'Modi के हनुमान' को LJP से बेइज़्ज़त कर निकाला था, Chirag ने किया चाचा को पस्त, वापिस मिल सकता है पुराना सिंबल
Chirag Paswan: लोकसभा चुनाव 2024 में प्रदेश की सियासत में चाचा और भतीजे की लड़ाई खुलकर सामने आई। पशुपति पारस (चिराग पासवान के चाचा) ने भतीजे चिराग पासवान के सियासी सफ़र को समाप्त करने की कोई कसर नहीं छोड़ी। चिराग पासवान ने भी हार नहीं मानी और ज़बरदस्त राजनीतिक मुकाबला किया।
लोकसभा चुनाव परिणाम से यह साफ़ हो गया कि बिहार में चाचा से ज़्यादा भतीजे ताकत बढ़ी। केंद्रीय मंत्री रहते हुए पशुपति कुमार पारस ने चिराग पासवान ने रामविलास की विरासत वाली सीट तो लिया ही, बंगला तक पर छीन लिया।

मोदी के हनुमान चिराग पासवान ने लंबी राजनीतिक लड़ाई लड़ी और आज की तारीख़ में ना सिर्फ़ उन्होंने अपने पिता की विरासत वाली सीट पर जीत दर्ज कर सांसद बने। बल्कि मोदी कैबिनेट 3.0 में मंत्री भी बन गए।
सियासी चक्र ऐसा घूमा कि अब चिराग पासवान एनडीए में अपने चाचा पशुपति कुमार पारस से ज्यादा पावरफुल हो गए। वहीं पारस का कद पूरी तरह से घट गया है। 14 जून 2021 का वो दिन था जब लोजपा (रामविलास की लोक जनशक्ति पार्टी) तोड़ दी गई।
लोजपा के पांच सांसदों (पशुपति पारस, वीणआ देवी, चंदन सिंह, प्रिंस राज और चौधरी महबूब अली कैसर) ने मिलकर चिराग पासवान को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाने के साथ ही पार्टी अन्य पदों से भी हटा दिया। चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस को उन्होंने अपना नेता चुना।
पशुपति पारस 7 जुलाई 2021 को केंद्रीय मंत्री बनाए गए। इसके बाद चिराग पासवान केंद्र की सियासत से दूर होते ही प्रदेश की राजनीति से किनारे किये जाने लगे। यहां तक की चिराग को अपने पिता रामविलास पासवान के नाम पर मिला बंगला को भी खाली करना पड़ा।
चिराग पूरी तरह से बैकफुट पर आ चुके थे, ऐसा लग रहा था कि अब चिराग सियासी पारी नहीं खेल पाएंगे। रामविलास पासवान की विरासत पर पशुपति पारस पूरी तरह से क़ब्ज़ा करने में जुट गए थे। वहीं चिराग की बिहार में सीएम नीतीश कुमार से भी सियासी जंग छिड़ गई थी।
पारिवारिक लड़ाई से जूझने के बाद भी चिराग ने चुनौतियों को हाथों हाथ लिया और खुद का मुकाम बनाने में जुटे। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजते ही चिराग ने मज़बूती से कमान संभाली और खुद को पीएम मोदी का हनुमान साबित करने में जुट गए। नतीजा यह हुआ कि उनकी पार्टी लोजपा (र) को एनडीए की तरफ़ से 5 सीटें मिलीं।
पीएम मोदी ने पशुपति पारस को राज्यपाल बनाने का लॉलीपॉप थमाते हुए उन्हें शांत कर दिया। चिराग की पार्टी ने पाचों सीटों पर जीत दर्ज की और चिराग पासवान ने पिता की विरासत हाजीपुर सीट से जीत हासिल करते ही पीएम मोदी के हनुमान साबित हुए।
पशुपति पारस ने जिस हाल में चिराग को छोड़ा था अब वैसा ही हाल उनका हो चुका है। जो बंगला चिराग से छीन लिया गया था वह बंगला अब चिराग का वापिस मिल सकता है। क्योंकि चिराग मोदी कैबिनेट में मंत्री बने चुके हैं। 3 बार सांसद चुने गए। पारस के कब्ज़ा वाला बंगला मंत्री का है और पारस अब मंत्री नहीं हैं।
पार्टी सिंबल की बात करें तो चिराग पासवान और पारस की पार्टी का सिंबल फ़्रीज़ है। चिराग पासवान अगर सिंबल के लिए अप्लाई करते हैं। पारस विरोध नहीं करेंगे तो वह पुराना सिंबल चिराग को मिल सकता है।












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