआईपी उम्मीदवारों की सूची, नोनिया की गोलबंदी के लिए खेला पार्षद कार्ड
पटना। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) चीफ मुकेश सहनी सिमरी बख्तियारपुर से चुनाव लड़ेंगे। महागठबंधन का दामन छोड़कर एनडीए में शामिल हुए मुकेश सहनी की पार्टी के खाते में 11 सीटें आई हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुकेश सहनी ने पार्टी के 11 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। मुकेश सहनी सीट सिमरी बख्तियारपुर, अरुण कुमार झा सीट बलरामपुर, जयराज चौधरी सीट ब्रह्मपुत्र, सुमन महासेठ सीट मधुबनी, मिश्री लाल यादव सीट अलीनगर, राजीव कुमार सिंह सीट साहेबगंज, वीरेंद्र कुमार ओझा सीट बनियापुर, श्रीमती स्वर्णा सिंह सीट गौडाबौराम, रामचंद्र सहनी सीट सुगौली, मुसाफिर पासवान सीट बोचहां और लखन लाल यादव सीट बहादुरगंज से चुनावी मैदान में उतारे गए हैं। जाति को ध्यान में रखकर पार्टी ने टिकटों का बंटवारा किया है। वीआईपी ने 11 में से 5 सीटें अतिपिछड़ा, 4 सामान्य, 2 पिछड़ा एवं 1 दलित समाज के नेता को टिकट दिया है।

मुकेश सहनी खुद को सन ऑफ मल्लाह कहते हैं और निषाद समुदाय से आते हैं। करीब 14 प्रतिशत अहम वोट बैंक वाला निषाद समुदाय, मल्लाह और नोनिया दो जाति में बंटा है। मुंबई में फिल्मों के सेट निर्माण का बिजनेस करने वाले मुकेश सहनी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बिहार आए हैं। विधानसभा चुनाव के 11 उम्मीदवारों की सूची जारी करने के साथ ही मुकेश सहनी ने एक विधान परिषद सीट के लिए 26 संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी कर दी है। भाजपा ने वीआईपी से कहा है कि अगर बिहार में पार्टी की सरकार बनी तो उसे एक विधान पार्षद सीट मिलेगी। जिन 26 लोगों के नाम पार्षद के लिए संभावित उम्मीदवार की सूची में हैं, वे सभी नोनिया जाति से हैं। मुकेश सहनी ने कहा कि एक पार्षद सीट पर नोनिया उम्मीदवार को उतारा जाएगा।
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एनडीए में आई दो पार्टियां वीआईपी और हम को लेकर भाजपा और जदयू के बीच समझौता यह हुआ कि जदयू के खाते की सीटें हम को दी जाएंगी वहीं भाजपा अपने खाते से वीआईपी को सीट देगी। इस तरह से जदयू ने हम को सात सीटें दी तो भाजपा ने वीआईपी को 11 सीटें दे दी। मुकेश सहनी उम्मीदवारों की सूची जारी कर जिताऊ कैंडिडेट देने का दावा कर रहे हैं। साथ ही पार्षद सीट के लिए नोनिया जाति के 26 लोगों की सूची जारी कर उन्होंने निषाद में आने वाले इस अतिपिछड़ी जाति की गोलबंदी के लिए कार्ड खेला है। महागठबंधन में रहते हुए सहनी ने खुद को उप मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कर दिया था। भाजपा के साथ मिलकर 2015 में विधानसभा चुनाव सहनी लड़ चुके हैं। उन्होंने तब दावा किया था कि भाजपा उम्मीदवारों की जीत में मल्लाह वोटरों का निर्णायक योगदान रहा। मुकेश सहनी को इस बात का दर्द रहता है कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने उनको अहमियत नहीं दी।












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