Motivational Story: कभी समाज ने दिया था ताना , अब ‘Electrician Devi’ के नाम से मशहूर हुई सीता
सीता के पति जितेंद्र मिस्त्रि जब भी काम कर रहे होते थे, तो वह उन्हें गाइड भी करती थी। इसके साथ उन्हें काम करते हुए देखते रहती थीं। सीता की ज़िदगी काफी खुशहाल गुज़र रही थी, लेकिन वक्त कब बदल जाए कोई देख नहीं आया है।
गया, 5 अक्टूबर 2022। (Motivational Story Bihar) बिहार के पुरुष से महिलाएं भी कम नहीं हैं, इस बात को बखूबी साबित कर रही हैं गया जिला की रहने वाली सीता। इलेक्ट्रीशियन नाम सुनते ही ज़ेहन में एक पुरुष की बात सामने आती है, लेकिन इस बात को सीता देवी न ग़लत साबित कर दिया है। गया जिले में काशीनाथ मोड़ पर सीता देवी की इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स रिपेयरिंग करने की दुकान है। सीता देवी का गृहिणी से लेकर 'इलेक्ट्रिशियन देवी' तक के सफर की कहानी बहुत ही दिलचस्प है। आइए जानते हैं किस तरह से सीता देवी घरेलू महिला से बिहार की पहली महिला इलेक्ट्रिशियन की उपाधि हासिल की ?

खुशहाल गुज़र रही थी सीता की ज़िंदगी
सीता देवी भी पुरुषों की तरह बिजली संबंधित गैजेट्स को आसानी से रिपेयर कर लेती हैं। 15 साल पहले सीता देवी आम महिलाओं की तरह ही अपनी ज़िंदगी गुज़र बसर कर रही थी। वह अपने बच्चों औऱ परिवार की ज़िम्मेदारियों को बखूबी निभा रही थीं। उन्हें ना तो किसी नौकरी की ज़रूरत पड़ी औऱ ना ही उन्होंने कोई व्यापार करने का मन बनाया। हां एक बात थी की सीता अपनी पति का जितेन्द्र मिस्त्री के कामों में हाथ ज़रूर बंटाती रहती थी। उनके पति भी पेशे से इलेक्ट्रीशियन थे।

पति की तबियत खराब होने से बढ़ी मुश्किलें
सीता के पति जितेंद्र मिस्त्रि जब भी काम कर रहे होते थे, तो वह उन्हें गाइड भी करती थी। इसके साथ उन्हें काम करते हुए देखते रहती थीं। सीता की ज़िदगी काफी खुशहाल गुज़र रही थी, लेकिन वक्त कब बदल जाए कोई देख नहीं आया है। सीता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ अचानक से उनके पति की तबियत बिगड़ने लगी। इस वजह से सीता भी अपने पति के कामों में हाथ बंटाने लगी। धीरे-धीरे वह पति की तरह ही इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को ठीक करने में माहिर हो गईं।

सीता के कंधों पर आई परिवार की ज़िम्मेदारी
सीता के पति को लीवर में सूजन होने की वजह से वह काम करने में असमर्थ हो गए क्योंकि डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी। पति के कामों में हाथ बंटाने से सीता इलेक्ट्रॉनिक आइटम को बनाने सीख चुकी थीं। पति के स्वास्थ्य खराब होने के बाद सीता के कंधों पर ही परिवार की ज़िम्मेदारी आ गई। फिर क्या था सीता को परिवार के गुज़ारे के लिए दुकान को संभालना ज़रूरी था। यह देखते हुए उन्होंने दुकान की ज़िम्मेदारियों को पूरी तरह से संभाल लिया।

समाज और रिश्तेदारों ने दिया ताना
सीता को काम के सिलसिले में 1 साल के बेटे को साथ लेकर ही बाहर जाना पड़ता था। यह देखकर समाज और उनके रिश्तेदारों ने ताना देना शुरू कर दिया कि पुरुषों वाले काम क्यों कर रही हो, अगर करना ही है तो महिलाओं वाले काम करो। समाज और रिश्तेदारों का ताना सुनने के बाद सीता को हौसला थोड़ा टूटा लेकिन सीता के पति ने उनकी हौसला अफज़ाई की। सीता के पति ने कहा कि दूसरे लोगों की बात को अनदेखा कर ग्राहकों के भरोसे को कायम रखो और बेबाकी से काम करो। पति के हौसला देने के बाद सीता देवी अपने काम को शिद्दत से करने लगी और दुकान की आमदनी से परिवार का खर्च निकलने लगा।

‘इलेक्ट्रेशियन देवी’ के नाम से मशहूर हुई सीता
सीता देवी ने शौक से इलेक्ट्रीशियनका काम नहीं किया लेकिन मजबूरी में ही उन्होंने इस काम को किया। यह काम करने पीछे सबसे बड़ी वजह थी कि सीता ने पति से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे पंखा, टीवी आदी बनाने का हुनर सीखा था और वह उसमें माहिर हो गई थी। इसके अलावा उन्हें कोई काम नहीं आता था। शुरू में थोड़ी मुश्किलें ज़रूर आईं लेकिन अब उनकी दुकान से अच्छी कमाई हो रही है। वह रोज़ान करीब 12 सौ रुपये तक कमा रही हैं। इसके साथ ही लोगों ने उन्हें 'इलेक्ट्रीशियन देवी' की भी संज्ञा दे दी है।
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