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Munger Lok Sabha Seat: पैरोल पर हुई अनंत सिंह की रिहाई, क्या 'छोटे सरकार' लगाएंगे ललन की नैया पार?

Lok Sabha Election, Munger Seat: बिहार का मुंगेर लोकसभा क्षेत्र और मोकामा विधानसभा एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। इसकी वजह कोई और नहीं बल्कि 'छोटे सरकार' के नाम से मशहूर पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह है। अनंत सिंह पैरोल पर जेल से बाहर आ गए हैं। यह वही अनंत सिंह है जिन्हें घर के अंदर एके-47 रखने के मामले में न्यायालय ने 10 वर्षों की सजा सुनाई थी।

पैरोल पर बाहर आने के बाद अनंत सिंह सबसे पहले अपने विधानसभा क्षेत्र मोकामा पहुंचे और समर्थकों से भेंट मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एनडीए कैंडिडेट राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के 5 लाख से अधिक वोटों से जीतने का दावा भी किया। असली कहानी यहीं से शुरू होती है...
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Munger Lok Sabha Seat Anant Singh Effect

लोकसभा चुनाव के चौथे चरण के अंतर्गत मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में 13 मई को मतदान होना है। मोकामा विधानसभा क्षेत्र मुंगेर लोकसभा के अंतर्गत ही आता है। मोकामा से आनंद सिंह पूर्व विधायक रह चुके हैं और इलाके में अच्छा खासा दमखम रखते हैं। मौजूदा वक्त में इस सीट से 'छोटे सरकार' की पत्नी नीलम देवी विधायक हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह का पैरोल पर बाहर आना अपने आप में एक बड़ा संकेत दे रहा है।

छोटे सरकार की अपनी पहचान
दरअसल, मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के लिए मतदान चौथे चरण में 13 मई को होना है और ठीक इससे पहले मोकामा के पूर्व बाहुबली सांसद अनंत सिंह पैरोल पर जेल से बाहर आए हैं। वैसे तो उन्हीं पेरोल पुश्तैनी जमीन के बंटवारे के लिए मिली है।

हालांकि, सूत्रों की माने तो लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह का जेल से बाहर आना राजनीतिक मायने में भी काफी अहम है। अनंत सिंह एक ऐसे नेता है जो न सिर्फ अपने विधानसभा बल्कि पूरे मुंगेर लोकसभा में एक अलग छवि रखते हैं। लोगों के बीच वो रॉबिनहुड की पहचान रखते हैं। यही वजह है कि पूरे इलाके में उन्हें 'छोटे सरकार' के नाम से जाना जाता है।

लालू ने भेजा था साथ आने का न्योता
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर अनंत सिंह को पैरोल पर रिहा लोकसभा चुनाव के समय में ही क्यों किया गया? अगर इस सवाल का जवाब तलाशें तो इसके पीछे की कहानी काफी पुरानी है। ये किस्सा बिहार में महागठबंधन की सरकार के गठन के साथ जुड़ा हुआ है।

दरअसल, जब मोकामा के पूर्व बाहुबली सांसद को जब अदालत ने सजा सुनाई थी तो उसके कुछ महीनों बाद मोकामा में उप चुनाव कराए जाने का ऐलान किया गया। इस उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी राजद के टिकट पर चुनाव मैदान में थी। नीलम देवी इस चुनाव में जीतकर मोकामा से विधायक बनी। हालांकि, लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले जब नीतीश कुमार ने राजद से गठबंधन तोड़ कर एनडीए का दामन दोबारा थामा तब फ्लोर टेस्ट में नीलम देवी ने एनडीए सरकार को सपोर्ट किया था।

पैरोल पर बाहर आये अनंत सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा,"लालू यादव ने उनको न्योता भेजा था। उनके साथ गए पर मन नहीं मिला तो वापस चले आए।" उन्होंने यह भी कहा कि वो हमेशा नीतीश कुमार के साथ थे पर उनसे मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनसे क्यों मिलेंगे।
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ललन सिंह ने खुद पाटी थी दूरियां
नीलम देवी को जिस टाइम राजद का सिंबल मिला बिहार में महागठबंधन की सरकार थी और इस सरकार में जदयू भी सहयोगी की भूमिका निभा रही थी। ऐसे में नीलम देवी के लिए स्थानीय सांसद ललन सिंह भी प्रचार करने पहुंचे थे। बता दें, ललन सिंह और नीलम देवी 2019 लोकसभा चुनाव के समय आमने सामने भी रह चुके हैं। उस दौरान जेडीयू एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। ललन सिंह जहां जेडीयू के उम्मीदवार थे वहीं नीलम देवी कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थी। बाद में जेडीयू के महागठबंधन में शामिल होने के बाद उपचुनाव के दौरान ललन सिंह नीलम देवी के लिए प्रचार करने पहुंचे थे।

यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह वही नेता है जिनके ऊपर राजनीतिक हलकान में यह चर्चा होती है की अनंत सिंह के सजा के पीछे कहीं ना कहीं इनकी भी कुछ रूचि है। हालांकि इस बात का अभी तक कोई आधिकारिक खुलासा हुआ नहीं है। लेकिन अनंत सिंह की पत्नी और उनके समर्थक इस बात को कई बार दूसरे तरीके से रख चुके हैं। ऐसे में जब मोकामा में उपचुनाव हुआ तो अनंत सिंह के लिए ललन सिंह का प्रचार करना अपने आप में एक अलग संदेश था। अब जब लोकसभा चुनाव का समय है तो फिर एक बार यह जोड़ी देखने को मिल रही है।

बाहुबलियों का इलाका है मुंगेर
जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद हैं और पार्टी ने वापस से इन पर भरोसा जताया है। जेडीयू ने एक बार फिर से मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के ललन सिंह को अपना कैंडिडेट घोषित किया है। उनकी उम्मीदवारी के घोषणा के साथ ही पूरे इलाके में एक अलग सा माहौल देखने को मिल रहा है। इसकी वजह यह है कि मुंगेर लोकसभा का इलाका सवर्ण बहुल और बाहुबली नेताओं का इलाका माना जाता है।

ऐसे में जब ललन सिंह चुनाव प्रचार कर रहे थे तो देखने वाली बात यह थी कि उनके साथ शुरुआती दौर से ही मोकामा की विधायक नीलम देवी साथ नजर आ रही थी। लेकिन उनके साथ रहते हुए भी बात उतनी नहीं बन पा रही थी जितनी अनंत सिंह के सिर्फ एक झलक दिखा देने से होती है।
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नीतीश कुमार के वोट पर भी हैं छोटे सरकार की पकड़
ऐसे में जैसे ही इस बात की भनक ललन सिंह को लगी तो सूत्र बताते हैं कि उन्होंने इस संबंध में पार्टी फॉर्म में काफी गहन बातचीत की और आखिरकार यह तय किया गया कि पैरोल पर अनंत सिंह की रिहाई करवाई जाए। भले ही अनंत सिंह कहीं चुनाव प्रचार करने नहीं जाएं लेकिन अगर वह जेल से बाहर रहने भर से ही क्षेत्र में अच्छा खासा दबदबा रहता है जिसका प्रभाव वोट बैंक पर भी दिख सकता है। सबसे बड़ी बात है की अनंत सिंह नीतीश कुमार के कोर वोटर माने जाने वाले मतदाताओं पर भी अपनी पकड़ रखते हैं। उनके पैरोल पर रिहाई की सबसे बड़ी वजह भी यही बताई जा रही है।

अनंत मतलब मदद का नहीं कोई अंत
बताते चलें, मुंगेर लोकसभा क्षेत्र से राजद ने अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी को अपना कैंडिडेट घोषित किया है। अशोक महतो नीतीश कुमार के मूल वोटरों में सेंधमारी करने में सफल होती दिख रही हैं। यह ललन सिंह के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा था। ऐसे में ललन सिंह के लिए एकमात्र उपाय इस इलाके से 2019 में उनके खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने वाले अनंत सिंह और उनकी पत्नी ही रह गए थे। क्योंकि अनंत सिंह ने इस इलाके में अपनी जो छवि बनाई है वह पूरे इलाके के हर एक जनता के लिए खास है। ऐसा कहा जाता है की अनंत सिंह के पास जो भी मदद मांगने जाता है वह यथासंभव हर किसी की मदद करते हैं ऐसे में उनका एक अलग ही वर्चस्व और वोट बैंक है।

अशोक महतो को लगेगा करारा झटका!
इस चुनाव में राजद कैंडिडेट अशोक महतो के जो वोटर माने जा रहे हैं उसे पर भी अनंत सिंह की अच्छी खासी पकड़ है। अनंत सिंह जब पहली बार विधायक बने थे तो उसे दौरान उनका इस इलाके में सबसे अधिक टमटम चलता था और इन टमटमों के गाड़ीवान इसी समाज के लोग होते थे। अनंत सिंह को अपने शुरुआती दिनों में जब वर्चस्व कायम रखने में समस्या आई थी तो इन्हीं समाज के लोगों ने उन्हें पनाह दिया था।

अनंत सिंह के गिरोह में अगर संख्या बल देखा जाए तो जितनी संख्या उनके खुद की जाति की है उससे कहीं अधिक संख्या पचपनिया समाज की है। ऐसे में अनंत सिंह के बाहर आने से इन वोटरों की भी गोलबंदी होगी जो एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अनंत सिंह पैरोल पर रिहाई में भले ही प्रचार ना करें लेकिन उनके समर्थक ललन सिंह के लिए वोट अपील करते दिखेंगे और यह एनडीए के लिए काफी फायदेमंद साबित होने वाला है।
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