Bihar News: 'सुशासन बाबू' के दावों की फिर खुली पोल, अब Mid Day Meal में फर्जीवाड़ा!, जानिए पूरा मामला
Mid Day Meal Govt School Bihar News: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सरकार तरह-तरह की योजनाओं पर काम कर रही है। आए दिन नए-मए नियम लागू हो रहे हैं ताकि विद्यालय में छात्रों को मौजूदगी बनी रहे। छात्र रोज़ाना स्कूल आएं, इसलिए बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन की भी व्यवस्था की गई।
राज्य सरकार का दावा है कि प्रदेश के हर एक जिले के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन पर हर महीने लाखों रुपये ख़र्च किए जा रहे हैं। बिहार के सभी जिलों के स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए हर महीने करोड़ों रुपये की राशि भेजी जाती है। प्रदेश सरकार का यह जावा ज़मीनी तौर पर खोखला साबित हो रहा है।

वन इंडिया हिंदी की टीम ने मध्याह्न भोजन के मद्देनज़र ग्राउंड रिपोर्ट लिया तो हक़ीकत कुछ और ही सामने आई। प्रदेश के ज्यादातर ज़िलों में मध्याह्न भोजन के लिए जुलाई के बाद से आज (गुरुवार, 9 नवंबर 2023) तक सामाग्री और अन्य चीज़ों के लिए नीतीश सरकार की तरफ़ राशि नहीं भेजी गई है।
नाम ना छापने की शर्त पर स्कूल प्रबंधन के आलाअधिकारी ने बताया कि सरकार के तरफ़ से पैसा नहीं मिलने के बाद भी करीब 4 महीने से उधार लेकर बच्चों को मध्याह्न भोजन करवा रहे हैं। आलम यह हो गया है कि लाखों रुपये का क़र्ज़ हो गया है। वेंडर ने सामाग्री देने से इनकार कर दिया है। गैस सिलिंडर भरवाने तक के पैसे नहीं बचे हैं।
शिक्षा विभाग के आलाअधिकारियों के साथ शिक्षा व्यवस्था पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होती है। स्कूल के प्रतिनिधियों से शिक्षा संबंधित और अन्य मसलों पर जवाब पूछा जाता है। वहीं जब स्कूले से जुड़ी समस्या जैसे मध्याह्न भोजन, स्मार्ट क्लास अदि की व्यवस्था पर बोलते हैं तो, अनुशासनहीनता बताते हुए कार्रवाई की जाती है। एक प्राधानचार्य ने मध्याह्न भोजन संबंधित शिकायत की तो उसी पर कार्रवाई हो गई।
बिहार के सारण जिले से भी ख़बर है कि 54 सरकारी विद्यालयों में मिड डे मील नहीं बना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह कहीं राशन तो कहीं अनाज ख़त्म है। मिली जानकारी के मुताबिक रसाइया संघ 3 दिनों से हड़ताल पर है। अपनी मांगों को लेकर पटना भी पहुंचे थे लेकिन कोई हल नहीं निकला।
45 स्कूलों में रसाइया के नहीं आने से खाना नहीं बना, तो वहीं बचे हुए विद्यालयों में गैस और अनाज खत्म होने की वजह से बच्चों को भोजन नहीं मिला पाया। इसी तरह प्रदेश के सभी ज़िलों के स्कूलों में पिछले 4 महीने से मध्याह्न भोजन के लिए राशि नहीं भेजे जाने की वजह से स्कूल प्रबंधन को वेंडर परेशान करने लगे हैं। उनका कहना है कि लाखों रुपये का भुगतान पेंडिंग है उसे क्लियर करवाएं।












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