Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Lost Heritage Bihar: ताजमहल की तर्ज़ पर बना डच मकबरा, 300 साल पुरानी धरोहर हुई गुमनामी का शिकार

Lost Heritage Bihar: डच मकबरे के जीर्णोधार के बाबत ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार इसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करे तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘छोटे ताजमहल’ को पहचान मिल सकती है। पर्यटन स्थल विकसित होने से...

Lost Heritage Bihar: बिहार में कई ऐतिहासिक धरोहर हैं, जिन्हें विकसित किया जाए तो, पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। आज हम आपको प्रदेश के छपरा जिले में मौजूद तीन सौ साल पुरान डच मकबरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कि सरकार की अनदेखी वजह से गुमनामी की कगार पर है। ताजमहल को देखने लिए विदेशों से लोग आगरा (उत्तर प्रदेश) आते हैं। ताजमहल के ही तर्ज़ पर डच मकबरा का निर्माण किया गया था लेकिन सरकार की अनदेखी की वजह से ऐतिहासिक धरोहर गुमनाम हो चुकी है। डच मकबरा धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

पुर्तगालियों ने बनाया था व्यवसाय केंद्र

पुर्तगालियों ने बनाया था व्यवसाय केंद्र

ताजमहल की वास्तुकला पर आधारित डच मकबरा करिंगा गांव ( छपरा शहर मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर) स्थित है। सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई पर्यटक स्थल को विकसित कर रही है, लेकिन डच मकबरा के जीर्णोद्धार के लिए सरकार और पर्यटन विभाग की तरफ़ से कोई क़दम नहीं उठाया जा रहा है। मकबरे का इतिहास बताते हुए गांव के बुज़ुर्गों ने बताया कि छपरा में पुर्तगालियों ने व्यवसाय केंद्र बनाया था। इस बात का ज़िक्र सारण राजपत्र के एक लेख में भी है।

पुर्तगालियों ने करवाया था मकबरे का निर्माण

पुर्तगालियों ने करवाया था मकबरे का निर्माण

पुर्तगालियों के लिए जलीय मार्ग के ज़रिए व्यापार का एक मुख्य केंद्र छपरा भी हुआ करता था। 1770 सदी तक छपरा के कारिंगा क्षेत्र पर डच लोगों का बोलबाला था। छपरा को नमक के व्यापार के लिए मुख्य केंद्र बनाया गया था। व्यापार सिलसिले में जैकबस वान हार्न (डच गवर्नर) का यहां आना जाना लगा रहता था। एक दिन अचानक उनका निधन हो गया जिसके बाद पुर्तगालियों ने मकबरे का निर्माण करवाया था। स्थानीय लोग आज भी डच मकबरे को 'छोटा ताजमहल' की संज्ञा देते हैं।

काफी कोशिशों के बाद भी नहीं निकला परिणाम

काफी कोशिशों के बाद भी नहीं निकला परिणाम

ग्रामीणों की मानें तो डच मकबरे के जीर्णोद्धार के लिए कोशिशें तो बहुत हुई लेकिन उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। दीपक आनंद (पूर्व जिलाधिकारी, सारण) ने भी राज्य सरकार को मकबरे के जीर्णोद्धार के लिए चिट्ठी लिखी थी। जिसके बाग स्थानीय स्तर पर पुरातत्व विभाग ने जांच भी की थी लेकिन कोई ठोस क़दम नहीं उठाया गया। इसके बाद नीलेश देवड़े (जिलाधिकारी) ने डच राजदूत समेत नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय तक को मकबरा के जीर्णोद्धार के लिए संपर्क किया। वहीं राज्य और केंद्र सरकार से भी इस बाबत बात की लेकिन कोई खास परिणाम सामने नहीं आया।

'रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद'

'रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद'

डच मकबरे के जीर्णोधार के बाबत ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार इसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करे तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर 'छोटे ताजमहल' को पहचान मिल सकती है। पर्यटन स्थल विकसित होने से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इसके साथ ही छपरा और सारण को अलग पहचान भी मिलेगी। बिहार में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। अगर डच मकबरे के जीर्णोधार पर सरकार ध्यान दे देगी तो स्थानीय लोगों के हालात सुधर जाएंगे। सरकार को चाहिए की इसे पर्यटन स्थल के तौर विकसित करे ताकि रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके।

ये भी पढ़ें: Banana Man Bihar: कौन हैं रामेश्वर सिंह जिन्हें मिली ये उपाधि, कृषि पद्धति के कायल हैं लोग

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+