कांवड़ यात्रा: 13 घंटे में 108 KM दौड़ कर जलाभिषेक का रिकॉर्ड, पांव छूने के लिए लग जाती है श्रद्धालुओं की भीड़
वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में मां कृष्णा बम ने बताया कि किस तरह बाबा बैद्यनाथ की भक्ति से प्रेरणा मिली और वह शिक्षिका से मां कृष्णा बम बन गई।
पटना, 16 जुलाई 2022। सावन की शुरुआत हो चुकी है, श्रावणी मेले में सुल्तानगंज से देवघर तक बाबा बैद्यनाथ धाम में भक्त आ रहे हैं। इन्हीं सब के बीच मां कृष्णा बम चर्चाओं में हैं। वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में मां कृष्णा बम ने बताया कि किस तरह बाबा बैद्यनाथ की भक्ति से प्रेरणा मिली और वह शिक्षिका से मां कृष्णा बम बन गई। 1982 से लगातार 2019 तक सावन के हर सोमवार को वह सुल्तानगंज से दौड़ कर जलाभिषेक करने देवघर बाबा मंदिर में जाती रही हैं। कोरोना काल की वजह से वह 2 साल बाबा के दरबाबर में हाज़िर नहीं हो पाईं।

बिहार और झारखंड के लोग मानते हैं देवी
मां कृष्णा बम को बिहार और झारखंड के लोग देवी मानते हैं, उनके नाम 13 घंटे में 108 किलो मीटर दौड़कर बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक का रिकॉर्ड भी दर्ज। 1982 से लेकर 2019 तक उन्होंने डाक बम बनकर हर सावन के सोमवार को सुल्तानगंज से दौड़ कर देवघर बाबा का जलाभिषेक किया है। ग़ौरतलब है कृष्णा बम का सफर 70 सालों से लगातार जारी है। आपको बता दें कि मुजफ्फरपुर से ताल्लुक रखने वाली कृष्णा बम की 70 साल है और इस उम्र में भी उनकी डाक कावड यात्रा जारी है।

शरीर का साथ देने तक करेंगी डाक कावड यात्रा
कृष्णा बम ने बताया कि भगवानपुर (वैशाली जिला) के सरकारी स्कूल में साल 1982 में वह शिक्षिका के पद पर तैनात हुई थीं। इसी साल उन्हें बाबा बैद्यनाथ के भक्ति की अचानक प्रेरणा मिली और उन्होंने डाक कावड़ यात्रा करने का संकल्प ले लिया। उन्होंने बाबा से संकल्प लिया कि शरीर के साथ देने तक वह डाक कावड यात्रा से बाबा बैद्यनाथ का हर सावन के सोमवार को जलाभिषेक करेंगी। उन्होंने उस दिन से लेकर 2019 तक हर सावन के सोमवार को दौड़कर बाबा को जल चढ़ाया है। कोरोना काल की वजह से दो साल जलाभिषेक नहीं कर पाई थी।

24 घंटे के अंदर दौड़कर जल चढाने का संकल्प
कृष्णा बम ने बताया कि 1982 में जब उन्होंने जालाभिषेक संकल्प लिया था तो सड़के बहुत ख़राब थी। उन्होंने संकल्प ल्या था बाबा बैद्यनाथ को उत्तर वाहिनी गंगा का जल सुल्तानगंज से लेकर 24 घंटे के अंदर दौड़कर बाबा को चढ़ाएंगी। उन्होंने संकल्प लिया फिर क्या उसे पूरा करने के लिए निकल पड़ी रास्ते बहुत ही ख़राब थे। पहाड़ों और पथरीले रास्ते से होते हुए नक्सलियों के इलाके से गुज़रना पड़ता था। इस दौरान बदमाश लोग को लूट पाट भी कर लेते थे। ऐसा भी नहीं था कि थक जाने से या फिर रात हो जाने से आराम कर लें क्योंकि संकल्प के ऐतबार से बिना कदम रुके ही जलाभिषेक करना होता है। इस तरह से उन्होंने बिना डरे हुए अपने संकल्प को पूरा किया।

मां कृष्ण बम को शक्ति मानते हैं भक्त
सुल्तानगंज से जल लेकर मां कृष्णा बम जब बाबा बैद्यनाथ की तरफ बढ़ती हैं तो उनके पैर छूने के लिए हज़ारों श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियत्रित करने के पुलिस फोर्स की मदद लेनी पड़ती है। भक्त लोग मां कृष्णा बम को शक्ति मानते हैं और यही वजह है कि उनका पांव छू कर आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है। झारखंड और बिहार सरकार की तरफ़ से विशेष पुलिस बल तैनात किया जाता है। हर सोमवार को उनके जाने के रास्ते में फोर्स अलर्ट मोड मे रहती है।

बाबा के जलाभिषेक के बाद ही थमते हैं क़दम
सुल्तानगंज से जल भरकर सावन के हर सोमवार को कृष्णा बम बाबा को चढ़ाती है। ग़ौरतलब है कि जल चढ़ाने जाने के दौरान वह दौड़कर जाती हैं। पुलिस उनके लोकेशन के हिसाब से रास्ता खाली कराती रहती है। कृष्णा बम को लेकर देवघर बाबा मंदिर प्रशासन भी खास इंतज़ाम करता है। उनके देवघर पहुंचने के वक़्त पूरी तरह से रास्ता खाली कराकर बाबा के मंदिर में प्रवेश दिया जाता है। जब वह बाबा को जल चढ़ा देती हैं उसके बाद ही उनके क़दम रुकते हैं। डाक बम के लिए यह संकल्प होता है कि जब बाबा को जल चढाने के बाद ही कदम थमेंगे।

13 घंटे में 108 KM दौड़कर जलाभिषेक का रिकॉर्ड
कृष्णा बम ने बताया कि बाबा की भक्ति से उनके अंदर ये शक्ति आई है। बाबा से कुछ भी नहीं मांगा बिना मांगे ही बाबा ने सब कुछ दे दिया। बाबा को डाक बम बनकर 70 साल की उम्र में जल चढ़ाना बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने बताया कि सबसे कम वक्त 13 घंटे और अधिक समय 16 घंटे है जिसमें बाबा का दौड़कर जलाभिषेक किया है। ग़ौरतलब है कि 108 किलो मीटर दौड़कर ( 13 और 16 घंटे) कृष्णा बम जल चढ़ाती हैं। उनका कहना है कि यह शक्ति बाबा से ही उन्हें मिली है। 2018 में कृष्णा बम शेरपुर मिडिल स्कूल (मुजफ्फरपुर) से रिटायर हुई हैं। कृष्णा बम ने कहा कि उम्र के हिसाब से सरकार ने रिटायर कर दिया लेकिन वह वर्ष 2019 तक डाक बम बनकर बाबा को जलाभिषेक करती रहीं हैं। यह बाबा की भक्ति का ज़ज्बा है।
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